हादसे की प्रतीक्षा कर रहे नगरवासी...गांधी कालोनी पचैंडा बस स्टैंड की अधूरी पुलिया भी बन रही हादसों की सबब

हादसे की प्रतीक्षा कर रहे नगरवासी...गांधी कालोनी पचैंडा बस   स्टैंड की अधूरी पुलिया भी बन रही हादसों की सबब

मुजफ्फरनगर। नगर के दो प्रमुख स्थानों पर बनी दो पुलिया आये दिन हादसों को दावत दे रहीं हैं, लेकिन इस ओर न तो किसी नगरवासी ने ध्यान दिया न ही किसी उच्चाधिकारी के द्वारा ही दिया गया। दोनों ही स्थानों से प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आवागमन होता रहता है। दोनों ही स्थानों को देखकर लगता है कि सभी किसी बड़े हादसे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जिसके बाद वह आवाज को उठाएंगे। दोनों ही स्थानों की स्थिति ऐसी है कि यदि इनमें कोई गिर गया, तो उसका बच पाना नामुमकिन ही है।
हादसों को दावत दे रहे स्थानों में सबसे पहले बात की जाए सरवट फाटक पर टूटी पड़ी पुलिया की। यह पुलिया रेलवे फाटक से मात्रा 12 मीटर ही दूर होगी। यह एक दो दिन या सप्ताह से नहीं, बल्कि कई महीनों से टूटी पड़ी है। वर्तमान समय में इस पफाटक पर यातायात का आवागमन पहले की मुकाबले कई गुणा बढ़ गया है। जब फाटक खुलता है, तो 10 से लेकर 20 मिनट तक रास्ता साफ ही नहीं हो पाता, जिसके चलते आये दिन ट्रेन को भी रूक कर निकलना पड़ता है। फाटक खुलने के बाद यातायात इतना तेज होता है कि हर समय इस टूटी पुलिया में किसी के गिरने का खतरा बना रहता है। जब दिन में ही इसके टूटे होने का पता नहीं चल पाता, तो रात में तो अधिक खतरा बना रहता है। त्रासदी देखिए आज तक इस टूटी पुलिया को लेकर किसी नागरिक के द्वारा आवाज नहीं उठायी गयी, न ही किसी संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के द्वारा इस ओर अपना ध्यान केंद्रित किया गया। यह पुलिया थोड़ी बहुत नहीं, बल्कि लगभग साढ़े चार फुट तक टूटी पड़ी है। यदि इसमें कोई भी वाहन चालक गिर गया, तो उसका बच पाना मुश्किल है। अब बात की जाए गांधी कालोनी स्थित रॉयल बुलेटिन समाचार पत्र के सामने पचैंडा बस स्टैंड के पास बनी पुलिया की। इसे पूरी तरह से नहीं बनाया गया। इसे लगभग चार फुट कम बनाया गया है। जिसके चलते ओवरब्रिज से जो भी वाहन आता है, उसकी गति अधिक होती है। जिसके चलते यह पास ही होने के चलते इस देख पाना मुश्किल होता है। इसमें हर समय वाहन चालक के अलावा पैदल चलने वालों के भी गिरने का खतरा बना रहता है। रात्रि में तो यहां पर स्थिति अधिक गंभीर नजर आती है। इस ओर भी न तो नागरिकों न ही ध्यान दिया न ही संबंधित वार्ड सभासद ने। सभासद की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय नागरिकों में तीव्र रोष व्याप्त है। उनका कहना था कि वोट मांगने तो सभासद घर-घर हाथ जोड़ते हैं, लेकिन जीतने के बाद लोगों की सुध लेना उन्हें आता ही नहीं है। वह भी यहां पर एक बड़े हादसे की ही प्रतीक्षा कर रहे हैं शायद। यह अधूरी पुलिया भी आये दिन हादसों को दावत देती हुए प्रतीत होती है। इसमें कई वाहन चालक गिरकर गंभीर रूप से घायल तक हो चुके हैं। मंगलवार को भी इसमें एक स्कूटी सवार गिर गया था, गनीमत यह रही कि उसे गंभीर चोट नहीं आयी। यदि समय रहते उक्त दोनों ही स्थानों की पुलियाओं को समय रहते सही नहीं कराया गया, तो किसी दिन बड़े हादसे को होने से नहीं रोका जा सकेगा।

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