आधी आबादी का आरक्षित प्रतिशत बढ़ा, दो वार्ड की वृद्धि... 18 सितंबर तक आरक्षण संबंधी प्रस्ताव स्थानीय निकाय निदेशालय को उपलब्ध कराना जरूरी

आधी आबादी का आरक्षित प्रतिशत बढ़ा, दो वार्ड की वृद्धि... 18 सितंबर तक आरक्षण संबंधी प्रस्ताव स्थानीय निकाय निदेशालय को उपलब्ध कराना जरूरी

मुजफ्फरनगर। नगरीय निकाय चुनाव के मद्देनजर इस बार भी निकायों के वार्डों का आरक्षण चक्रानुक्रम होगा। संबंधित नियमावली के तहत पार्षद-सदस्यों का आरक्षण चक्रानुक्रम करने के संबंध में पूर्व के आदेश का हवाला देते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास की ओर से एक शासनादेश जारी किया गया है। जिलाधिकारियों को 18 सितंबर तक आरक्षण संबंधी प्रस्ताव स्थानीय निकाय निदेशालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके चलते नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनरगर की ओर से रैपिड सर्वें से संबंधित सभी डाटा प्रशासन को उपलब्ध करा दिया गया। पालिका में इस बार आधा आबादी की संख्या पांच वार्ड की वृद्धि होने के चलते दो अधिक होगी।
पालिका सूत्रों के अनुसार होने वाले नगर निकायों के चुनावांे को लेकर शासन स्तर से तैयारियों को अंजाम दिया जा रहा है। इसके चलते इस बार मुजफ्फरनगर पालिका में परिसीमन के चलते वार्डों की संख्या 45 से बढ़ाकर पचास कर दी गयी। इसके साथ ही आरक्षित वार्डों की संख्या में भी वृद्धि की गयी है, जिसमें आधी आबादी के दो वार्ड बढ़े हैं। पहले पालिका में 45 वार्ड होने के चलते आरक्षित वार्ड थे 25 तथा अनारक्षित थे 20, जिसमें अनुसूचित जाति में पुरूष दो, महिला एक, पिछड़ी जाति के पुरूष आठ, महिला चार, सामान्य जाति की महिला के लिए 10 थे। इसके विपरीत इस बार वार्डों की संख्या 50 होने के चलते आरक्षित वार्ड हैं 27 जिसमें अनुसूचित जाति में पुरूष दोे, महिला दो, पिछड़ी जाति के पुरूष आठ, महिला पांच, सामान्य जाति की महिला के लिए 10 वार्ड शामिल हैं। कुल मिला कर इस बार आरक्षित वार्ड हांेगे 27, इसमें दस पुरूष तथा 17 महिलाएं तथा 23 अनारक्षित होंगे। पिछले कार्यकाल में कुल 16 की संख्या में आधी आबादी का प्रतिनिधित्व रहा था, जिसमें 15 आरक्षित कोटे से तथा एक नामित थी। आरक्षण संबंधी रैपिड सर्वे को लेकर पालिका के एक कर्मचारी न नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ओबीसी को लेकर किये गये रैपिड सर्वे की रिपोर्ट चार सितंबर को ही प्रशासन को उपलब्ध करा दी गयी थी।
सूबे के 653 नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों) के 12 हजार अधिक वार्डों का आरक्षण करने के लिए पहले-पहल उत्तर प्रदेश नगर निगम व नगर पालिका (स्थानों और पदों का आरक्षण व आवंटन) नियमावली-1994 बनाकर व्यवस्था लागू की गयी थी। नियमावली में खामियों पर कोर्ट द्वारा सवाल उठाए जाने के उपरांत वर्ष 2011 में छठवां संशोधन कर वार्डाें का आरक्षण, महापौर-अध्यक्ष की तरह चक्रानुक्रम करने का निर्णय किया गया था। इस संबंध मंे 25 अप्रैल को तत्कालीन प्रमुख सचिव नगर विकास की ओर से सभी जिलाधिकारियों को आरक्षण नियामवली संबंधी दोनों अधिसूचनाओं की प्रति भेजते हुए कहा गया था कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर वार्डों का परिसीमन किया गया है। इसलिए किसी वार्ड के पूरी तरह से नया होने या वार्ड की जनसंख्या के 50 पफीसदी से अधिक जनसंख्या के नए क्षेत्रा में शामिल होे पर उसे नया वार्ड मानकर आरक्षण किया जाएगा। प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने 25 अप्रैल को जारी शासनादेश के तहत वार्डों के आरक्षण का प्रस्ताव तैयार कर 18 सितंबर तक विशेष वाहक के जरिये हार्ड व सॉफ्रट कापी में स्थानीय निकास निदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों में पिछड़े वर्गों के व्यक्तियों की संख्या पता लगाने के लिए रैपिड सर्वे का काम शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा होगा वार्डों का आरक्षणः पूर्व में नियमावली के साथ जारी आदेश के मुताबिक वार्डों का आरक्षण किये जाने पर वार्डों के मौजूदा आरक्षण में व्यापक बदलाव होना तय है। वार्डों के आरक्षण के लिए पहले-पहल अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ी जाति के लिए वार्डों की संख्या तय की जाएगी। निकायों में अनुसूचित जाति के लिए उतने ही वार्ड आरक्षित किये जाएंगे, जितने प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति ;अधिकतम 21 प्रतिशतद्ध की संबंधित निकाय में होगी। निकाय के वहीं वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किये जाएंगे, जिनमें अनुसूचित जाति की आबादी सर्वाधिक (अवरोही क्रम में रखने पर) होगी। चूंकि इनमें से 33 प्रतिशत पर (एक तिहाई) अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित होना आवश्यक है। इसलिए अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कुल पदों मंे से सर्वाधिक आबादी वाले 33 प्रतिशत वार्ड ही अनुसूचित जाति की महिलाओं को पहले आवंटित किये जाएंगे। अनुसूचित जाति के लिए वार्डों के आरक्षित होने के बाद शेष वार्डों को पिफर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किये जाएंगे। अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए वार्ड आरक्षित होने के बाद शेष वार्डों को पिछड़ी जाति की आबादी के घटते क्रम (अवरोही क्रम) मंे रखा जाएगा।

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