डग्गामारी पर कसा शिकंजा, चार वाहन किए सीज...एआरटीओ ने कैराना में चलाया अभियान, एक डग्गामार जीप, प्राइवेट बस, टैंपू व ई-रिक्शा की बंद

डग्गामारी पर कसा शिकंजा, चार वाहन किए सीज...एआरटीओ ने कैराना में चलाया अभियान, एक डग्गामार जीप, प्राइवेट बस, टैंपू व ई-रिक्शा की बंद

कैराना। नगर में सरपट दौड़ रही डग्गामारी के खिलाफ एआरटीओ ने मंगलवार को शिकंजा कस दिया। एआरटीओ ने अभियान चलाकर एक डग्गामार जीप, एक प्राइवेट बस, एक टैंपू तथा एक ई-रिक्शा को पकड़कर कोतवाली में बंद कर दिया और उन्हें सीज कर दिया गया। इस कार्रवाई से दिनभर डग्गामार चालकों में हड़कंप मचा रहा।

मंगलवार को एआरटीओ मुंशीलाल कैराना पहुंचे। जहां उन्होंने कैराना-पानीपत वाया शामली व कांधला रुट पर चलने वाले डग्गामार वाहनों के खिलाफ धरपकड़ अभियान चलाया। इस दौरान एआरटीओ ने पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर मानक से अधिक सवारियां भरकर दौड़ रही एक प्राइवेट बस को पकड़कर बंद कर दिया। कांधला तिराहे से डग्गामार जीप को पकड़कर सीज कर दिया गया। वहीं, कोतवाली के बराबर में खड़े एक थ्रीव्हीलर पर भी चाबुक चला और उसे भी कोतवाली भिजवा दिया गया। इनके अलावा नगर में चल रही एक बगैर रजिस्ट्रेशन की ई-रिक्शा को भी बंद कर दिया गया। एआरटीओ की कार्रवाई से दिनभर डग्गामार चालकों में हड़कंप मचा रहा और वे कार्रवाई से बचने के लिए अपने-अपने खटारा डग्गामार वाहनों को लेकर इधर-उधर छिपते नजर आए। एआरटीओ मुंशीलाल ने बताया कि कैराना में एक ई-रिक्शा के साथ-साथ एक डग्गामार जीप, एक प्राइवेट बस व एक थ्रीव्हीलर को पकड़कर सीज कर दिया गया है। इनके अलावा शामली में दो ई-रिक्शा व दो ओवरलोड ट्रक तथा कांधला में एक ओवरलोड ट्रक पर कार्रवाई की गई।

छोटी मछलियों पर कार्रवाई की इतिश्री

एआरटीओ द्वारा डग्गामारी के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। जब-तब कभी कार्रवाई होती है, तो दो-चार वाहनों को पकड़कर कार्रवाई कर ली जाती है। ऐसा ही मंगलवार को भी उस समय देखने को मिला, जब एआरटीओ ने छोटी मछलियों पर अपना चाबुक चलाते हुए ई-रिक्शा भी बंद कर दी, जबकि नगर में 1०० से अधिक डग्गामार जीप पानीपत-कैराना रुट पर प्रतिदिन फर्राटे भरती है। लेकिन, इन पर प्रभारी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

पहले ही भाग जाते हैं डग्गामार चालक: एआरटीओ

एआरटीओ ने डग्गामार जीपों पर प्रभावी कार्रवाई के सवाल पर कहा कि डग्गामार चालक कार्रवाई से पहले ही भाग जाते हैं। एआरटीओ के इस जवाब से साफ है कि कहीं न कहीं विभाग की मिलीभगत भी इसमें जरूर शामिल हैं, जो कार्रवाई से पहले ही सूचना लीक कर दी जाती है।

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