जिला चिकित्यालय का डायलेसिस सेंटर बन गया वरदान ... सवा साल में 10 हजार से अधिक उठा चुके हैं लाभ, तीन शिफ्टों में मरीजों को दी जाती हैं सेवाएं

जिला चिकित्यालय का डायलेसिस सेंटर बन गया वरदान ... सवा साल में 10 हजार से अधिक उठा चुके हैं लाभ, तीन शिफ्टों में मरीजों को दी जाती हैं सेवाएं

मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में बना डायलेसिस सेंटर किडनी के रोगियों के लिए एक प्रकार से वरदान बन गया है। सवा साल की अवधि में अब तक लगभग दस हजार से अधिक मरीज इस सेंटर से लाभांवित हो चुके हैं। यह पर मरीजों का इलाज नि:शुल्क किया जाता है। प्रात: सात बजे से लेकर रात्रि नौ बजे तक तीन शिफ्टों में मरीजों को सेवा दी जाती है। किडनी के मरीजों को पहले अपनी डायलेसिस कराने के लिए मेरठ या दिल्ली तक दौड़ लगानी पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। किडनी के मरीजों को डायलेसिस की सुविधा जिला चिकित्सालय में बने डायलेसिस सेंटर पर दी जाने लगी है। इस सेंटर को लेकर विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए सेंटर के मैनेजर नदीम चौधरी ने बताया कि इसका शुभारंभ 15 मई 2018 को किया गया था। यहां पर किडनी के मरीजों को डायलेसिस की हर प्रकार सुविधा बिल्कुल नि:शुल्क दी जाती है। बाहर इसके लिए औसतन मरीजों को दो से लेकर चार हजार तक चुकाने पड़ते हैं। अब तक सवा साल की अवधि में 10353 मरीज यहां पर अपना इलाज करा चुके हैं। प्रात: सात बजे से लेकर शाम के छह बजे तक डायलेसिस के लिए संपर्क किया जा सकता है। यहां पर डायलेसिस की सुविधा तीन शिफ्रटों में दी जाती है। पहली प्रात: सात से 11 बजे तक, दूसरी दोपहर बारह बजे से लेकर चार बजे तक तथा तीसरी पांच बजे से लेकर रात्रि नौ बजे तक। यहां पर बिजली चले के बाद भी मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जेनरेटर की व्यवस्था की गयी है। इसके साथ ही यहां पर एमबीबीएस डाक्टर की देखरेख में मरीजों का इलाज किया जाता है। यदि किसी मरीज को किसी प्रकार की असुविधा हो, तो वह उनसे अपनी बात रख सकता है। सेंटर पर 14 सदस्यीय स्टाफ सेवारत है। इसमें एक चिकित्सक डा. विजेंद्र वर्मा, एक मैनेजर नदीम चौधरी, डायलेसिस टैक्नीशियन आठ व चार हाउस कीपर हैं। दस बैड हैं, इसमें आठ का निगेटिव वार्ड है तथा दो का हैपेटाईटिस सी (काला पीलिया) वार्ड है।

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