कलियुग के श्रवण कुमार निकले कांवड लेकर

कलियुग के श्रवण कुमार निकले कांवड लेकर

मुजफ्फरनगर। सावन के महीने में कांवड यात्रा का अपना ही एक अलग महत्व होता है। सभी कांवडिये अपने मन में भगवान आशुतोष के प्रति श्रद्धा व भक्ति का भाव रखकर हरिद्वार सहित अन्य तीर्थ स्थानों से पवित्रा गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हैं तथा तय समय पर मंदिरों में स्थित अपने आराध्य देव भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक करते हैं। यदि ऐसे समय में कोई कांवडिया गंगाजल के साथ अपने माता-पिता को भी सैर कराये कांवड में, तो वह कलियुग का श्रवण कुमार ही कहलाया जाएगा। ऐसा ही एक नहीं बल्कि कई श्रवण कुमार नगर में नजर आये। जो कि हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने माता-पिता के साथ अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर रहे थे।
श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति की कहानियां आपने सिर्फ सुनी हांेगी या पिफल्मों में देखी होंगी, लेकिन सावन के इस पवित्रा महीने में चलने वाली कांवड़ यात्रा के दौरान एक बार पिफर कलियुग के श्रवण कुमार के साक्षात दर्शन करने का मौका लोगों को मिला है। हाल ही में गौमुख से गंगा जल लेकर चले हरियाणा के पलवल निवासी एक परिवार ने अपने माता-पिता को श्रवण की तरह कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई। इस यात्रा में कई सदस्यों की टीम शामिल थी, उन सभी पुत्रों ने मिलकर अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई।
अदभूत कांवड़ यात्रा को देखने के लिए सड़क पर लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। देखने वाले लोग इन बेटों की जमकर तारीफ कर रहे थे, क्योंकि आज के जमाने में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि बेटे अपने माता-पिता को घर से बेदखल कर देते हैं। अगर ऐसे में कोई बेटा अपने मां-बाप को कांवड़ में बैठकर तीर्थ यात्रा कराये, तो ये वाकई काबिले तारीफ है। बुजुर्ग दम्पत्ति ने बताया कि इस तरह बेटों द्वारा हमंे तीर्थ घुमाने से बहुत खुशी मिल रही है, क्योंकि ऐसा बेटा बहुत ही कम देखने को मिलता है, जो माता-पिता को इस तरह से तीर्थ यात्रा कराये।

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