कार्तिक मेला ग्राउण्ड तालाब में तब्दील

कार्तिक मेला ग्राउण्ड तालाब में तब्दील

भोपा। शुक्रताल में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर प्रतिवर्ष लगने वाले गंगा स्नान मेले की अधूरी तैयारियों को लेकर मेले में अव्यवस्थाओं का संकट गहरा गया है। मेला ग्राउण्ड जहां तालाब बना हुआ है। वहीं मेला ग्राउण्ड के चारों ओर पफैली गन्दगी आदि का कम समय रहते दुरूस्त हो जाना मुश्किल प्रतीत होता दिखायी दे रहा है। प्रशासन की मेले के प्रति उदासीनता से प्राचीन व प्रसिद्ध गंगा स्नान मेले की ख्याति पर दुष्प्रभाव पडने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
प्राचीन तीर्थनगरी के गंगा स्नान मेले का आगाज होने में चन्द दिन शेष रह गये हैं। आगामी 4 नवम्बर को मुख्य स्नान है। सप्ताह भर चलने वाले गंगा स्नान मेले की तैयारी को लेकर जहां प्रशासन 4 अक्टूबर को मीटिंग कर चुका है, किन्तु मेले के आयोजन को लेकर प्रशासन की गम्भीरता जरा भी दिखायी नहीं पड रही है। मेला ग्राउण्ड अभी तक तालाब बना हुआ है, जहां गहरे गड्ढों में गन्दा पानी भरा हुआ है तथा चारों ओर कीचड फैली हुई है तथा गन्दगी के ढेर लगे हुए हैं। अधूरी अव्यवस्था को लेकर मेले की व्यवस्था पर संकट गहराता प्रतीत हो रहा है। कम समय में किस प्रकार मेला ग्राउण्ड को साफ-सुथरा किया जायेगा या श्रद्धालुओं को भारी अव्यवस्थाओं व असुविधाओं का सामना करना पडेगा, जिसे लेकर नागरिकों के मस्तिष्क में शंका के बादल गहरा गये हैं। प्रशासन की उदासीनता के कारण मेला अपने स्वरूप को छोटा कर रहा है, जहां बढती भीड आवश्यकताओं को बढा रही हैं, वहीं प्रशासन अधूरी व्यवस्थाओं को लेकर जरा भी चिन्तित नहीं है। आधुनिक दौर में सरकार की ओर से न तो किसी कृषि गोष्ठी व किसी बडे सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है और न ही किसी बडी खेल प्रतियोगिता का आयोजन होता है। ग्रामीण संस्कृति की पहचान गंगा स्नान मेले की पहचान धूमिल करने में प्रशासन कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रहा है। साधु-संतों व नागरिकों में मेला ग्राउण्ड की बदहाली को लेकर भारी रोष व्याप्त है।

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