देश की संस्कृति में पत्रकारों की भूमिका अहम्ः ज्ञानसागर जी...पत्रकारिता को जीवित रखना है, तो आध्यात्मिकता को लाना होगा, एकता का किया आह्नान

मुजफ्फरनगर। वहलना स्थित श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्रामंदिर परिसर में मंगलवार को जिला स्तरीय पत्रकार सम्मेलन एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में मुजफ्फरनगर सहित दिल्ली व उत्तराखण्ड से आये वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा प्रतिभाग किया गया। वक्ताओं ने सामाजिक उत्थान व सामाजिक बुराइयों के नाश के लिए सकारात्मक पत्रकारिता पर बल दिया। साथ ही आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने भी भारतीय संस्कृति में पत्रकारों के योगदान को मुख्य बताया।
अतिशय क्षेत्र वहलना की पावन धरा पर आचार्य 108 श्री ज्ञान सागर जी महाराज का चातुर्मास धार्मिक, सामाजिक एवं साहित्यिक प्रभावना में चल रहा है। आचार्य ज्ञान सागर के सानिध्य में वहलना श्री दिगम्बर जैन अतिशय मंदिर परिसर में मंगलवार को 'वर्तमान परिवेश में पत्रकारों की भूमिका एवं भारतीय संस्कृति में पत्रकारिता का योगदान' विषय पर पत्रकार सम्मेलन एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुजफ्फरनगर व आसपास के जनपदों से वरिष्ठ पत्रकारों ने प्रतिभाग किया। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेश जैन ने सभी पत्राकारों व अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार उत्तमचन्द शर्मा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ शहर के वरिष्ठ पत्राकारों द्वारा दीप प्रज्जवलित करके किया गया। इसके बाद जैन कन्या पाठशाला इंटर कालेज, प्रेमपुरी, मुजफ्फरनगर की छात्राओं के द्वारा स्वागत गान प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने वर्तमान परिवेश में पत्रकारों की भूमिका को अहम् बताते हुए कहा कि आज आधुनिक तकनीक का दौर है और सोशल मीडिया सबसे बड़ी चुनौती व सूचना सहायक के तौर पर उभरा है। कई बार जिस प्रकार से घटनाओं को सोशल मीडिया पर बड़ा दिखाकर वायरल किया जाता है, हकीकत में वह सूचनाएं निम्न स्तर की पाई जाती हैं। ऐसे में पत्रकारों की यह जिम्मेदारी है कि वह किसी भी प्रकार के भ्रम में आये बिना घटनाओं की सत्यता तक पहुंचे और उनको समाज के सामने दर्पण बनकर पेश करें।
कार्यक्रम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि देश की संस्कृति आध्यात्मिक संस्कृति है। विदेशों में इसके विपरीत देखने को मिलता है। भारतीय संस्कृति में अमन चैन मिलता है। यह पर घर-घर में राम है। देश की संस्कृति में वर्तमान समय मेें परिवेश में पत्रकार की खास भूमिका है। देश की संस्कृति की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इन्हें उखाड़ पाना मुश्किल है। यह पर अनेकता में एकता है। यह पर हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाई चारों धर्म के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं। उनका कहना था कि बसाने की सोचीय, उखाड़ने की नहीं। उन्होंने आगे कहा कि अहिंसा तनाव मुक्त जीवन का सार है। इसके साथ ही उन्होंने इंटरनेट के अत्यधिक प्रयोग पर भी चिंता जताई, खासकर युवाओं को लेकर। उनका कहना था कि इसके चलते रात में उन्हें कम ही नींद आती है। इसके साथ ही उन्होंने सभी मांस, धूम्रपान जैसी वस्तुओं से दूर रहने का भी आह्वान किया।
इससे पूर्व कार्यक्रम को सम्बोध्ति करते हुए दैनिक रॉयल बुलेटिन के प्रधान संपादक अनिल रॉयल ने कहा कि पत्रकारिता का स्तर वर्तमान समय में गिरा है। अखबार चलाना कठिन कार्य हो गया है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने अपने पत्रकारिता के सफर के कई अनछुए पहलुओं को साझा किया। उनका कहना था कि आज कल की पत्रकारिता संघर्ष की पत्रकारिता है। हम समाज का अभिन्न अंग हैं। हमें अपनी जिम्मेदारी व दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए।
दैनिक मुजफ्फरनगर बुलेटिन के सम्पादक उत्तमचन्द शर्मा ने कहा कि हम सब एक हैं और हमारी एकता ही हमारी ताकत का मुख्य आधार है।
डा. सुशील उपाध्याय उपनिदेशक राजभाषा संस्थान उत्तराखंड ने कहा कि समाज मेें मीडिया के प्रति नकारात्मक माहौल बना हुआ है। हिंदी मीडिया पांच बिंदुओं पर ही केंद्रित है। इससे बाहर आना होगा। दुनिया का धर्म सत्य का मार्ग है। यह आध्यात्मिकता का धर्म है। पत्रकारिता को जीवित रखना है, तो आध्यात्मिकता को लाना होगा। वरिष्ठ पत्रकार उमाकंात लखेडा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता एक मिशन है। इसे पूरी ईमानदारी से निभाना हर पत्रकार का कर्त्तव्य है। अरविंद कुमार सिंह टीवी पत्राकार राज्यसभा ने कहा कि आज का युग संचार क्रांति का युग है। इसमें प्रिंट मीडिया की अहम् जिम्मेदारी बनती है। वरिष्ठ लेखक व पत्रकार श्रीगोपाल नारसन ने भी अपने विचारों मंे पत्रकारिता के क्षेत्र में कई अनछुए पहलुओं को उठाया। कार्यक्रम में जैन कन्या पाठशाला इंटर कालेज प्रेमपुरी, मुजफ्फरनगर की प्रधानाचार्या श्रीमती सारिका जैन के निर्देशन में छात्राओं ने कई प्रस्तुतियों को देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की व्यवस्था बनाने में पत्राकार सम्मेलन संयोजक रविंद्र जैन नावला, सुनील जैन टीकरी, जय कुमार जैन नावला का खास योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन रविंद्र जैन बजाज व पुनीत जैन जुगनू अमीनगर ने संयुक्त रूप से किया। इसके अलावा श्र्रेयांश कुमार जैन, नरेंद्र जैन नावला, राजेश जैन गर्ग डुप्लेक्स, मनोज जैन एलजी, मनीष जैन, पवन जैन, सुशील जैन, मनोज जैन, विपिन जैन, सुनील जैन आदि का भी विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में श्री दिगंबर जैन मंदिर समिति वहलना के महामंत्री राजकुमार जैन नावला ने उपस्थित मुख्य अतिथियों सहित उपस्थित सभी पत्रकारों का तहेदिल से आभार व्यक्त किया।

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