सीबीआई 23 वर्ष बाद भी नहीं दिला सकी उत्तराखण्ड के पीडितों को न्याय

सीबीआई 23 वर्ष बाद भी नहीं दिला सकी उत्तराखण्ड के पीडितों को न्याय

मुजफ्फरनगर। उत्तराखण्ड आन्दोलन के दौरान दो अक्टूबर 1994 को रामपुर तिराहे पर हुई घटना में सीबीआई पीडितों को 23 वर्ष बाद भी न्याय नहीं दिला सकी है। वर्ष 1994 में उत्तराखण्ड आन्दोलन के दौरान निहत्थे लोगों पर फायरिंग व महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार व बलात्कार की घटना के मामलों में 23 वर्ष बीत गये हैं, लेकिन सीबीआई किसी को भी सजा दिलाने में सफल नहीं हुई। अनेक पीडित व आरोपी इंसाफ के इंतजार में दुनिया से चले गये और कई पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन अभी तक भी तारीख पर तारीख ही मिल रही है। मुजफ्फरनगर की दो विशेष अदालतों में चार सीबीआई के मामले लम्बित हैं, इन मामलों में दो मामलों में इस वजह से सुनवाई रूकी हुई हैं, क्योंकि हाईकोर्ट से सुनवाई की स्वीकृति नहीं है। दो मामले अपर जिला जज-2 में लम्बित हैं, लेकिन पीठासीन अध्किारी को हाईकोर्ट से सुनवाई का अध्किार नहीं मिला है, इसके अलावा दो मामले सीबीआई बनाम ब्रजकिशोर आदि व एसपी मिश्र आदि सीजेएम प्रथम जितेन्द्र सिंह की कोर्ट में लम्बित है। बताया गया है कि कोर्ट को हाईकोर्ट से सुनवाई की अध्किार की सूचना देर से आती है, जब तक पीठासीन अध्किारी का तबादला हो जाता है। इस तरह सुनवाई में 23 वर्ष गुजर गये। गौरतलब है कि कल रामपुर तिराहाकाण्ड की बरसी है। 2 अक्टूबर 1994 को यह घटना घटित हुई थी। इस दौरान हुई फायरिंग में 7 उत्तराखण्डी शहीद हुए थे, जबकि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार व बलात्कार की शर्मसार करने वाली घटनाएं हुई थी।

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