राशन डीलर की हठधर्मी से कार्डधारक परेशान

राशन डीलर की हठधर्मी से कार्डधारक परेशान

जानसठ। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सरकार के लाखों प्रयास के बावजूद भी पारदर्शिता आने का नाम नहीं ले रही है। अब राशन डीलरों ने मिलीभगत कर नया फार्मूला लागू कर दिया है कि 10 या इससे ज्यादा यूनिट वाले राशनकार्डों को शासन स्तर से निरस्त कर दिया गया है, जब कार्ड धारक राशन लेने दुकान पर पहुंचते हैं, तो उनको खाली हाथ लौटना पड़ रहा है न जाने पर शासन शासन क्यों-क्यों मन बना हुआ है। राशन डीलरों की कारगुजारी किसी से छुपी नहीं है। हर माह पर्यवेक्षण अधिकारी की उपस्थिति भी हवा हवाई साबित हो रही है। राशन डीलरों की मिलीभगत के कारण कोई भी पर्यवेक्षण अधिकारी उचित दर विक्रेता की दुकान पर उपलब्ध नहीं रहता। राशन की कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। राशन डीलर बड़ी आसानी से राशन को डकारकर ब्लैक में बेच रहे हैं। शासन द्वारा घोषणा है कि राशन सभी को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाए, परंतु राशन डीलर अपनी मनमानी के चलते कार्डधारकों को राशन न देकर बाजार में खुलेआम बिक्री कर रहे हैं। शासन भले ही कार्ड धारकों को खाद्यान्न पहुंचाने के आदेश कर कर रहा है, परंतु राशन डीलरों के लिए शासन का कोई आदेश मायने नहीं रखता। कार्डधारक राशन डीलर से राशन न देने की बात करता है, तो उसको जवाब मिलता है कि कार्ड निरस्त कर दिया गया।

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