जेल में लगाये गये जैमर से आसपास के निवासी परेशान...अवांछित तत्वों के मोबाईल पर अंकुश लगाने को जेल में लगे थे तीन वर्ष पूर्व जैमर

जेल में लगाये गये जैमर से आसपास के निवासी परेशान...अवांछित तत्वों के मोबाईल पर अंकुश लगाने को जेल में लगे थे तीन वर्ष पूर्व जैमर

मुजफ्फरनगर। अवांछित तत्वों के मोबाईल पर अंकुश लगाने के लिये पुलिस प्रशासन के निर्देश पर जैमर का प्रयोग करती है, लेकिन जिला कारागार में लगाये गये जैमर से पडौसी तो परेशान है, लेकिन जेल में बंद कैदियों के पूरी बल्ले-बल्ले है। जैमर के लगभग 300 मीटर दायरे में रहने वाले आम नागरिकों के फोन ठप्प हो जाते है, लेकिन वो कौन सा जुगाड है, जिससे जेल में बंद कैदी धडल्ले से फोन पर बातचीत करते है। रेलवे पफाटक के पास स्थित जिला कारागार में तीन वर्ष पूर्व जैमर लगाया गया था, क्योंकि जेल में बंद कैदियों की अवांछनीय हरकतों के कारण जेल प्रशासन पूरी तरह परेशान था। जेल में बंद कैदी अपने फोन से बाहर किसी को भी धमकी देते थे और रंगदारी के फोन होनो तो आम बात हो गई थी। फोन करने वाले ऐसे कैदियों पर अंकुश लगाने के लिये जेल प्रशासन ने जिलाधिकारी के माध्यम से लखनउ तक गुहार लगाई थी। कापफी दिनों बाद जेल में जैमर लगाने की अनुमति मिल पायी थी। आम आदमी यह सोचकर खुश था कि अब जेल में बंद कैदियों के मोबाईल पूरी तरह बंद हो जायेंगे तथा किसी भी आम या खास पर कोई धमकी जेल से नहीं मिल पायेगी। जैमर लगने के कुछ दिन बाद आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को परेशानी होने लगी, क्योंकि उनके पफोन घर पर रहने के दौरान पूरी तरह ठप्प रहने लगे। इस दौरान कोई भी कॉल करना मुमकिन नहीं होता, जो कि क्षेत्र के आसपास 300 मीटर के दायरे में शिवपुरी, गांधी कालोनी एवं द्वारिकापुरी क्षेत्र के नागरिक परेशानहोने लगे। इस मामले को लेकर कालोनियों के लोगों ने जिलाधिकारी से भी गुहार लगाई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। शिवपुरी निवासी पूर्ण सहायक शासकीय अधिवक्ता नरेन्द कुमार शर्मा एडवोकेट, विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व नगराध्यक्ष नरेश कुमार सिंघल के अलावा एसडी मैनेजमेंट के प्राचार्य संदीप मित्तल, शिक्षक योगेश पण्डीर आदि का कहना है कि जैमर के कारण उनके घर में रखे फोन तो ठप्प हो जाते है, यदि कोई कॉल आती है, तो आवाज साफ नहीं आती, उनके यहां आने वाले मेहमान भी परेशान हो जाते है। उक्त लोगों का कहना है कि जैमर के कारण बाहरी क्षेत्र के मोबाईल तो बंद हो जाते है, लेकिन जेल में बंद कैदियों के मोबाईल कौन से जुगाड से चलते है। उनकी समझ में नहीं आता है। उनका कहना है कि जिनके फोन बंद करने के लिये जैमर लगाया था, उन कैदियों की तो बल्ले है, जबकि बाहरी लोग परेशान है। उन्होंने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि जैमर की रेंज कम कर उसे जेल के अंदर तक रखा जाये, ताकि आसपास के नागरिक परेशानी से बच सके। इस संबंध में जेल अधिकारियों से फोन पर सम्पर्क का प्रयास किया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। जिला कारागार के आसपास के मौहल्लों के निवासियों ने डीएम से इस दिक्कत से निजात दिलाने की गुहार लगायी।

Share it
Top