विभिन्न रोगों की एक महौषधि - अदरक

विभिन्न रोगों की एक महौषधि - अदरक

शरद ऋतु आरम्भ होते ही नया अदरक आने लगता है। यह स्वयं में एक महौषधि होने के साथ ही साथ एक वैद्य भी है। यह शारीरिक विकारों को दूर कर रक्त संचार की वृद्धि करता है। इससे अत्यधिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और पाचन क्रिया सुदृढ़ होती है।

शरद ऋतु में आने वाला प्रत्येक फल व साग सब्जी जैसे गाजर, मूली, शलजम, पालक, बथुवा, सेब, सन्तरा, अमरूद और गन्ना आदि सभी में पर्याप्त मात्रा में विटामिंस, प्रोटीन, कार्बोहाइडे्रट, आयरन आदि विद्यमान होते हैं जो मानव को भरपूर शक्ति प्रदान कर रक्त की वृद्धि करते हैं।

अदरक जहां भोजन को स्वादिष्ट करता है वहां स्वास्थ्यवर्धक भी है। इसकी सब से बड़ी विशेषता यह है कि यह कच्चा हो या सूखा, गांठ रूप में हो या चूर्ण रूप में, इसके गुण कदापि नष्ट नहीं होते। इसका स्वाद तीखा होता है और तासीर गर्म होती है जिससे सर्दियों में इसके सेवन से सर्दी का मुकाबला करने हेतु पर्याप्त गर्मी (ऊर्जा) मिलती रहती है। इसका उपयोग भोजन, सलाद, अचार, शरबत और चूर्ण रूप में किया जाता है। अदरक के न मिलने पर इसके विकल्प रूप में सौंठ का प्रयोग किया जा सकता है।

अदरक जहां पेट को नरम रखता है वहां कब्ज, खांसी, बलगम आदि को दूर करने के साथ ही साथ सांस की बदबू को भी समाप्त करता है और दिमाग के लिये भी अधिक गुणकारी है। इससे भूख की कमी दूर होती है। बदहजमी और पेट गैस को समाप्त करने की औषधि है।

अदरक में इतनी गर्मी होती है कि इसके सेवन से छाती व गले में जमा बलगम पिघलकर मल के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है। बुखार को जड़ से निकाल फेंकने की इसमें व्यापक क्षमता होती है।

आजकल अत्यधिक खाद वाली सब्जियों एवं कारबाइड से पके फलों द्वारा उत्पन्न शरीर में अनेक विकारों का निदान नित्य अदरक के सेवन से सम्भव है।

इस प्रकार अदरक विभिन्न रोगों के लिए रामबाण है जिससे रोगों का निवारण होकर स्वास्थ्य ठीक रह सकता है।

पेचिश:- बिगड़ी पेचिश में सूखे अदरक का चूर्ण, सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर दोनों वक्त भोजन के बाद ठंडे पानी से सेवन करना लाभप्रद है।

गैस:- अफारा, पेट में हवा (गैस) आदि में अदरक का सेवन उपयोगी है।

कै-पाचन के गड़बड़ होने पर जी मिचलाने, उल्टी (कै) होने पर अदरक के रस में पुदीने का रस मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।

जुकाम:- अदरक के रस में शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से सर्दी में हुआ जुकाम ठीक हो जाता है।

खांसी:- पान के पत्ते में अदरक का सेवन करना लाभप्रद है।

बुखार:- अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके पहले पानी में पकाकर फिर चाय की पत्ती डालकर और तुलसी की पत्ती के साथ पकाकर चाय के सेवन से बुखार को काफी आराम पहुंचता है।

कफ:- सर्दी में बलगम (कफ) के बढ़ जाने पर अदरक को कूट कर देसी घी में भूनकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से आराम पहुंचता है।

ददर्:- सूखे अदरक के चूर्ण को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करने से दर्द वाली जगह आराम पहुंचाता है।

पित्त:- अदरक का रस व शहद मिलाकर सेवन करने से इस रोग में आराम पहुंचता है।

कान ददर्:- अदरक के रस की एक एक या दो-दो बूंदें डालने पर कान दर्द को आराम पहुंचता है।

- वी के. राघव

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