बिखरी राजनीतिक ताकत को जुटाने के लिए दो दिन के दौरे पर मुजफ्फरनगर में छोटे चौधरी

बिखरी राजनीतिक ताकत को जुटाने के लिए दो दिन के दौरे पर मुजफ्फरनगर में छोटे चौधरी

मुजफ्फरनगर। रालोद ने लोकसभा चुनाव की तैयारी का बिगुल फूंक दिया है। बिखरी राजनीतिक ताकत को जुटाने के लिए छोटे चौधरी ने आज किसानों से सीधा संवाद किया। चौधरी अजित सिंह किसान राजनीति के गढ़ मुजफ्फरनगर में दो दिन के दौरे पर हैं। रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह ने शहर में पार्टी के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया। खतौली में पार्टी नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मोदी उदय के बाद राजनीति में हाशिए पर आई राष्ट्रीय लोकदल के लिए अपने गढ़ में वजूद को बनाए रखना चुनौती बन गया है। चाहे बात संसदीय चुनाव की हो या फिर विधानसभा की, भाजपा की कामयाबी ने रालोद को लगातार झटका दिया है।
किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि में रालोद को खोई ताकत जुटाने की मशक्कत करनी पड़ रही है। चौधरी. अजित सिंह ने कहा कि यहां मैं किसान बिरादरी को जीवित करने आया हूं, जिसमें भी वर्गों व समुदायों के लोगों का समावेश था।आज जाट समाज के लोग ये प्रण कर लें कि उनको रोजाना एक मुसलमान से हाथ मिलाना है, उनके दुख दर्द में पूर्व की भांति शामिल होना हैं, उनके बच्चों की शादियों में जाकर खुशियों को बांटना हैं, इसी प्रकार मुलसमान भी जाटों को अपनाने में झिझके नहीं। सभी को मिलकर दंगा कराने वाली ताकतों को जवाब देना होगा।
पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान मुजफ्फरनगर दंगे की वजह से हुआ। बड़े चौधरी के वक्त से कायम जाट-मुस्लिम समीकरण ध्वस्त हो गया। मोदी फैक्टर में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से भी रालोद का चुनावी गणित पूरी तरह से फेल हो गया। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में छोटे चौधरी और उनके पुत्र जयंत चौधरी तक अपनी सीट नहीं बचा पाए। विधानसभा चुनाव में भी रालोद केवल छपरौली में ही अपना एमएलए जीता पाई।
सियासी संकट से जूझती पार्टी में जान फूंकने की पहल तब की गई, जब शामली के गढ़ीपुख्ता में जयंत चौधरी की मौजूदगी में कैराना के पूर्व सांसद अमीर आलम ने रालोद में वापसी की। आलम के साथ बुढ़ाना से सपा के विधायक रहे उनके बेटे नवाजिश ने भी बसपा छोड़ कर छोटे चौधरी का साथ निभाने का फैसला लिया।
रालोद का मकसद कैसे भी बिखरे जाट और मुस्लिम समीकरण को हासिल करना है। चौधरी अजित सिंह ने दंगे के जख्मों को भूला कर जाटों और मुस्लिमों को एक मंच पर पुन: लाने की रणनीति बनाई है, ताकि भाजपा को लोकसभा में चुनौती दी जा सके।
बड़े चौधरी के फार्मूले के अनुरुप गांव की अति पिछड़ी जातियों, दलितों में रालोद के प्रति भरोसा कायम करना भी उनका लक्ष्य है। छोटे चौधरी ने नए सिरे से रालोद को खड़ा करने के लिए वेस्ट में पार्टी पदाधिकारियों को जिम्मा सौंपा है।

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