अब कैराना में चिपके एनआरसी से संबंधित पोस्टर

अब कैराना में चिपके एनआरसी से संबंधित पोस्टर

शामली। असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) की आंच कैराना तक पहुंच गई है। कल कस्बे के कई मोहल्लों की दीवारों पर संबंधित पोस्टर चस्पा किए गए। इससे कस्बे में सनसनी फैल गई। जानकारी मिलते ही खुफिया विभाग सक्रिया हो गया। दीवारों पर लगे पोस्टरों पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इण्डिया का सन्दर्भ दिया गया है। देर शाम खुफिया विभाग की टीम ने कैराना पहुंचकर जांच की। वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

नगर के आलकलां, बिसातयान, सरावज्ञान, बेगमपुरा, दरबार कलां समेत विभिन्न मोहल्लों की दीवारों पर कुछ पोस्टर चिपके नजर आए। पोस्टरों पर पिछले दिनों असम सरकार द्वारा लागू किये गए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) की आलोचना करते हुए अधिकारों का गलत इस्तेमाल बंद करने की चेतावनी दी गई है। शीर्ष पर नागरिकता बचाने का आह्वान किया गया है। लोगों को बांटने की चाल को रोकने की बात भी लिखी गई है। क्या है मामला

असम में एनआरसी ने अंतिम सूची जारी की है। इसमें 40 लाख लोगों को भारतीय नागरिकता से वंचित कर दिया गया है। 2 करोड़ 89 लाख लोगों को एनआरसी ने भारतीय नागरिक माना है। इसके बाद राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों में भय का माहौल है। लोग आशंकित हैं कि उन्हें देश से बाहर भेजा जाएगा। क्या है एनआरसी

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में जिनके नाम नहीं होंगे, उन्हें अवैध नागरिक माना जाएगा। इसमें उन भारतीय नागरिकों के नाम शामिल किए जा रहे हैं, जो 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे हैं। एनआरसी उन राज्यों में लागू होती है जहां अन्य देश के नागरिक भारत आ जाते हैं। एनआरसी की रिपोर्ट ही बताती है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। 1947 में जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो कुछ लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान चले गए, लेकिन उनकी जमीन असम में थी और लोगों का दोनों ओर से आना-जाना बंटवारे के बाद भी जारी रहा। तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और अब बांग्लादेश से असम में लोगों का अवैध तरीके से आने का सिलसिला जारी रहा।

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