जिला कृषि योजना को दिया गया मूर्त रूप...65.63 करोड़ की 13वीं पंचवर्षीय योजना 2017-18 से 2021-22 तक की गयी तैयार

मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत वर्ष 2017-18 से 2021-22 तक की पंचवर्षीय कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित कार्यक्रमों को सम्मलित करते हुए जिला कृषि योजना राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद द्वारा बनाई गयी, का प्रस्तुतिकरण निदेशक राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद द्वारा किया गया। प्रस्तुतिकरण के समय जिलाधिकारी द्वारा कृषि की कार्ययोजना में गेहंू के स्थान पर धान की अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियांे का अधिक वितरण कराने हेतु योजना में प्रावधान करने हेतु कहा गया। उद्यान विभाग द्वारा शहद प्रस्संकरण एवं मशरूम उत्पादन के अन्तर्गत ओैर अधिक धनराशि का प्रावधान करने हेतु कहा गया तथा पशुपालन की योजना में गिर नस्ल की गाय क्रय करने पर प्रोत्साहन एवं गिर नस्ल के सांड क्रय करने पर योजना मंे सम्मिलित करने हेतु कहा गया। अरविन्द मलिक प्रगतिशील कृषक बधाई कलां द्वारा सुझाव दिया गया कि गन्न मिलांे मंे एमएचएटी प्लांट लगाये गये हैं, जिनका उपयोग कृषकों द्वारा नहीं किया जाता है, उनके स्थान पर कोयम्बटूर द्वारा तैयार गन्ना सीड ट्रीटमेन्ट डिवाईस को योजना में शामिल किया जाये तथा गन्ना सीड ट्रीटमेन्ट डिवाईस हेतु समूह को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाये। जिलाधिकारी द्वारा कृषि तकनीकि प्रबन्ध अभिकरण (आत्मा) योजना की समीक्षा बैठक की गयी तथा पशुपालन, गन्ना, मत्स्य, उद्यान एवं डेरी विभाग से सम्बन्घित प्रदर्शन आयोजन, कृषक अभिरूचि समूह गठन खाद्य सुरक्षा समूह गठन लक्ष्य के अनुरूप करने, उनका क्षमता विकास समय से कराने हेतु निर्देशित किया गया।

जनपद की कृषि कार्य योजना वर्ष 2017 से 2022 तक जिसको राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद नई दिल्ली द्वारा कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित सभी सहयोगी विभागों के सहयोग से जनपद को तीन एईएस टीम में विभक्त कर ग्रामों में सर्वेक्षण कर प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ग्राम कृषि योजना एवं विकास खण्ड की कृषि योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि ग्राम कृषि योजना एवं विकास खण्ड की कृषि योजना के आधार पर जनपद की कृषि योजना तैयार की गई है। जिला कृषि नियोजन ईकाई की बैठक में कार्ययोजना को अनुमोदित किया गया। जिला कृषि नियोजन ईकाई में जिलाधिकारी उपाध्यक्ष एवं उप कृषि निदेशक सदस्य सचिव है। जिला कृषि नियोजन ईकाई में नजरा सिंह पुत्र तिरका सिंह निवासी ग्राम जडवड विख-जानसठ, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, जिला गन्ना अधिकारी, सहायक निदेशक (मत्स्य), अधिशासी अभियन्ता (सिंचाई), अधिशासी अभियन्ता (नलकूप), सहायक निबन्धक सहकारी समितियां, उप निदेशक मंडी परिषद, जिला प्रबन्धक बीज विकास निगम, जिला प्रबन्धक बीज प्रमाणीकरण संस्था, जिला प्रबन्धक पीसीडीएफ, जिला प्रबन्धक यूपी एग्रो., सहायक अभियन्ता लघु सिंचाई, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी, कृषि रक्षा अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी, सदस्य कृषक अभिरूचि स्वयं सहायता समूह अरविन्द कुमार पुत्र हरपाल सिंह निवासी ग्राम बधाई कलां, विकास खण्ड चरथावल, सदस्य कृषक अभिरूचि स्वयं सहायता समूह विपुल कुमार पुत्रा बाबूराम निवासी विकास खण्ड चरथावल, सदस्य कृषक अभिरूचि स्वयं सहायता समूह प्रदीप कुमार पुत्रा पूरणचन्द निवासी ग्राम कान्हाहेड़ी, विकास खण्ड चरथावल, कृषि विज्ञान केन्द्र वैज्ञानिक, एनजीओ ग्लोबल एग्रीकल्चर रूरल डेवलेपमेन्ट एजूकेशन संस्थान, जिला विकास प्रबन्धक नाबार्ड, अग्रणी बैंक प्रबन्धक, पंजाब नेैशनल बैंक, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी आदि जिला कृषि नियोजन ईकाई के सदस्य बनाये गये हैं। बैठक में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद नई दिल्ली के निदेशक डा. आरपी सिंह द्वारा कार्ययोजना का प्रस्तुतिकरण किया गया। उद्यान विभाग के अन्तर्गत लो टनल पालीनेट से सब्जी की पौध शिमला मिर्च, टमाटर, बन्द गोभी, फूल गोभी, कुकरविट्स के साथ-साथ फूलों की खेती, कृषक उत्पादक समूहों के माध्यम से फल एवं सब्जियों की ग्रेडिंग एवं पैकिंग के साथ-साथ मधुमक्खी पालन पर अनुदान, मधुमक्खी पालन से सम्बन्धित प्रशिक्षण, शहद उत्पादन यूनिट पर अनुदान, मशरूम उत्पादन एवं वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन पर अनुदान का प्रोत्साहन योजना में किया गया है। इसी प्रकार गन्ना विभाग की योजना में ब्रीडर बीज उत्पादन, आधारीय नर्सरी, प्राईमरी नर्सरी, गन्ना प्रदर्शन, कृषि यन्त्रों पर अनुदान, सूक्ष्म तत्वों पर अनुदान, ड्रिप सिंचाई पर अनुदान के साथ-साथ कृषक गोष्ठी, अधिक उत्पादन करने पर कृषक पुरस्कार तथा एक जनपद एक उत्पाद के अन्तर्गत गुणवत्तायुक्त गुड़ उत्पादन के गन्ना क्रेसर पर अनुदान का प्रावधान किया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि पशुपालन विभाग की योजना में ब्रायलर पालन, पशुपालन प्रसार अधिकारी केन्द्र की स्थापना, बीमारी एवं रोगों की जांच हेतु लैबोरेटरी, अधिकारी व कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने हेतु प्रशिक्षण हाल को सुसज्जित करना, पशुओं की दवाई एवं पशुओं की बीमारी की निगरानी, कृषकों को जागरूक करने हेतु प्रचार-प्रसार, बीमारियों की रोकथाम हेतु टीकाकरण के साथ-साथ कृषक समूह गठन, पशु कैम्प एवं प्रदर्शनी को सम्मिलित किया गया। इसके साथ-साथ पशुओं में दुग्ध उत्पादन के लिए मिनरल मिक्सचर वितरण का प्रावधान किया गया है। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, उप निदेशक कृषि, जिला कृषि अधिकारी एवं अन्य सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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