मुजफ्फरनगर: ईवान हास्पिटल में मरीज की मौत पर हंगामा...मृतक के परिजनों को थमाया लाखों का बिल, शव देने से किया इंकार, सैंकडों ग्रामीणों ने दिया अस्पताल गेट पर धरना

मुजफ्फरनगर। एक निजी हॉस्पिटल में मरीज की मौत होने पर अस्पताल प्रशासन ने रकम जमा न करने पर लाश देने से इंकार कर दिया। इस बात को लेकर काफी हंगामा हुआ और मृतक के परिजनों ने अस्पताल के बाहर धरना देना शुरू कर दिया। परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मृतक के परिजनों ने लाखों रूपये का बिल थमाये जाने व बिल का भुगतान न करने पर शव देने से इंकार करने का भी आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने बामुश्किल मामला निपटवाया।
जानकारी के अनुसार खतौली कोतवाली क्षेत्र के गांव अहमदगढ गालिबपुर निवासी 35 वर्षीय सुभाष पुत्र सुखबीर को बीती सायं हार्ट अटैक पड गया था। शाम लगभग छह बजे परिजन उसे गम्भीर हालत में भोपा रोड स्थित ईवान हास्पिटल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू कर दिया और परिजनों से कुछ रकम जमा कराने को कहा। युवक के परिजनों ने इक्कीस हजार रूपये अस्पताल प्रशासन के पास एडवांस में जमा करा दिये। इवान हास्पिटल में डा. अनुभव सिंघल व डा. आर.बी. सिंह ने युवक का उपचार शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि युवक के दिल का ऑपरेशन किया गया और नसें ब्लाक होने के कारण छल्ले डाले गये। लगभग तीन घंटे बाद युवक की मौत हो गई, जिससे वहां मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। मृतक के परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप भी लगाया। सूचना मिलने पर नई मंडी पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और हंगामा कर रहे परिजनों को शांत कराने का प्रयास किया। इसी बीच मृतक युवक के परिजनों ने शव देने की मांग की, तो आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने एक लाख 62 हजार रूपये का बिल बनाकर मृतक युवक के परिजनों के हाथ में थमा दिया और तत्काल भुगतान करने के निर्देश दिये। मृतक के परिजनों ने इतनी मोटी रकम देने में असमर्थता जताई, जिस पर अस्पताल प्रशासन ने शव देने से इंकार कर दिया। इस मामले को लेकर देर रात्रि में अस्पताल में कई घंटे तक हंगामा चलता रहा। मृतक के परिजनों ने बारह सौ रूपये के किराये पर एम्बूलैंस भी बुलाकर खडी कर ली, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने शव देने से इंकार कर दिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद भी शव नहीं दिया गया। पूरी रात हंगामा चलने के बाद आज सुबह मृतक के परिजनों ने अपने गांव में फोन कर दिया, जिस पर दो ट्रैक्टर-ट्रालियों में सवार होकर सेंकडों महिला पुरूष अस्पताल पहुंच गये और उन्होंने अस्पताल के गेट पर धरना देना शुरू कर दिया। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने न तो अस्पताल से बाहर निकलने दिया और न ही किसी को अस्पताल में घुसने दिया। यह देखकर अस्पताल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गये। दूसरी ओर पुलिस ने भी अस्पताल प्रबंधन पर मामला निपटाने का दबाव बनवाया। काफी देर तक चली गहमागहमी के बाद मृतक के परिजनों ने दस हजार रूपये की धनराशि फिर जमा करा दी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को शव सौंप दिया। सुबह लगभग साढे दस बजे मृतक युवक का शव परिजन अपने गांव में ले गये और गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया।

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