सिटी मजिस्ट्रेट व निजी स्कूल प्रबंधन में ठनी

सिटी मजिस्ट्रेट व निजी स्कूल प्रबंधन में ठनी

मुजफ्फरनगर। निजी स्कूल प्रबंधन व नगर मजिस्ट्रेट में ठन गयी है। इसकी वजह है नगर मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा का बड़बोलापन। जिसके चलते निजी स्कूल प्रबंधन बेहद ही खफा हैं। उनका कहना था कि नगर मजिस्ट्रेट हिटलरशाही अपना रहे हैं। जिसे वह कतई सहन नहीं करेंगे। इस संबंध में उन्होंने आगे की रणनीति बनाने की कवायद प्रारंभ कर दी है। कुछ दिन पूर्व नगर मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा ने परिक्रमा मार्ग स्थित एक कालेज में सभी निजी स्कूल प्रबंधकों की एक बैठक ली थी। जिसमें स्कूली वाहनों व उनमें सवार होने वाले बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था। बैठक में जनपद के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन राजीव कुमार बंसल भी उपस्थित थे। जिन्हें इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही के आदेश जारी किये गये थे। एक स्कूल के प्रबंधक ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाते हुए कहा कि यहां तक तो सब ठीक ठाक रहा, लेकिन मामला उस समय बिगड़ गया, जब नगर मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा ने बैठक में यह कहा कि उनके पास जनरल डायर जैसी पावर है, वह चाहे तो सभी को सभागार से घुटनों के बल जाना पड़ेगा। जिसके बाद निजी स्कूल संचालकों में रोष व्याप्त हो गया। उनका कहना था कि वह इसके विरूद्ध आवाज उठाएंगे।
इस संबंध में आरोप लगाने वाले स्कूल प्रबंधक ने सिटी मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली को आईना दिखाते हुए एक चित्र जारी किया, जो कि नगर की जानसठ बस स्टैंड का था, जिसमें एक टेैंपो पर लटक कर व बाहर खड़े होकर स्कूली छात्र अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे थे। जिस पर उनका कहना था कि इन छात्रों की सीट बेल्ट, सीट पर हत्ते, फायर सिलेंडर, बस अटेंडेंट सब कहां है। क्या इन बच्चों को सुरक्षा की जरूरत नहीं है। या खतरा केवल प्राईवेट स्कूली बसों में ही है, स्कूल के अंदर तो स्कूल की जिम्मेदारी है, परंतु स्कूल से बाहर तो प्रशासन की जिम्मेदारी है, जिसे वह कितनी जिम्मेदारी से निभा रहा है, उसे यह तस्वीर ही बयां कर रही है। उनका कहना था कि पहले सिटी मजिस्ट्रेट अपनी कार्यप्रणाली को लेकर अपने गिरबां में झांके, उसके बाद स्कूल प्रबंधन को सुरक्षा का पाठ पढ़ाये। यही बेहतर होगा।

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