भाकियू ने घोषित मूल्य के विरोध में जलाई गन्ने की होली

भाकियू ने घोषित मूल्य के विरोध में जलाई गन्ने की होली

मुजफ्फरनगर। शनिवार को अपने तय कार्यक्रम के चलते भारतीय किसान यूनियन की प्रदेश व्यापी आंदोलन की घोषणा के चलते किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर गन्ने की होली जलाई। भाकियू ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर किसान विरोधी होने के आरोप लगाते हुए जहां पूर्ववर्ती सरकारों के कामकाज की प्रशंसा की, वहीं चेतावनी दी कि यदि सरकारों ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो करमूखेडी जैसा आंदोलन दोबारा दोहराने से पीछे नहीं हटा जायेगा।
राज्य में योगी आदित्यनाथ सरकार ने गन्ना समर्थन मूल्य घोषित करते हुए पिछले सत्र के भाव में दस रुपये प्रति कुंटल की बढ़ोत्तरी की है। इसी को लेकर भाकियू ने प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान रात में ही कर दिया। लखनऊ विधानसभा पर जलाये गये गन्ने की तपिश मुजफ्फरनगर मुख्यालय पर भी देखने को मिली। यहां दोपहर के समय भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत के नेतृत्व में सैंकड़ों किसान हाथों में गन्ने की फसल और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां पर जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना शुरू कर दिया। मंडलाध्यक्ष ओमपाल मलिक ने कहा कि आज किसानों को कमजोर और मिल मालिकों को ताकतवर समझा जा रहा है। प्रदेश की भाजपा सरकार ने पुरानी सरकारों के कामकाज को अच्छा कहलवा दिया है। पिछली सरकारों ने गन्ना मूल्य में 40 रुपये से कम बढ़ोत्तरी नहीं की, लेकिन ये सरकार 10 रुपये की वृद्धि कर किसानों के साथ मजाक कर रही है। योगी सरकार के मंत्राी कहते हैं कि हमने मिलों से शत प्रतिशत बकाया किसानों के खातों में पहुंचवा दिया है, लेकिन हकीकत यह है कि शुगर मिलों पर सरकार का कोई भी बस नहीं चल पा रहा है। मिलों में पैराई सत्र शुरू हो चुका है और पिछला बकाया नहीं मिल पा रहा है। मंत्राी और सरकार झूठ बोलकर ठगने का काम कर रहे हैं। भाजपा भूल रही है कि यूपी में मोदी या शाह से नहीं किसानों के वोट से जीत मिली है। अब 2019 आ रहा है, इसमें किसान भाजपा को सबक सिखाने को तैयार है। उन्होंने किसानों को एकजुट होने का आह्नान करते हुए कहा कि सरकार की नींद तोड़ने के लिए आज से करमूखेडी जैसा आंदोलन करने की जरूरत है, ये सरकार वार्ता की बोली नहीं समझती, इसे टकराव की भाषा सबक देगी। राजू अहलावत ने कहा कि यूपी में चुनाव के समय भाजपा ने गन्ना मूल्य, गन्ना बकाया और घटतौली का मुद्दा बड़े पैमाने पर उठाते हुए सत्ता मिलने पर समाधान का भरोसा दिया था, परन्तु सरकार गठन के बाद भाजपा किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने में असफल साबित हो रही है। 10 रुपये गन्ना मूल्य बढ़ाने से किसानों में रोष है। ये वृद्धि तुलनात्मक रूप से महंगाई दर में हुई वृद्धि से भी कम है। गन्ना फसल की लागत में इस साल बढ़ोत्तरी हुई है। एक कुंटल गन्ना पैदा करने में 325 रुपये लागत आ रही है। ऐसे में सरकार के पफैसले से भाकियू संतुष्ट नहीं है। प्रदर्शन के बाद किसानों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर ही गन्ने की होली जलाकर रोष जताया और सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन प्रशासन को दिया। इसमें गन्ना मूल्य पर पुनर्विचार करते हुए 450 रुपये प्रति कंुतल करने, धान और गेहूं की पफसल पर 200 रुपये प्रति कुंतल बोनस दिये जाने की मांग की गयी है।
इस दौरान मुख्य रूप से ओमपाल मलिक, राजू अहलावत, धर्मेन्द्र मलिक, भूपेन्द्र राठी, सुभाष बालियान, नीरज पहलवान, नीटू, राजू सहित सैंकडों किसान उपस्थित रहे।

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