पार्टी में और भी हैं विभीषण बाकी...सांसद, नगर विधायक व जिलाध्यक्ष रहे रूठो को मनाने में कामयाब

पार्टी में और भी हैं विभीषण बाकी...सांसद, नगर विधायक व जिलाध्यक्ष रहे रूठो को मनाने में कामयाब

'सत्येन्द्र सिंह उज्जवल'

मुजफ्फरनगर। भारतीय जनता पार्टी मंे टिकट को लेकर हुई मारामारी किसी से छुपी नहीं है। चाहे वह चेयरमैन पद को लेकर हो, चाहे सदस्य पद को लेकर। टिकट वितरण को लेकर स्थिति यह आ गयी थी कि पार्टी की वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को पार्टी विरोधी झंडा तक बुलंद करते हुए नगर के हृदय स्थल पर धरनारत होकर हंगामा तक करना पड़ा था, जिसमें सांसद, नगर विधायक व जिलाध्यक्ष के पुतले तक फूंके गये थे तथा विधायक व सांसद को भी अच्छा खासा विरोध झेलना पड़ा था। जिसके बाद दो वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के द्वारा चेयरमैन पद को लेकर निर्दलीय के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर पार्टी के नेताओं को खुली चुनौती दी गयी थी। जिसके बाद पार्टी के कैबिनेट मंत्राी व जिला प्रभारी को बीच-बचाव के लिए बाध्य होना पड़ गया था, लेकिन उनके आने से पूर्व ही रूठे दो में से एक को मना लिया गया। जो कि 10 नवंबर को अपना नामांकन पत्र वापस ले लेंगी। इसे भाजपा के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर के चेयरमैन पद को लेकर भारतीय जनता पार्टी में एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ हुई। इस पद को लेकर सभी ने अपने-अपने दावे पेश किये। सभी अनुभवी कार्यकर्ता रहे, जो कि पार्टी की काफी लंबे समय से सेवा करते हुए चले आ रहे हैं, लेकिन पार्टी हाईकमान के द्वारा हाल ही में लगभग सात माह पूर्व भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वाले अरविंदराज शर्मा की पत्नी सुधाराज शर्मा को भाजपा की ओर से चेयरमेैन पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। बस क्या था, भाजपा में विरोध रूपी ऐसी सुनामी आयी कि जिसने पार्टी की जड़ों को हिलाकर रख दिया। एक ओर जहां पार्टी की प्रत्याशी सुधाराज शर्मा अपना नामांकन दाखिल कर रही थी, वहीं दूसरी ओर नाराज पार्टी की वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में शुमार पूर्व विधायक श्रीमती सुशीला अग्रवाल व सरिता अरोरा शर्मा के द्वारा विरोध स्वरूप अपने समर्थक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर शिवचौक पर जमकर हंगामा किया गया। जानकारी मिलने पर सांसद डा. संजीव बालियान व नगर विधायक कपिल देव अग्रवाल व जिलाध्यक्ष रूपेंद्र सैनी आदि वरिष्ठ नेताओं को वहां पर मनाने जाने पर नाराज कार्यकर्ताओं का भारी विरोध झेलना पड़ा था। वहां पर सांसद, नगर विधायक व जिलाध्यक्ष का पुतला तक दहन किया गया था। सुशीला अग्रवाल व सरिता अरोरा शर्मा के द्वारा पार्टी के जनपदीय नेताओं को छह नवंबर की दोपहर 12 बजे तक का समय दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने विरोध का बिगुल तेज करते हुए निर्दलीय के रूप में अपना-अपना नामांकन दाखिल कर दिया था। नामांकन क्या दाखिल हुआ, पार्टी के जिला प्रभारी व कैबिनेट मंत्राी सतीश महाना को जनपद आगमन के लिए बाध्य होने को सोचना पड़ा। उनके आगमन की जानकारी मिलते ही आनन-पफानन में रूठों को मनाने का मंथन किया गया। जिला प्रभारी को यह संदेश दिया गया कि मामले को अपने स्तर से ही निपटा लिया जाएगा। जिसकेे चलते बुधवार की शाम को सांसद डा. संजीव बालियान, नगर विधायक कपिल देव अग्रवाल व जिलाध्यक्ष रूपेंद्र सैनी, अरविन्दराज शर्मा आदि पूर्व विधायक श्रीमती सुशीला अग्रवाल के घर पर पहुंचे, जहां पर उनकी मान-मनौव्वल की गयी। कापफी मनाने पर पूर्व विधायक मान गयीं और उन्होंने अपना नामांकन वापस लेने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही सरिता अरोरा शर्मा व वार्ड-10 से निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति चौध्री भी मान-मनौव्वल के बाद मान गई और अपना नामांकन वापस लेना स्वीकार कर लिया, जिसके बाद सभी नेताओं के द्वारा चैन की सांस ली गयी और संदेश जिला प्रभारी सतीश महाना तक जारी किया गया। गौरतलब है कि अपना नामांकन दाखिल करने से पूर्व सुशीला अग्रवाल ने कहा था कि उनका विरोध पार्टी से कतई नहीं है, विरोध तो व्यवस्था से है। उन्होंने अपने टिकट न मिलने की वजह नगर विधायक, जिलाध्यक्ष, जनपद व जिला प्रभारी आदि को माना था। उनका कहना था कि कई सालो से पार्टी की सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया और बाहरी पैराशूट प्रत्याशी को लाकर थोंप दिया गया। सांसद डा. संजीव बालियान, नगर विधायक कपिल देव व जिलाध्यक्ष रूपेंद्र सैनी का यह प्रयास तो रंग ले आया, लेकिन यदि वह सदस्य पद के टिकट को लेकर नाराज कार्यकर्ताओं को भी मना ले तो यह पार्टी हित में सोने पर सुहागा होगा, अन्यथा यह पार्टी के लिए अहितकारी साबित होगा, क्यांेकि यह नहीं भूलना चाहिए कि भाजपा कार्यकर्ताओं के बल पर ही देश की सबसे बडी पार्टी बन पायी है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी किसी भी लिहाज से पार्टी के हित में नहीं रही। अभी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए समय है, समय निकल जाने पर सांप निकल जाने पर लकीर पीटने वाली कहावत चरितार्थ होगी, क्यांेकि लंका में अभी काफी विभीषण बाकी हैं। यदि सुशीला अग्रवाल की ही भांति नाराज कार्यकर्ताओं को मना लिया गया, तो पार्टी एक बार दीपावली मनाएगी।

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