हथियारों के सौदागरों का आखिर कब टूटेगा नेटवर्क?...विदेशी हथियार, जाली करेंसी व मादक पदार्थों से चलता रहा है काला कारोबार

हथियारों के सौदागरों का आखिर कब टूटेगा नेटवर्क?...विदेशी हथियार, जाली करेंसी व मादक पदार्थों से चलता रहा है काला कारोबार

कैराना। सवारी गठरी उद्योग के जरिये विदेशी हथियार, जाली करेंसी और मादक पदार्थों की तस्करी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना के माथे पर लगा बदनुमा दाग धुल नहीं पाया है। यहां के किंग तस्करों ने युवाओं को इस धंधे में धकेल दिया। 80 के दशक में कैराना से शुरू हुआ हथियार तस्करी के धंधे की जड़ें आज वेस्ट यूपी में सौदागरों ने मजबूत जमा ली है। इस बात से भी नकारा नहीं जा सकता कि कैराना का मूलनिवासी देशद्रोह इकबाल काना और फहमीदा उर्फ हमीदा वर्तमान में पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर अपना नेटवर्क बदस्तूर संचालित कर रहे हैं।

80 के दशक में कैराना पहली बार सुर्खियों में आया। सूत्र बताते हैं कि क्षेत्र के ग्राम तितरवाड़ा निवासी प्रभु मादक पदार्थ डोडापोस्त की तस्करी के आरोप में पकड़ा गया था। तब पुलिस ने छपरौली के एक युवक के साथ-साथ कैराना निवासी अनीस उर्फ मोटा को भी गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद खुलासा हुआ था कि यह सभी आरोपी पाकिस्तान से आने वाले हथियारों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित कई शहरों और राज्यों में सप्लाई किया करते हैं।

इसमें उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। इसी दौरान कैराना निवासी इकबाल काना ने तस्करी के अवैध हथियारों की सप्लाई का जिम्मा लिया। फहमिदा उर्फ हमीदा भी इस स्याह कारोबार की दलदल में फंस गई। फिर सौदागरों ने पाकिस्तान में संपर्क बनाकर वहां से हथियारों की खेप लानी शुरू कर दी।

उस समय कैराना के तस्करों के साथ विशेष टीम ने शामली के बंसल व्यापारी को भी हथियार तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। तभी से कैराना मिनी पाकिस्तान के नाम से भी जाना जाता है। कभी बॉर्डर पर तो कभी ट्रेनों द्वारा लाए जा रहे हथियारों के जखीरे बरामद होने की दर्जनों घटनाएं सामने आती चली गई। कैराना से यह सब नेटवर्क स्थापित किया गया, लेकिन स्थानीय खुफिया इकाई को इसकी कानों-कान तक खबर नहीं हुई। नतीजतन, हथियार सप्लाई का धंधा बदस्तूर जारी है। इसका उदाहरण है हाल में पकड़ा गया कैराना के गांव दभेड़ीखुर्द निवासी आसमोहम्मद। दिल्ली स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े आस ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अब तो खुफिया इकाई और पुलिस के भी कान खड़े हो गए हैं। लेकिन, क्या वेस्ट यूपी में फैले हथियार सौदागरों के मकडज़ाल को तोड़ा जा सकेगा। यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

कुछ तस्कर मरे तो कुछ चला रहे नेटवर्क

हथियार तस्करी के स्याह अध्याय पर नजर डालें, तो कई बड़े तस्करों के नाम सामने आते हैं। इनमें कुछ तस्कर तो ऐसे हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जबकि इकबाल काना जैसे तस्कर नेटवर्क को बेझिझक संचालित कर रहे हैं। भले ही काना पाक के लाहौर में नागरिकता हासिल कर चुका है, लेकिन कैराना के मूलनिवासी होने के नाते वह वेस्ट यूपी की नस-नस से वाकिफ है।

यही कारण है कि जब-तब कभी हथियार तस्करी से जुड़ा मामला सामने आता है, तो इस चर्चित तस्कर का नाम सुनहरे अक्षरों में आता है।

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