भाजपा नेताओं पर दर्ज मुकदमें नहीं होंगे वापस...मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 में हुए दंगों से जुडे मामले वापस लेने का जिला प्रशासन ने किया विरोध

भाजपा नेताओं पर दर्ज मुकदमें नहीं होंगे वापस...मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 में हुए दंगों से जुडे मामले वापस लेने का जिला प्रशासन ने किया विरोध

मुजफ्फरनगर। बहुचर्चित कवाल कांड को लेकर हुए साम्प्रदायिक तनाव के बाद सात सितम्बर 2013 को नंगला मंदौड में हुई बहू-बेटी बचाओ महापंचायत के पश्चात मुजफ्फरनगर व शामली जनपद में हुए साम्प्रदायिक दंगों में आरोपी भाजपा नेताओं के विरूद्ध दर्ज मुकदमे वापस नहीं हो सकेंगे। जिला प्रशासन ने दंगों के 500 से ज्यादा मामलों में से 133 मामले वापस लेने के बारे में राज्य सरकार को अपनी राय देते हुए स्पष्ट इंकार किया है कि प्रशासनिक कार्यों से मुकदमे वापस नहीं हो सकेंगे। राज्य सरकार ने जिला प्रशासन से मामले वापस लेने पर राय मांगी थी। सांसद डॉ. संजीव बालियान व कुंवर भारतेन्दु सिंह के अलावा प्रदेश सरकार में मंत्राी सुरेश राणा, विधायक उमेश मलिक, संगीत सोम व साध्वी प्राची समेत 14 नेताओं से मुकदमे वापस लेने की तैयारी की जा रही थी। इसके अलावा कुल मिलाकर 133 मामलों में मुकदमे वापसी के प्रयास प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे थे। भाजपा नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का मामला काफी दिनों से चर्चाओं में है और भाजपा इसे 2019 में मुद्दा बनाने के मूड में थी, लेकिन अब जिला प्रशासन की मुकदमे वापसी को लेकर ना-नुकूर होने से भाजपा के मिशन को झटका लगने की सम्भावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने जिला प्रशासन से दंगों के 500 से ज्यादा मामलों में से 133 मामलों को वापस लेने पर राय मांगी थी। पिछले सप्ताह अलग-अलग भेजे गये जवाबों में डीएम राजीव शर्मा, एसएसपी अनन्तदेव तिवारी व अभियोजन अधिकारी ने कहा है कि वह मुकदमे वापस लेने के पक्ष में नहीं है। इसके पीछे उन्होंने प्रशासनिक कारण को वजह बताई है। इस संबंध में डीएम राजीव शर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने अपने-अपने जवाब भेज दिये है। 133 मुकदमों में से 89 अभी भी अदालतों के समक्ष विचाराधीन है, बाकि मामलों में या तो आरोपी बरी हो गये या पिफर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हुई है। लम्बित मुकदमों में भडकाउ भाषण, हत्या, हत्या के प्रयास, आगजनी, डकैती के मामले हैं। इन आरोपियों में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सांसद डॉ. संजीव बालियान, प्रदेश सरकार में गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा, सरधना से भाजपा विधायक संगीत सोम, बुढाना से विधायक उमेश मलिक, विहिप नेत्री साध्वी प्राची के नाम दर्ज है। सूत्रों से पता चला है कि विगत 12 जनवरी 2018 को राज्य के विधि विभाग में जिलाधिकारी को पत्र भेजा था। विधि विभाग के सचिव राजेश सिंह द्वारा भेजे गये पत्र में 13 बिन्दुओं के आधार पर डीएम से मुकदमों की जानकारी वर्तमान स्थिति के साथ मांगी गयी थी। 13 में से एक बिन्दु यह भी था कि मुकदमे वापस लेने के संबंध में जनहित में आपकी राय कारण सहित बताई जाये, जिसमें सांसद संजीव बालियान, सांसद कुंवर भारतेन्दु सिंह, विधायक उमेश मलिक, मंत्री सुरेश राणा, विधायक संगीत सोम, साध्वी प्राची के खिलाफ द्वेषपूर्ण भाषण देने के दो मुकदमों की जानकारी मांगी गई थी। ये मामले हिंसा भडकने से पहले 31 अगस्त 2013 और 7 सितम्बर 2013 को हुई महापंचायतों से जुडे हैं। इसी प्रकार 23 फरवरी को भेजे गये दूसरे पत्र में विधि विभाग ने दंगों से जुडे 131 मामलों की जानकारी मांगी। सरकार ने आठ पन्नों में एफआईआर डिटेल्स, जिलों और थानों के नाम, जहां मुकदमे दर्ज थे और आईपीसी की धाराएं भेजी थी। डीएम-एसएसपी और अभियोजन अधिकारी से इन मामलों को वापस लिये जाने पर अलग-अलग राय मांगी थी। जिलाधिकारी राजीव शर्मा का इस संबंध में कहना है कि यह लम्बी प्रक्रिया है और इसे पूरा होने में समय लगेगा। पहला मुकदमा 31 अगस्त 2013 की महापंचायत से जुडा हुआ है, जिसमें 14 आरोपी है। सांसद डॉ. संजीव बालियान, सांसद कुंवर भारतेन्दु सिंह, मंत्राी सुरेश राणा, विधायक उमेश मलिक व साध्वी प्राची मुख्य आरोपी है। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आईपीसी की धाराओं में हथियारों सहित अवैध सभा आयोजित करने, सरकारी ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी को डराने-धमकाने और कानून व्यवस्था को बिगाडने के आरोप शामिल है। एफआईआर में आईपीसी की धारा 153ए के तहत मामला दर्ज नहीं हुआ है। यह धारा दो समुदायों के बीच साम्प्रदायिक, जातीय, जन्मस्थान, निवास, भाषा के आधार पर झगडा पफैलाने पर दर्ज होती है। चार्जशीट में यह आरोप तो हैं, लेकिन धारा नहीं लगाई गई है। विधायक उमेश मलिक का कहना है कि स्थानीय न्यायालय में आरोप तय करने के लिये शीघ्र ही सुनवाई होने वाली है। इसके अलावा दूसरा मुकदमा सात सितम्बर 2013 को बुलाई गई दूसरी महापंचायत के बाद दर्ज किया गया था। इस मुकदमे में 13 लोगों साध्वी प्राची, सुरेश राणा, उमेश मलिक और संगीत सोम आदि को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में हमले, बलवा, सरकारी कर्मचारी को धमकाने और दुर्व्यवहार की धारा 153ए के तहत आईपीसी की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए साम्प्रदायिक दंगों के मामले में 131 मुकदमे वापस लेने के प्रदेश सरकार के कथित प्रयास के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट में शामली निवासी इमरान अहमद ने एक याचिका दायर की थी। सितम्बर 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में दंगों के बाद कुल 503 मुकदमे दर्ज किये गये थे, इन दंगों में 62 लोग मारे गये थे, जबकि सैंकडों घायल हुए थे। साम्पद्रायिक दंगों के दौरान हजारों लोग बेघर हो गये थे, जिन्हें शिविरों में रहना पडा था। तत्कालीन राज्य सरकार ने इन मामलों की जांच के लिये एसआईटी बनाई थी, जिसमें मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।

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