सामाजिक एकता का संदेश देती है मुजफ्फरनगर द बर्निंग लवः मांडी

सामाजिक एकता का संदेश देती है मुजफ्फरनगर द बर्निंग लवः मांडी

मुजफ्फरनगर। फिल्म को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं है। सभी हिंदू व मुसलमान मिलकर इस पिफल्म को देखना चाहते हैं। प्रशासन इसमें अडंगा लगा रहा है। वह फिल्म को दिखाने की जनपद में अनुमति नहीं दे रहा। ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी दबाव में कार्य कर रहा है। उक्त उद्गार 17 नवंबर को रिलीज होने वाली फिल्म मुजफ्फरनगर द बर्निंग लव के लेखक व निर्माता मनोज मांडी ने बुधवार को आयोजित एक प्रेसवार्ता में व्यक्त किये।
उन्होंने आगे कहा कि फिल्म को दक्षिण भारत के उन क्षेत्रों में जहां हिंदी नहीं बोली जाती, उन्हें छोड़कर व जनपद मुजफ्फरनगर को अलावा पूरे भारत में एक साथ रिलीज किया जा रहा है। उनका कहना था कि साल 2013 में जो कुछ हुआ उन्होंने अपनी आंखों से देखा, फिल्म में उसी को शामिल किया गया है। इस फिल्म के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गया है कि कोई भी पार्टी, धर्म-मजहब खराब नहीं है, बल्कि इन सब में कुछ लोग खराब हैं, जो कि माहौल को खराब करना चाहते हैं। उनको हमें पहचानने की आवश्यकता है। उनका पहचान कर सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए। उनका कहना था तीन साल की अथक मेहनत के उपरांत पिफल्म का निर्माण किया गया। उनका कहना था कि वह जनपद मुजफ्फरनगर में फिल्म को प्रदर्शित करना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन इस मामले में उदासीनतापूर्ण रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सब उन लोगों के कहने पर किया जा रहा है, जो नहीं चाहते कि जनपद में अमन चैन कायम हो। अपनी फिल्म के नाम बदलने को लेकर उनका कहना था कि सेंसर सात सदस्यीय कमेटी के एक सदस्य ने, जो कि एक विशेष समुदाय से था, आपत्ति की थी, लेकिन कोई कारण बताने में नाकाम रहा था। उसके बाद रिवाईजिंग कमेटी मंे मामले को ले जाया गया, जहां पर उसे नाम बदलने के बाद यूए सर्टिफिकेट दे दिया गया। उन्होंने अंत में कहा कि यदि 17 नवंबर को उनकी फिल्म को रोकने की कोशिश की गयी, तो फिल्म के कलाकार व उन्हें मजबूर होकर हिंदू, मुसलमानों व कुछ साधुओं के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन करना होगा। उन्होंने मुख्यमंत्राी योगी आदित्यनाथ से भी अपील की कि यदि वह फिल्म को देखना चाहते हैं, तो वह उन्हें दिखाने को तैयार हैं।

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