कयामत की रात से कम नहीं रही रात...चुनावी परिणामों को लेकर प्रत्याशियों की आंखों ही आंखों मंे कटी रात

मुजफ्फरनगर (सत्येन्द्र सिंह उज्जवल)। परिणाम चाहे किसी भी प्रकार का हो, परिणाम ही होता है। इसको लेकर फक्रमंद होना लाजमी होता है। भले ही परिणाम वालों को अपनी जीत का सौ प्रतिशत भरोसा हो, लेकिन परिणाम के समय वह अक्सर नर्वस हो ही जाता है। इतना ही नहीं उससे जुड़े लोग भी उसी परिपाटी पर चल पड़ते हैं। कल (आज) स्थानीय निकाय रूपी परीक्षा का परिणाम घोषित होना वाला है। जिसको लेकर सभी चार चेयरमैन पद के प्रत्याशी व 431 सदस्य पद के प्रत्याशियों के चेहरों का रंग उड़ा हुआ है। इतना ही नहीं उनके समर्थक भले ही उनका हौंसला बढ़ा रहे हो, लेकिन अंदर ही अंदर वह भी चिंतनीय स्थिति का सामना कर रहे हैं। सभी चाहते हैं कि विजय का सेहरा उनके सिर बंधे, किसी अन्य के नहीं। इसी के चलते गुरूवार की रात सभी प्रत्याशियों के लिए किसी कयामत की रात से कम नहीं गुजरी। सभी ने पूरी निशा अपनी आंखों ही आंखों में काट दी।
आखिरकार राम-राम भजते हुए वह दिन आ ही गया, जिसका कि एक माह से बड़ी बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था। कल (आज) की यह एक दिसंबर की जादुई तिथि इस बात को सिद्ध कर देगी कि वह विरले एक चेयरमैन व 50 सभासद कौन होंगे, जो कि शीघ्र ही नगरपालिका परिषद, मुजफ्फरनगर की जमीं पर बतौर चेयरमैन व सभासद कदम रखेंगे। इस चुनावी परीक्षा को पास करने को लेकर सभी प्रत्याशियों के द्वारा एक माह से अधिक समय से दिन-रात एक की गयी तथा अथक मेहनत के बल पर परीक्षा को दिया गया। सभी को यह आशा है कि वह परीक्षा में पास हो जाएंगे, लेकिन यह तो 145320 मतदाताओं के द्वारा डाले गये मत ही तय करेंगे कि वह विरले 51 लोग कौन होंगे, जो कि शीघ्र ही एक चेयरमैन व 50 सदस्यों के रूप में नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर के प्रांगण में कदम रखेंगे।
परीक्षा व उसके परिणाम को लेकर राजनीति के यह छात्रा-छात्राएं रूपी प्रत्याशी आने वाले परिणाम को लेकर बेहद ही चिंतित नजर आ रहे है। जिसको लेकर गुरूवार की रात्रि में इनकी आंखों में नींद के स्थान पर चिंतन व घबराहट रही। राजनीति के ये 435 छात्रा-छात्राओं परीक्षा (मतगणना) को लेकर सारी रात्रि आंखों ही आंखों में काटी।
जब बात परिणाम की आती है, तो बेचैनी तथा चिंतित होना स्वाभाविक है। अच्छे से अच्छा व्यक्ति भी एक बार को तो बेचैन तथा चिंतित हो ही जाता है। एक सप्ताह का कार्यकाल और वह भी परिणाम की प्रतीक्षा मंे कम नहीं होता है। एक ओर परिणाम को लेकर सभी प्रत्याशियों के चेहरों पर बेचैनी सहित हवाइयां उड़ रही हैं। वहीं दूसरी ओर इनके समर्थक भी कम परेशान नहीं हैं। उन्हें यह भय सता रहा है कि कहीं यदि उनके नेता चुनावी परीक्षा में असफल हो गये, तो इसका गुस्सा उनके उफर ही उतरेगा। वह अपने प्रत्याशी को जीतने का आश्वासन देकर उनकी हौंसला अपफजाई करते रहें, लेकिन नींद पूरी रात उनकी आंखों से गायब रही। वहीं दूसरी ओर प्रत्याशियों व उनके समर्थकों के दिलों की धडकनें भी रफ्तार पकड़ती हुई नजर आयीं।

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