पुलिस-प्रशासन के पैरों पर खड़ी खनन की बादशाहत...बसेड़ा में वैध पट्टों पर नियम विरूद्ध खनन में प्रशासन की मिलीभगत, छापेमारी के नाम पर कर दी खानापूर्ति

पुलिस-प्रशासन के पैरों पर खड़ी खनन की बादशाहत...बसेड़ा में वैध पट्टों पर नियम विरूद्ध खनन में प्रशासन की मिलीभगत, छापेमारी के नाम पर कर दी खानापूर्ति

कैराना। क्षेत्र के ग्राम बसेड़ा में प्रशासन और सफेदपोश नेता के गठजोड़ से खनन का खेल युद्धस्तर पर जारी है। वैध पट्टों की आड़ में खनन माफिया नियम विरूद्ध यमुना का सीना चीर रहे हैं। मामला मीडिय़ा की सुर्खियों में आया, तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रशासनिक टीम ने खनन प्वाइंट पर जाकर छापेमारी की। दावा है कि मौके पर न तो खनन होता पाया गया और ना ही कोई रेत का वाहन अथवा मशीनें मिलीं। हालांकि, छापेमारी के दौरान भी खनन प्वाइंट पर पॉर्कलेन मशीन खड़ी रही, लेकिन टीम में शामिल अधिकारियों ने भी पॉर्कलेन को कब्जे में नहीं लिया। लिहाजा, प्रशासन द्वारा की गई खानापूर्ति कार्रवाई पर टीम की कार्यप्रणाली भी कटघरे में खड़ी होती नजर आ रही है।

कैराना क्षेत्र के ग्राम बसेड़ा में शासन ने ई-टेंडरिंग के माध्यम से वैध बालू खनन हेतु पांच साल का पट्टा शहरयार हुसैन नामक कंपनी के नाम आवंटित किया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की गाइडलाइन के विपरीत होता खनन चर्चाओं में रहा है। बरसात के बाद खनन पर लगी पाबंदी के हटने से खनन का कारोबार शुरू हो चुका है। खनन ठेकेदार सफेदपोश और प्रशासन के गठजोड़ से तमाम नियम-कायदों को ताक पर रखकर युद्धस्तर पर खनन को अंजाम दे रहा है। मानक के विरूद्ध यमुना में जेसीबी व पॉर्कलेन मशीनें उतार दी है और रेत को डंफरों, ट्रकों तथा ट्रैक्टर ट्रॉलियों में ओवरलोड भरकर सप्लाई किया जा रहा है।

प्रशासन की देखरेख में फूल-फूल रहे इस स्याह कारोबार के बदले माफिया चांदी के सिक्कों में खेल रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि सूर्यास्त के बाद भी रात्रि में खनन-माफिया अधिकारियों की शह पर यमुना का सीना छलनी कर रहे हैं। नदी से युद्धस्तर पर खनन के चलते यमुना की धारा भी बदलती जा रही है। यह मामला मीडिय़ा की सुर्खियों में आने के बाद शनिवार को आखिकार जिला प्रशासन हरकत में आ गया।

उच्चाधिकारियों की फटकार पर तहसीलदार रनबीर सिंह व नायब तहसीलदार कामेंद्र गुप्ता कानूनगो एवं लेखपालों की टीम के साथ खनन प्वाइंट पर पहुंचे और खनन प्वांइट पर मौजूद ठेकेदार के लोगों से कागजों की जांच-पड़ताल की। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि खनन प्वाइंट पर कोई खनन होता नहीं मिला और न मौके पर कोई पॉर्कलेन मशीन तथा रेत से भरे वाहन मिले। घंटों तक जांच-पड़ताल चलती रही, जिसके बाद दोनों अधिकारी कानूनगो और लेखपालों की टीम बनाकर खनन पट्टे की भूमि की पैमाइश कराने के लिए मौके पर छोड़ आई।

छापेमारी से पहले किसने की सूचना लीक?

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प्रशासनिक टीम की खनन प्वाइंट पर छापेमारी की सूचना पहले से ही खनन माफियाओं को लग गई, जिसके बाद उन्होंने खनन प्वाइंट पर कुछ देरी के लिए अपना कार्य बंद कर दिया और जब तक टीम मौके पर पहुंची, वहां खड़ी पॉर्कलेन मशीनों तथा रेत के वाहनों को इधर-उधर कर दिया गया। माना जा रहा है कि छापेमारी की सूचना अधिकारियों के अधीनस्थों ने पहले ही लीक कर दी, जिसका खनन माफियाओं को सीधा फायदा मिल गया।

