फिर टूटी मामौर झील, सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न...बरसात में ओवरफ्लो होकर दूसरी बार टूटी झील, किसानों को हुआ लाखों का नुकसान

कैराना। बरसात के मौसम में इस साल दूसरी बार फिर से मामौर झील के ओवरफ्लो होने से किसानों के अरमान पानी में बह गए हैं। झील के टूटने के कारण दर्जनों किसानों की सैकड़ों बीघा धान, चारा, सब्जियों की फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो गई। इसे लेकर किसान बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं। वहीं, निरंतर बारिश के चलते आसपास के किसानों में फसलें डूबने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से रोकथाम के उपाय कराने की गुहार लगाई है।

पिछले कई दिनों से रूक-रूक कर हो रही मूसलाधार बारिश खेती-खलिहान के लिए आफत साबित हो रही है। बारिश के कारण किसानों की फसलों में पानी भरने से वह बेकार हो रही है। रविवार की देर रात क्षेत्र के मामौर में झील ओवरफ्लो होकर टूट गई, जिस कारण आसपास खड़े खेतों में झील का पानी घुस गया। सैकड़ों बीघा फसलें पानी में जलमग्न हो गई। सुबह जैसे ही किसान अपने खेतों की ओर पहुंचे, तो झील की तबाही देखकर चिंता में पड़ गए। किसानों के खेतों में खड़ी धान, चारे व विभिन्न सब्जियों की फसलें पानी में डूबी हुई थी। किसानों ने इसकी जानकारी स्थानीय को प्रशासन को दी, जिस पर टीम ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया और अपनी रिपोर्ट बनाई। इसके बाद टीम किसानों को आश्वस्त कर लौट आई। वहीं, निंतर चल रही बारिश से आसपास के किसानों को भी तबाही की चिंता सताने लगी है, क्योंकि आए साल झील इसी प्रकार किसानों के दिलों के अरमानों पर पानी फेर देती है। यही कारण है कि किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसका स्थायी हल आजतक नहीं निकल पाया है। पीडि़त किसानों ने सरकार से तबाह हुई फसलों का मुआवजा देने तथा समस्या का स्थायी हल निकाले जाने की मांग की है।

-मामौर झील टूटने का मुख्य कारण

कई दशक पूर्व नगरपालिका द्वारा कस्बे की निकासी का पानी नालों का निर्माण कराकर मामौर झील में पहुंचाना शुरू किया था। चूंकि अब बरसात चल रही है और बरसात के साथ-साथ कस्बे की निकासी का पानी जब मामौर झील में पहुंचेगा, तो उसका ओवरफ्लो होकर टूटना लाजिमी है, क्योंकि झील की इतनी क्षमता नहीं है। आए साल इसी प्रकार झील तबाही मचाती रहती है।

-झील में बह गए थे तीन घर

लगभग डेढ माह पूर्व भी मामौर झील ओवरफ्लो होकर टूट गई थी। उस समय किसानों की फसलों के साथ-साथ लोगों के घरों में भी पानी घुस गया था। यही नहीं, तीन ग्रामीणों के मकान भी भर-भराकर गिर गए थे। इतना सबकुछ होने के बावजूद भी स्थानीय प्रशासन कोई खास कदम नहीं उठा सका।

...तो कैसे निकलेगा समस्या का हल

पूर्व सांसद स्वर्गीय बाबू हुकुम सिंह ने मामौर झील से तबाही का मुद्दा सदन में कई बार उठाया। उन्होंने किसानों के दु:ख-दर्द को समझा और समस्या के निराकरण की भी सरकार से मांग की। इस साल हुकुम सिंह के निधन के बाद से किसानों की समस्याओं को लेकर कोई गंभीर नहीं है। किसानों पर गुजर-बसर के लाले पड़ते नजर आ रहे हैं।

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