रेत के पहाड़ से ओवरलोडिड वाहन बेलगाम, प्रशासन मौन...प्रदेश में फिलहाल सितंबर तक खनन पर प्रतिबंध

कैराना। प्रदेशभर में सरकार की खनन नीति है कि मानसून में एक जुलाई से 30 सितंबर पर खनन पर पूर्णत: प्रतिबंध रहेगा। खनन ठेकेदार वैध पट्टों पर भी खनन नहीं कर सकेंगे। ऐसे में खनन के काले कारोबार को बरकरार रखने के लिए खनन माफियाओं ने रेत के खड़े किये गए पहाड़ को अपना हथकंडा अपनाया है। आर्यपुरी में आबादी के बीच में लगाए गए रेत के स्टॉक से बड़े पैमाने ओवरलोड वाहन भरकर निकाले जा रहे हैं। हालत यह है कि रोड पर कभी-भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ओवरलोड के कारण क्षेत्र की सड़कों की हालत खराब हो चुकी है। सफेदपोश नेता और प्रशासन के गठजोड़ से चल रहे इस खेल में व्यवस्था मौन बनी हुई है।

शासन ने निर्माण कार्यों में उत्पन्न हुई रेत पर प्रतिबंध की समस्या पर खनन करने हेतु ई-टेंडरिंग के माध्यम से पट्टे आवंटित किए थे। इसी क्रम में कैराना क्षेत्र के ग्राम बसेड़ा में भी पांच साल के लिए पट्टा छोड़ा हुआ है। मानसून से पूर्व खनन ठेकेदार ने सुप्रीम के आदेश और एनजीटी के आदेशों को ठेंगा दिखाकर अवैध रूप से कैराना देहात के आर्यपुरी में स्थित स्टील फैक्ट्री के निकट आबादी के बीच रेत का पहाड़ खड़ा कर लिया था। स्थानीय एक सफेदपोश नेता और प्रशासन तथा खनन अधिकारी के गठजोड़ के चलते यह काला कारोबार व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करता रहा है। आखिर आबादी के बीच में रेत के स्टॉक की परमिशन कैसे हुई है? यह सवाल ऐसा है जो अधिकारियों के गले लिए फांस भी बन सकता है। बताया जा रहा है कि उक्त रेत के स्टॉक से सफेदपोश के द्वारा प्रशासन की साठगांठ के चलते खनन माफियाओं ने ओवरलोड में अधिक मुनाफा कमाने का नया फंडा अपनाया है, जहां से रात के अंधेरे में ओवरलोड रेत से भरकर वाहन निकाले जा रहे हैं। इस काली कमाई के पीछे चांदी काटने के लिए माफिया रेत से अंडरलोड से हटकर कई गुना अधिक भर रहे हैं, जिसके बाद रेत के वाहन बाईपास रोड से होते हुए पानीपत रोड से निकलकर कांधला तिराहे से होकर दूसरे शहरों में भेजे जा रहे हैं, ताकि मुनाफा अधिक कमाया जा सके। वहीं, ओवरलोड के कारण मार्गों पर कई बार हादसा होने से बाल-बाल बच जाते हैं। एक ओर जहां सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त कराने का दम भर रही है, तो वहीं रेत के ओवरलोड वाहनों ने सड़कों की हालत को बदतर कर दिया है। रेत के ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कों में गहरे-गहरे गड्ढ़े बनने से लोग हादसों के शिकार हो रहे हैं। सवाल यही है कि आखिर प्रशासन की तंद्रा कब टूट पाएगी? क्या यूं ही ओवरलोड रेत के वाहन दौड़ते रहेंगे या फिर स्थानीय प्रशासन ने साठगांड कर ओवरलोड की अनुमति दे दी? बता दें कि प्रदेश सरकार ने गत 1 जुलाई से आगामी 30 सितंबर तक प्रदेशभर में किसी भी खनन पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा रखा है, क्योंकि मानसून में खनन के कारण यमुना नदी में पानी की आवाजाही से कई बार बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। माफियाओं ने युमना से खनन तो बंद कर दिया, लेकिन पूर्व में लगाए गए स्टॉक से ओवरलोड जमकर चलाया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि आखिर ओवरलोड पर कार्रवाई कब तक हो पाएगी। यह तो आने वाला समय ही बताएगा, जो समय के गर्भ में छिपा है।

-आश्रम व सत्संग भवन करीब, श्रद्धालु परेशान

आर्यपुरी में स्टील फैक्ट्री के निकट भारी मात्रा में यमुना नदी से खनन कर जो स्टॉक लगाया गया है, उससे कुछ ही कदम की दूरी पर प्राचीन पीयूष अयन आश्रम व सत्संग भवन हैं। धर्मस्थलों के निकट और आबादी के बीच में रेत के स्टॉक के चलते जहां रेत उड़ती है, तो वहीं ओवरलोड वाहनों के कारण वहां आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं, आसपास में निवास करने वाले लोग भी इससे परेशान हैं। लेकिन प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है।

-30 घनमीटर स्टॉक की है परमिशन

बताया जा रहा है कि प्रशासन की ओर से जीवन कुमार के नाम से 6 जून 2018 से 6 जून 2019 तक 30 घन मीटर रेत स्टॉक करने की परमिशन दी हुई है, लेकिन खनन माफियाओं ने आबादी के बीच में मानक से अधिक रेत स्टॉक रखा है। साफ है कि कहीं न कहीं प्रशासन भी इस खेल में बराबर शरीक है।

-इनका कहना...

''मैंने आज ही ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया है। कांधला में रेत से भरा एक डंफर बंद किया गया है, जबकि शामली और थानाभवन में भी कार्रवाई की गई है। ओवरलोड कतई चलने नहीं दिया जाएगा।''

-मुंशीलाल, एआरटीओ, शामली।

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