अफसर त्योहारों में व्यस्त, माफिया मस्त

पिछले कई दिनों से स्थानीय अधिकारी भी दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैयादूज के त्योहारों के चलते व्यवस्था बनाने में व्यवस्त रहे, जिसका खनन माफियाओं ने खूब फायदा उठाया और बेखौफ होकर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए यमुना नदी से बड़े पैमाने पर नियम विरूद्ध खनन को अंजाम दिया गाय। वैसे, यदि खनन की ही बात करें, तो अधिकारियों की साठगांठ के चलते माफियाओं का इकबाल हमेशा बुलंद रहा है, जिसका खामियाजा खाकी वर्दीधारियों के सिर भी फूटता रहा है।

रास्ते में मिला था रेत से भरा डंफर

खनन प्वाइंट पर छापेमारी करने जा रही टीम को गांव मलकपुर के निकट बसेड़ा की ओर से रेत से लदा एक डंफर आता हुआ दिखाई दिया। नायब तहसीलदार कामेन्द्र गुप्ता के अनुसार, उक्त डंफर को रोककर उसकी रॉयल्टी चेक की गई, जिसके सही मिलने पर छोड़ दिया गया। ऐसे में सवाल यह भी जब टीम को रास्ते में रेत से लदा डंफर मिला, तो फिर बिना खनन किए वो कहां से आ गया? और जब तक टीम खनन प्वाइंट पर पहुंची, तो उन्हें कैसे भनक लग गई, जो खनन बंद कर दिया गया।

कटघरे में प्रशासन की कार्यप्रणाली

बसेड़ा में खनन प्वाइंट पर छापेमारी करने गई टीम की कार्यप्रणाली भी कटघरे में खड़ी होती दिख रही है। यदि शासन ने संज्ञान लिया, तो अधिकारियों की गर्दन फंस भी सकती है, क्योंकि नायब तहसीलदार कामेन्द्र गुप्ता ने मीडिय़ाकर्मियों को खनन प्वाइंट पर कार्रवाई के दौरान के जो चित्र मुहैया कराए हैं, उनमें एक चित्र में पॉर्कलेन मशीन भी साफ दिख रही है। हालांकि, पॉर्कलेन को उन्होंने काफी हद तक बचाने का प्रयास भी किया, लेकिन वह कैमरे में कैद हो गई। सवाल है कि आखिर जब प्रशासन मौके पर पॉकलेन मशीन के मौके पर खड़ी मिलने के बावजूद भी नहीं कब्जे में लेगा, तो फिर खनन पर कैसे अंकुश लग पाएगा।

छोटी मछलियों को पकडऩे में माहिर है अधिकारी

लंबे समय से कैराना क्षेत्र में यमुना नदी से खनन माफिया काला सोना निकालकर प्रदेश सरकार को करोड़ों की राजस्व का चूना लगा रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर स्थानीय अधिकारियों का रवैया यह रहा है कि रेत के बड़े अजगरों को बचाकर बैल बुग्गियों में रेत बेचने वाली छोटी मछलियों पर चाबुक चलाया जाता रहा है। यही कारण है कि खनन पर प्रतिबंध नहीं लग पाया है।

टीम में शामिल नहीं थे खनन इंस्पेक्टर

खनन प्वाइंट पर कार्रवाई के लिए जो टीम पहुंची थी, उसमें तहसीलदार और नायब तहसीलदार के अलावा कानूनगो एवं लेखपाल मौजूद थे, लेकिन खनन इंस्पेक्टर का शामिल न होना भी अपने आप में कई सवालियों को खड़ा कर रहा है। पूर्व में खनन इंस्पेक्टर भी अवैध खनन को लेकर चर्चाओं में रहे हैं।

क्या ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रोक पाएंगे खनन?

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी डॉ. अमित पाल शर्मा ने कैराना में चार्ज मिलने के बाद नासूर बनी अतिक्रमण की समस्या से निजात दिलाने के साथ-साथ डीजल, पेट्रोल की नाजायज बिक्री व अन्य तमाम अवैध धंधों पर अंकुश लगाने का काम किया, तो वहीं अब यह देखना होगा कि क्या ज्वाइंट मजिस्ट्रेट खनन माफियाओं की रीढ़ पर वार कर पाएंगे या फिर यूं ही यमुना से नियम विरूद्ध खनन जारी रहेगा। यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

-इनका कहना...

''बसेड़ा खनन प्वाइंट पर पट्टों की जांच-पड़ताल करने गए थे। सफाई दी कि मौके पर जेसीबी थी, लेकिन पॉर्कलेन मशीन नहीं। पैमाइश के लिए टीम लगाई गई है।''

-रनबीर सिंह, तहसीलदार कैराना।

''खनन की शिकायत पर जांच के लिए टीम भेजी गई है। जल्द ही खनन इंस्पेक्टर के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। नियम विरूद्ध खनन होने नहीं दिया जाएगा।''

-डॉ. अमित पाल शर्मा, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी कैराना।

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