जगत सिंह को पापों का खतराः विजय सिंह

जगत सिंह को पापों का खतराः विजय सिंह

मुजफ्फरनगर। भूमाफियाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले 22 साल से कलक्ट्रेट में धरनारत मास्टर विजय सिंह ने पूर्व विधायक ठाकुर जगत सिंह के आरोपों को बेबुनियाद और उनकी मानसिक विकृति बताया तथा कहा कि ठा. जगत सिंह ने प्रेस को गुमराह किया है। उन्हांेने कहा कि पूर्व विधायक ठाकुर जगत सिंह को जान का खतरा नहीं, बल्कि अपने पापों के खुलासे का खतरा है। उनके खुद के शिकायती पत्र पर एलआईयू जांच रिपोर्ट में पूर्व विधायक ठाकुर जगत सिंह के आतंकियों अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों से सम्बन्ध बताये गये।
देश में गरीबों और दलितों के आवंटित होने वाली सार्वजनिक भूमि पर भूमाफियाओं के कब्जे और भ्रष्टाचार के खिलाफ 22 साल से डटे मास्टर विजय सिंह की राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पहचान बन चुकी है। अहिंसा व गांधी तरीके से अपने आन्दोलन को चलाने वाले मास्टर विजय सिंह पर जगत सिंह ने आरोप लगाये थे, जिसमें उन्होने मीड़िया से वार्ता में कहा था कि विजय सिंह के आतंकी व हिस्ट्रीशीटरों से सम्बन्ध हैं। इसकी वजह से उनकी जान को खतरा बना हुआ है, साथ ही यह भी दावा किया था कि चौसाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर उनका अवैध कब्जा नहीं है। प्रशासन चाहे तो सीबीआई जांच करा सकता है। मुख्यमंत्राी योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के लिये सांसद डा. संजीव बालियान के आवास पर तीन दिन से धरने पर मास्टर विजय सिंह के बैठने से बौखलाये पूर्व विधायक ठाकुर जगत सिंह ने कई आरोप मास्टर विजय सिंह पर लगाये थे, इन्हीं आरोपों का जवाब मास्टर विजय सिंह ने दिया है। मास्टर विजय सिंह का कहना है कि पूर्व विधायक ठाकुर जगत सिंह को जान का खतरा नहीं, बल्कि उसे अपने पापों का खतरा है। मास्टर विजय सिंह ने बताया कि गत 22 साल से वे कचहरी के बरामदे में अकेले सत्य और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पारदर्शी जीवन को हर कोई जानता है, यदि हिंसा व अपराधियों का वे सहारा लेते, तो अपनी जिन्दगी के 22 साल अहिंसात्मक तरीके से चल रहे धरने में स्वाहा नहीं करते। जगत सिंह ने पहले भी गत 10 सितम्बर 2007 तो एसएसपी मुजफ्फरनगर को शिकायत सौंपकर उन पर यही झूठे अनर्गल आरोप लगाये थे। एसएसपी ने आरोपी की जांच का जिम्मा स्थानीय अभिसूचना इकाई को दिया था। एलआईयू के वरिष्ठ उपनिरीक्षक एमएल नागर ने 26 सितम्बर 2007 को यह गोपनीय जांच रिपोर्ट पूरी कर एसएसपी को सौंप दी थी। रिपोर्ट में बिन्दूवार जगत सिंह के आरोपों को झूठा दर्शाया गया है। कचहरी में चौसाना के दलित व ग्रामीणों के धरने पर बैठे विजय सिंह जिन आतंकियों के हिस्ट्रीशीटर का साथी बताया गया है। उस आरोप पर एलआईयू ने उल्टे पूर्व विधायक को दोषी ठहराया है। एलआईयू रिपोर्ट में कहा गया है अपराधिक छवि के लोग जगत सिंह के कट्टर समर्थक थे, जो चुनाव में भी उनके पक्ष में जनता व मतदाताओं को आतंकित करते थे, जिसके परिपेक्ष में भी जगत सिंह द्वारा शिकायती प्रार्थना पत्रा अधिकारियों को बार-बार दिये गये। जांच रिपोर्ट में यहां तक भी कहा गया है कि जगत सिंह के नौकर बिल्लू पुत्र बहादुर गांव सुन्दरनगर चौसाना की गोली लगने के कारण दिल्ली में जाकर मौत भी संदिग्ध थी। उसकी हत्या भी जगत सिंह के इशारे पर की गई थी। मास्टर विजय सिंह का कहना है एलआईयू रिपोर्ट में जगत सिंह व परिजनों पर विभिन्न अपराध करने के मुकदमें दर्ज है, उनका अपराधिक इतिहास है, जहां तक जगत सिंह का दावा है कि सरकारी भूमि पर उनका अवैध कब्जा 1 इंच जमीन पर भी नहीं है, वो कहना उनका गलत है। सन् 2007 में शासन के निर्देश पर उनसे उनके अवैध कब्जे से 300 बीघा सरकारी भूमि मुक्त करायी गई थी, जो सर्वविदित है। उक्त जमीन पर ठाकुर जगत सिंह का ही कब्जा था। अपने राजनैतिक भविष्य को बचाने तथा प्रदेश में मुख्यमंत्राी योगी आदित्यनाथ की भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिये जगत सिंह ने उन पर झूठे का आरोप लगा दिये, ताकि शासन-प्रशासन व मीडिया को गुमराह किया जा सके। अपने जुर्म छिपाने के लिये जगत सिंह ने सपा छोड़कर भाजपा में आ गये थे, मगर भाजपा ने उनके काले कारनामों को देखकर उन्हें तवज्जों नहीं दी। सियासी फायदे के लिये वे पार्टी बदलते रहे। जगत सिंह का केवल एक ही मकसद रहा है कि सत्तासीन पार्टी में शामिल होकर अपने खिलाफ बैठी जांच व कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके। मास्टर विजय सिंह ने यहां तक बताया कि उनसे जान का खतरा बताकर जगत सिंह सरकारी गनर व शैडो सुरक्षा लेना चाहता है। एलआईयू रिपोर्ट मंे भी इस बात का जिक्र है कि मास्टर विजय सिंह के खिलाफ आरोप लगाकर जगत सिंह सुरक्षा पाना चाहता है।

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