मतदाताओं की खामोशी के चलते सियासी पण्डितों के लिये आंकलन करना हो रहा भारी

मतदाताओं की खामोशी के चलते सियासी पण्डितों के लिये आंकलन करना हो रहा भारी

खतौली। नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद का चुनाव रविवार को सम्पन्न हो जाने के बाद सोमवार पूरे दिन सभी प्रत्याशी अपनी जीत के समीकरणों के लिये मतदाताओं द्वारा डाले गये वोटों का गुणा भाग करते रहे। वोट डालने के बाद मतदाताओं के खामोश रहने से पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ी प्रत्याशियों की हार जीत का आंकलन करना कस्बे के सियासी पण्डितों के लिये भी मुश्किल हो गया है। पालिकाध्यक्ष पद हेतु हुए मतदान के रुझान से मुकाबला सपा, बसपा व भाजपा की प्रत्याशियों के अलावा निर्दलीय अनीता रानी और नाजमीन कौसर को मिले मतों पर आकर अटक गया है। जीत का सैहरा किसके सिर बंध्ेगा इसका पफैसला अब एक दिसम्बर को होने वाली मतगणना के पश्चात ही पता चलेगा। 65.78 प्रतिशत हुए मतदान के अनुसार कुल 54 हजार मतों में से 37 हजार 254 वोट का पोलिंग हुआ है। अनुमान है कि इनमें 17 हजार वोट बहुसंख्यक वर्ग की तथा 20 हजार वोट अल्पसंख्यकों की शामिल है। मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी श्रीमती रीतू जैन, निर्दलीय श्रीमती अनीता रानी व सपा प्रत्याशी श्रीमती बिलकिस बानों के बीच सिमटा हुआ है। मतदान के बाद पड़े मतों की गुणा भाग करके पूर्व चेयरमैन पारस जैन अपनी माता भाजपा प्रत्याशी श्रीमती रीतू जैन, भाजपा के बागी मदन छाबडा निर्दलीय प्रत्याशी अपनी पत्नि अनीता रानी तथा सपा नेता जमील अहमद सपा प्रत्याशी अपनी पत्नि बिलकीस बानों की पक्की जीत होने का दावा कर रहे है। कस्बे की राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों का मानना है कि हिन्दू मतों को 70 प्रतिशत जिस प्रत्याशी ने बटोरा है, जीत उसकी होगी, जबकि सपा प्रत्याशी की जीत का पफैसला बाकी मुस्लिम प्रत्याशियों को मिलने वाले मतों के आधार पर होगा। मुस्लिम मतों में बसपा सहित मुस्लिम निर्दलीय प्रत्याशियों की सेंध्मारी 10 हजार का आंकड़ा पार कर गयी, तो सपा प्रत्याशी का जीतना मुश्किल ही नही नामुमकिन हो जायेगा।

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