मुजफ्फरनगर: पटाखों पर प्रतिबंध से व्यापारी बुरी तरह मायूस, पटाखे न मिलने से बच्चों को खिलौनों से बहला रहे माता-पिता

मुजफ्फरनगर: पटाखों पर प्रतिबंध से व्यापारी बुरी तरह मायूस, पटाखे न मिलने से बच्चों को खिलौनों से बहला रहे माता-पिता

मुजफ्फरनगर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पटाखो की बिक्री पर प्रशासन द्वारा पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे पटाखा विक्रेताओं में मायूसी छागई, वहीं पटाखों की थोक में बिक्री करने वाले व्यापारी अपने करोडा रूपये फंसने के कारण परेशान है। पटाखों पर प्रतिबंध के कारण बच्चे व युवा मायूस नजर आ रहे है। माता पिता छोटे छोटे बच्चों को बाजार में पटाखों के बजाये खिलाने व सजावटी सामान दिलाकर बहला रहे है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधनी क्षेत्र (एनसीआर) में दीपावली से पूर्व ही पटाखों की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाते हुए सरकार को इस पर अमल कराने के निर्देश दिये थे। इस आदेश के बाद दिल्ली के अलावा हरियाणा का कुछ क्षेत्र एवं दिल्ली से मुजफ्फरनगर तक इस आदेश की जद में आ गये। सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश दिये कि पटाखों की बिक्री पर पूर्ण रोक रहेगी। यदि कोई भी पटाखा विक्रेता बिक्री करता हुआ पाया गया, तो उसके विरूद्ध कडी कार्यवाही होगी। पटाखों पर प्रतिबंध के मामले में सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अदालत देखना चाहती है कि पटाखों को चलाने के बाद दीपावली एवं उसके एक सप्ताह बाद एक पर्यावरण दूषित रहता है तथा इससे निकली गैस वातावरण को प्रभावित करती है। पटाखों पर प्रतिबंध से पर्यावरण को कितना दूषित होने से बचाया जायेगा। इसकी अदालत के आदेश पर एक समिति जांच करेगी। पटाखों पर लगाया गया प्रतिबंध एक स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन अदालत को देखना चाहिये था, कि इस प्रतिबंध से एनसीआर से हजारों पटाखा विक्रेताओं के करोडो रूपये फंसे गये है। दीपावली पर फुटकर विक्रेता अपनी रोजी के लिये सड़कों के किनारे अस्थाई दुकाने लगागाकर पटाखे बेचकर अपना त्यौहार मनाते थे। लेकिन इस प्रतिबंध के चलते फुटकर पटाखा विक्रेता परेशान है। पटाखा बिक्री को प्रतिबंध को लेकर नगर के पटाखो के थोक विक्रेता सचिन अग्रवाल पटाखा व अशोक गोयल का कहना है सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वमान्य है, लेकिन अदालत को यह प्रतिबंध तीन चार माह पूर्व लगाना चाहिये था। ताकि थोक विक्रेता बिक्री के लिये पटाखे न खरीदते और उनका करोडो रूपया न फंसता। प्रतिबंध पर युवा व बच्चे बेहद मायूस है। क्योकि दीपावली पर सभी पटाखे चलाने के लिये पूरी तरह से उत्साहित रहते थे। युवा वर्ग तो प्रतिबंध की परिभाषा समझते है, लेकिन छोटे बच्चे तो अपने माता पिता से पटाखे खरीदने की जिद कर रहे है। माता पिता अपने बच्चो को बाजार ले जाते है और वहां पटाखे दिखाई न देने पर बच्चों को पटाखो के बजाये खिलौने व अन्य सजावटी सामान दिलाकर बहला रहे है। बरहाल सुप्रीम कोर्ट का निर्णय तो ठीक है, लेकिन इसकी चपेट में आकर हजारों फुटकर विक्रेताओं का चंद समय का रोजगार ठप हो गया है और पटाखे खरीदने में थोक विक्रेताओं का जो नुकसान हुआ है, उसे भी सुप्रीम कोर्ट को नजर अंदाज नहीं करना चाहिये था।

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