किसान ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से लगाई गुहार

किसान ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से लगाई गुहार

मुजफ्फरनगर। गन्ना मिलों व गन्ना विभाग द्वारा सामान्य गन्ना उत्पादन करने वालों का आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न करने को लेकर व सामाजिक प्रतिष्ठा की क्षतिपूर्ति के लिए कलेक्ट्रेट में ध्रना दे रहे किसान/आर्य जत्था एकजुटता संघ संचालक ने न्याय के जिला गन्ना अधिकारी व मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट के यहां पर न्याय को लेकर गुहार लगायी है। आर्य जत्था एकजुटता संघ के संचालक राजऋषि आर्य रूहल के द्वारा गन्ना विभाग व खतौली मिल प्रशासन के विरूद्ध कलेक्ट्रेट परिसर में दिया जा रहा धरना आठवें दिन भी जारी रहा। किसान ने सोमवार को प्रशासन के माध्यम से अपनी मांग संबंधी एक ज्ञापन जिला गन्ना अधिकारी व मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजा। जिसमें कहा गया है कि गन्ना मिलें व गन्ना विभाग के द्वारा किसानों का लगातार शोषण व उत्पीड़न किया जा रहा है। उनके द्वारा किसानों के मान-सम्मान को आये दिन क्षति पहुंचायी जा रही है। किसानों की स्थिति ऐसी नहीं है कि वह न्याय प्राप्त करने को लेकर न्यायालयों के दरवाजे खटखटा सकें। वर्तमान में महंगाई अधिक है। किसान अधिवक्ताओं की पफीस नहीं दे सकते हैं। निर्धन किसान अपनी न्यायालय में लड़ाई लड़ने में असमर्थ है। राज)षि आर्य रूहल का कहना था कि उनकी स्थिति भी ऐसी नहीं है कि वह अदालती खर्च वहन कर सकंे। उफपर से भ्रष्टाचारियों का भय सताता रहता है। उनका कहना था कि सामान्य प्रजाति के गन्ने की खेती करने वाले किसानों की पर्ची समय से नहीं आ पाती है, जिसके चलते वह समय पर गेहूं की बुआई नहीं कर पाते हैं। उसके बाद भी समय से कलेंडर के हिसाब से पर्ची नहीं आ पाती है। जिससे गन्ने की समय से कटाई नहीं हो पाती है। सामान्य प्रजाति मंे पशु चारा अधिक है। यह पशुओं के लिए कारगर साबित होता है। इसके चलते ही कुछ छोटे किसान व मजदूर दूध का व्यवसाय करते हैं। सामान्य गन्ना उत्पादकों के शोषण-उत्पीड़न से दूध कारोबार भी प्रभावित होता है। उन्होंने इस संबंध में एक उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही हो और किसानों को शोषण व उत्पीड़न से निजात मिल सके।

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