ढोल-नरसिंगे की ताल पर कलेक्ट्रेट में गरजी भाकियू...अपनी मांग संबंधी सिटी मजिस्ट्रेट को दिया ज्ञापन, 15 को तहसील सदर में किया धरने का ऐलान

ढोल-नरसिंगे की ताल पर कलेक्ट्रेट में गरजी भाकियू...अपनी मांग संबंधी सिटी मजिस्ट्रेट को दिया ज्ञापन, 15 को तहसील सदर में किया धरने का ऐलान

मुजफ्फरनगर। मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन के द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान जमकर ढोल व नरसिंगा बजा। भाकियू कार्यकर्ताओं के द्वारा पूरे कचहरी परिसर में जुलूस भी निकाला गया। इस दौरान भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता सहित अनेक छोटे-बड़े सभी कार्यकर्ताओं के द्वारा धरने को संबोधित किया गया। साथ ही मांगें शीघ्र न माने जाने पर कई विभागों के अधिकारियों के इलाज सहित अनिश्चितकालीन चक्का जाम तक की चेतावनी दी गयी। दोपहर बाद अपनी मांग संबंधी मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को दिया गया।
प्रदेश में निजी नलकूप व ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू बिजली के दामों मे की गयी वृद्धि को वापिस लेने के संबंध में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर ढोल-नरसिंगा की ताल पर गरजे। इसके बाद उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम अपनी मांग संबंधी एक ज्ञापन दिया। दिये गये ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में बिजली के दामों में अचानक ही 50 से लेकर 150 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी गयी। जिससे किसान व मजदूर की कमर टूट जाएगी। किसी भी वस्तु का रेट थोक मूल्य सूचकांक या महंगाई दर के आधार पर तय किया जाता है। किसानों की फसलों के मूल्य में महंगाई दर से भी कम वृद्धि की जाती है। जिसका उदाहरण हाल ही में गन्ना, धान व गेहूं में की गयी वृद्धि है। बिजली की दरों में 50 प्रतिशत वृद्धि से किसानों की लागत में भारी वृद्धि होगी। देश के अन्य राज्यों में किसानों को उत्तर प्रदेश से सस्ती व कुछ राज्यों में राज्य सरकार बिना बिल की बिजली उपलब्ध कराती है। जिससे किसानों पर अधिक भार ना पड़े। प्रदेश सरकार के इस फैसले से किसानों को भारी नुकसान उठाना होगा। किसानों पर कर्ज का भार बढ़ेगा।
भाकियू ने प्रदेश व्यापी धरना-प्रदर्शन के माध्यम से कुछ मांगें की हैं, जिसमें बिजली विभाग द्वारा घोषित दरों को वापिस लिया जाए, विद्युत दरों के पुनर्निधारण हेतु हर वर्ग के विद्युत उपभोक्ता से वार्ता की जाए। एनजीटी के पुराने वाहनों पर आदेश से ट्रैक्टर को मुक्त किया जाए। सभी तरह के वाहनों की समय सीमा 15 साल की जाए। भारतीय जनता पार्टी के घोषण पत्र के अनुसार किसानों की फसल लागत मूल्य में 50 प्रतिशत जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का फार्मूला तुरंत लागू किया जाए। फसलों के समर्थन मूल्य से नीचे की खरीद को अपराध माना जाए। सभी मुख्य फसलों, फलों, सब्जी व दूध को न्यूनतम समर्थन मूल्य के अधीन लाया जाए।
किसानों को आवारा पशुओं से निजात दिलायी जाए। प्रदेश में आलू, गन्ना, धान के किसान को बोनस दिया जाए। आंदोलन के दौरान किसानों पर सभी दर्ज मुकदमें वापस लिये जाएं। जनपद कुशीनगर, फैजाबाद, कानपुर व ललितपुर में किसानों पर लगाये गये झूठे मामले समाप्त किये जाए। जेल में बंद किसानों को रिहा किया जाए।
वहीं दूसरी ओर ज्ञापन देने से पूर्व धरने को संबोधित करते हुए भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि वर्तमान में हालात बेहद ही खराब हैं। उन्होंने किसानों के पुराने वाहनों को बंद करने को लेकर कड़े शब्दों में कहा कि यदि किसी भी किसान का वाहन चाहे वो कितना भी पुराना हो, यदि उसका चालान या उसे सीज किया गया, तो उसका जुर्माना संबंधित अधिकारी ही भरेगा। यदि नहीं माना, तो उसका इलाज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज का धरना तो मात्र एक ट्रेलर है, साथ ही उन्होंने तहसील सदर में 15 दिसंबर को होने वाले धरना-प्रदर्शन की तैयारी करने को भी कहा। साथ ही कहा कि यदि इसके बाद भी उनकी मांगें नहीं मानी गयीं, तो उसके बाद अनिश्चितकालीन चक्का जाम कर सरकार से सीधे टक्कर ली जाएगी। साथ ही उन्होंने जिला गन्ना अधिकारी व जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का भी अपने निशाने पर लिया। धरने की अध्यक्षता मुस्तफा बागोवाली ने की तथा संचालन नीरज पहलवान ने किया। धरने का नेतृत्व जिलाध्यक्ष राजू अहलावत के द्वारा किया गया। इस मौके पर राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, गौरव टिकैत, राजू अहलावत, नवीन राठी, ओमपाल मलिक, धीरज लाटियान, सर्वेंद्र राठी, योगेश शर्मा, कपिल सोम, प्रवेंद्र ढाका, बिजेंद्र बालियान, विकास शर्मा, अहसान अली, ओमप्रकाश, चौधरी ईश्वर सिंह, ठा. सत्येंद्र चौहान, विपिन मेहंदीयान, विनय भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।

Share it
Top