सजगता से टला एक बड़ा हादसा

सजगता से टला एक बड़ा हादसा

मुजफ्फरनगर। रेलवे के पथ निरीक्षक विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों की सजगता से एक बड़े हादसे को टाल दिया गया। विभाग की ओर से लगभग 13 मीटर के प्रफैक्चर हुए टुकडे़ को ट्रैक ब्लॉक लेकर सही किया गया। जिसके बाद सभी ने राहत की सांस ली। अन्यथा खतौली के उत्कल हादसे की ही तर्ज पर हादसे को होने से नहीं रोका जा सकता था। 23 अगस्त 2017 को भी इसी स्थान पर मेन लाइन पर क्लिप प्लेटें निकली पायी गयी थीं। जिस पर से कई बड़ी ट्रेनें, जो कि लंबी दूरी की थीं, गुजरी थीं। ट्रैक को दो दिन की कड़ी मशक्कत के उपरांत सही किया गया।
बुधवार को निरीक्षण के दौरान मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन से मात्रा तीन सौ मीटर की दूरी पर हरिद्वार की ओर एसडी कन्या पाठशाला गांधी कालोनी, मुजफ्रपफरनगर के पास मेन लाइन पर प्रफैक्चर मिला। जिसके बाद रेलवे के रेल पथ विभाग, जिसकी की पथ की देखरेख की जिम्मेदारी होती है, के अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। आनन-पफानन में टीम ने मौक पर जाकर निरीक्षण किया तथा जांच में पाया कि लगभग 13 मीटर का टुकड़ा प्रभावित है। पास ही में थोड़ा से भाग भी क्षतिग्रस्त पाया गया। जिसके बाद लाइन की मरम्मत का कार्य प्रारंभ किया गया। जिसे दो दिन में ट्रैक ब्लॉक लेकर सही किया गया। जो छोटा से टुकड़ा क्षतिग्रस्त था, उसे वैेल्ड किया गया तथा 13 मीटर के टुकड़े को बदला गया। इसी स्थान पर खतौली के उत्कल हादसे 19 अगस्त के चार दिन बाद 23 अगस्त को कापफी संख्या में क्लिपें निकली पायी गयी थीं। इसी लाइन पर से लंबी दूरी की अनेक ट्रेनें निकली थीं। जिसमें हरिद्वार-पुरी;उत्कलद्ध, शालीमार, जनशताब्दी, बांद्रा-देहरादून मुख्य हैं। आज के व खतौली के मामले में कुछ समानता है। वह भी स्टेशन के समीप था, यह भी स्टेशन की ही समीप है। खतौली में भी लगभग इतने ही मीटर के टुकड़े को जोड़ा जा रहा था। मु.नगर में भी 13 मीटर के टुकड़े को जोड़ा गया। अंतर बस यही रहा कि खतौली में बिना ट्रैक ब्लॉक के कार्य किया जा रहा था। मु.नगर में आज ट्रैक ब्लॉक लेकर कार्य किया गया। यदि समय रहते सजगता नहीं दिखायी जाती, तो उत्कल जैसे हादसे को होने से नहीं रोका जा सकता था।
गौरतलब है कि 19 अगस्त 2017 शनिवार को शाम के पांच बजकर 47 मिनट पर पुरी से बनकर हरिद्वार को जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो बेपटरी हो गयी थी। जिसमें सौ से अधिक लोग घायल हुए तथा दो दर्जन से अधिक मौत के शिकार हो गये थे। जिसमें कई पर विभागीय गाज भी गिरी थी।

Share it
Top