किसानों की समस्याओं पर जमकर गरजे रालोद कार्यकर्ता

मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय लोकदल ने किसानों की विभिन्न समस्याओं जिसमें गन्ना भुगतान, बढ़ी विद्युत दरें, बिगड़ी कानून व्यवस्था और एक उद्यमी के खिलाफ जांच की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में धरना दिया। रालोद नेताओं ने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं के प्रति कोई भी गम्भीरता नहीं दिखाई जा रही है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है, उनका शुगर मिलों पर करोड़ों रुपया बकाया है। किसान परेशान हैं। बुधवार को राष्ट्रीय लोकदल के जिला प्रभारी सुरेश मलिक के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठ गये। भीषण गर्मी व तपिश के कारण कार्यकर्ताओं के लिए धरना स्थल पर पानी और हवा का भरपूर प्रबंध किया गया था। धरने पर पहली बार रालोद के पूर्व प्रत्याशी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पदाधिकारी पायल माहेश्वरी अपनी सास सुमन माहेश्वरी और सैंकड़ों समर्थकों के साथ उपस्थित रही। पायल माहेश्वरी ने कहा कि आज किसानों को उनकी उपज का मूल्य लागत के अनुसार नहीं मिल पा रहा है और शुगर मिलों के द्वारा किसानों को उत्पीड़न चरम पर है। किसान आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों का कर्ज मापफ करने के मामले में किसानों से मजाक किया है। रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी ने कहा कि जनपद में सिंचाई विभाग की धींगामुश्ती चल रही है। कहीं पर भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने जिलाधिकारी से राजवाहों में टेल तक पानी पहुंचाये जाने की व्यवस्था की मांग की है। इसके साथ ही किसानों का बकाया गन्ना भुगतान दिलाने और अन्य समस्याओं को भी उठाया। रालोद के इस धरने पर दलित महिला की भूमि गं्राड प्लाजा मॉल की भेट चढ़ाने के आरोप लगाते हुए रालोद नेताओं ने उद्यमी आलोक स्वरूप की जांच कराने की मांग की है। धरने के उपरांत राज्यपाल के नाम सम्बोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी वि/रा. सियाराम मौर्य को दिया गया। ज्ञापन में कहा गया कि देश के किसानों का लगभग रुपए 22000 करोड़ गन्ना मूल्य भुगतान के लिए आज भी बकाया है। जिसमें आध्े से भी अध्कि उत्तर प्रदेश के किसानों का है। प्रदेश के गन्ना किसानांे के गन्ना मूल्य का भी लगभग रूपए 12000 करोड़ आज भी चीनी मिलों पर बकाया है। केन्द्र सरकार द्वारा घोषित रुपए 7000 करोड़ के पैकेज में से भी किसानों के गन्ना मूल्य बकाया हेतु उपलबब्ध् धनराशि पर सरकार मौन है। यानि किसान के नाम पर आवंटित यह ध्नराशि भी पूर्व की तरह अधिकारियों और मिल मालिकों के बीच बंदरबांट की शिकार हो सकती है। प्रदेश सरकार द्वारा निजी हाथों को बेची गई सहकारी व सरकारी क्षेत्र की चीनी मिलों के कई वर्षों बाद भी शुरू ना होने से किसान को अपना गन्ना निजी कोल्हुओं पर सस्ते दामों मंे बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। ज्ञापन में गन्ना किसानों का बकाया मूल्य भुगतान तुरंत सरकार अपनी गारंटी पर कराने, गन्ना मूल्य बकाया पर ब्याज की धनराशि का भुगतान अविलंब कराने, निजी हाथों मंे बेची गई गन्ना मिलों को सरकार तुरंत अपने कब्जे मंे कर चालू कराने, प्रदेश सरकार द्वारा विगत वर्ष घोषित परिवहन भाड़ा अनुदान की धनराशि को अविलंब किसानों में वितरीत किया जाए तथा अब तक वितरित धनराशि मंे हुए गोलमाल की सक्षम एजेंसी द्वारा जांच करने की मांग की गई।
जब एडीएम-एफ धरनास्थल पर ज्ञापन लेने आये, तो रालोद कार्याकर्ता बिगड़ गये कि धरनास्थल पर न तो जिला गन्नाधिकारी आये, न ही विद्युत विभाग से कोई तथा न ही सिंचाई विभाग से कोई आया। वह अपने साथ एडीएम-एफ को बैठाने पर भी जो देने लगे। आखिरकार एडीएम-एफ को मजबूरन वहां पर रालोद कार्यकर्ताओं के बीच बैठना ही पड़ा। धरने की अध्यक्षता अजीत राठी व संचालन सुधीर भारतीय ने किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सुरेश मलिक, अजीत राठी, पायल माहेश्वरी, संजय राठी, हर्ष राठी, अभिषेक चौधरी, सुमन माहेश्वरी, राजपाल सिंह, विकास बालियान, पंकज राठी, जितेंद्र आर्य, विमार्ग सिंह, संजय शर्मा, रमेशचंद, उदयवीर, रविंद्र पंवार, विकास कादियान, मांेटी कादियान, सुधीर भारतीय, प्रवीण कुमार पीटर, वैभव मित्तल, कंवरपाल फौजी, दीन मौहम्मद, डा. राजीव बालियान आदि सैंकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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