मुज़फ्फरनगर: 13 बीघा भूमि का वारिस झोपडी में रहने को मजबूर ...35 वर्षों से खुद को अपने पिता की औलाद साबित करने की लड रहा है लडाई

मुज़फ्फरनगर:  13 बीघा भूमि का वारिस झोपडी में रहने को मजबूर ...35 वर्षों से खुद को अपने पिता की औलाद साबित करने की लड रहा है लडाई

मोरना। 35 वर्षों से खुद को पिता की औलाद साबित करने के लिए प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहा व्यक्ति को बूढा हो जाने पर भी न्याय की आस है। 17 बीघा जमीन का वारिस होने के बावजूद झोपडी में रहने को मजबूर वृद्ध ने मानवाधिकार से न्याय की गुहार लगाई है। थाना ककरौली क्षेत्र के ग्राम जटवाडा निवासी जिकरिया उर्फ कासिम पुत्र जमीर ने बताया कि उसके दादा के तीन पुत्र थे। जमीर, सईद व तैयब अपने पिता जमीर की वह इकलौती संतान था। उसके जन्म के कुछ दिन बाद उसके पिता व माता कुलसुम में विवाद हो गया तो माता कुलसुम ने थाना क्षेत्र के ग्राम दौलतपुर में शादी कर ली। जब जिकरिया की उम्र तीन वर्ष थी तभी उसके पिता जमीर का देहान्त हो गया। जिकरिया का लालन पालन उसके दादा मजहर ने किया। दादा के नाम 39 बीघा जमीन थी जो तीन भागों में बांटी जानी थी, किन्तु जिकरिया के चाचा सईद व तैयब ने कुल सम्पत्ति को दो भागों में आपस में बांट लिया। जायदाद में हिस्सा न मिलने पर जिकरिया ने 1984 में न्यायालय में वाद दायर किया। जिसकी जांच आरम्भ हो गयी। जिकरिया को अदालत में अपने पिता जमीर का पुत्र साबित करना था, जिसके लिए जिकरिया ने गांव जटवाडा की मतदाता सूची, राशनकार्ड, तहसील से जारी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किये, किन्तु अदालत ने इन प्रमाण पत्रों की छायाप्रति को मान्यता न देते हुए उसकी माता कुलसुम को अदालत में तलब किया। 1995 में कुलसुम अदालत के समक्ष पेश हुई, जहां प्रतिवादी पक्ष के वकील के सवालों से घिरी कुलसुम सही उत्तर नहीं दे पाई। जहां अदालत ने अपने निर्णय में बताया कि प्रतीत होता है कि जिकरिया कुलसुम के पति अशरफ का पुत्र है। 1997 में जिकरिया ने तत्कालीन जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। उपजिलाधिकारी को जांच सौंपी गयी। परन्तु यह न पता लगा सके कि जिकरिया का पिता जमीर है या अशरफ। इस दौरान थाना ककरौली पुलिस जिकरिया को जमीर का पुत्र लिखती रही। जिकरिया ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया, जहां तत्कालीन एसएसपी द्वारा उस समय के सीओ जानसठ को जांच सौंपी, जिसकी जांच रिपोर्ट में मामला सामने आया कि जटवाडा निवासी मजहर के तीन पुत्र थे, जिनमें जमीर की शादी पिता मजहर ने कुलसुम के साथ कराई थी। शादी के दो वर्ष बाद कुलसुम ने पुत्र जिकरिया को जन्म दिया। पति पत्नी के बीच विवाद के कारण कुलसुम ने ग्राम दौलतपुर निवासी अशरफ से शादी कर ली। जमीर की मृत्यु के बाद जिकरिया का पालन पोषण दादा मजहर ने किया, जहां गौरतलब है कि मजहर के नाम 39 बीघा जमीन थी, जिसमें जिकरिया 13 बीघा भूमि का वारिस है। किन्तु गांव के सैकडों व्यक्तियों के हस्ताक्षर व अनेक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के बाद भी जिकरिया अपने पिता की औलाद खुद साबित करने की लडाई लड रहा है। मस्जिद में मोअज्जन का कार्य करने वाले जिकरिया के 9 बच्चे हैं तथा जिकरिया झोंपडी डालकर गांव में रहता है। जिकरिया को आज भी मानवाधिकार आयोग से न्याय की आशा है तथा 13 बीघे भूमि मिल जाने की उम्मीद है।

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