सलाखों के पीछे जल उठी भक्ति की जोत...जिला कारागार में हिंदुओं के साथ ही मुस्लिमों ने भी रखे नवरात्र के व्रत

सलाखों के पीछे जल उठी भक्ति की जोत...जिला कारागार में हिंदुओं के साथ ही मुस्लिमों ने भी रखे नवरात्र के व्रत

सत्येन्द्र सिंह उज्जवल
मुजफ्फरनगर। कारागार का नाम लेते हुए अनायस ही मन मस्तिष्क में जो अक्स उभर कर आता है, वह खूंखार अपराधियों का। जो कि लूट, हत्या, डकैती, राहजनी व चोरी जैसे गंभीर अपराधों में निरूद्ध कारागार में निरूद्ध हैं। कारागार जहां पर हर समय अपराधों को लेकर चर्चाओं का जोर रहता है। वहां पर भक्ति की धारा बहना अपने आप में एक अनोखी बात कही जाएगी। इसको लेकर किसी प्रकार की अतिश्योक्ति नहीं कही जाएगी। जी हां, यही भक्ति की भगीरथी आजकल जिला कारागार में बह रही है। जिसके चलते जिला कारागार में साम्प्रदायिक सौहार्द्र का वातावरण बना हुआ है। जिला कारागार में एक ओर जहां हिंदू बंदियों के द्वारा नवरात्र के व्रत रखे जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम बंदियों के द्वारा भी नवरात्र के व्रत रखे जा रहे हैं। इसमें पुरूषों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं के द्वारा भी नवरात्र के व्रत रखे जा रहे हैं। प्रातः व शाम को बैरकों में मां जगत जननी जगदंबे की आरती व भजन गुंजायमान हो रहे हैं। नवरात्र के व्रत को लेकर जिला कारागार प्रशासन की ओर से भी उचित व्यवस्था की गयी है।
जिला कारागार में आजकल भक्ति की भगीरथी बह रही है जिसके चलते जिला कारागार में विभिन्न अपराधों में निरूद्ध कुल 2801 में से 1480 ने नवरात्र के व्रत रखे हैं। इसमें तीस मुस्लिमों ने भी नवरात्र के व्रत रखे हैं। इसमें 22 पुरूष व आठ महिलाएं शामिल हैं। इसके अतिक्ति 37 हिंदू महिलाओं के द्वारा भी नवरात्र के व्रत रखे जा रहे हैं। मुस्लिमों के द्वारा नवरात्र के व्रत रखने की बात सुनने में भी बड़ी ही अजीब सी लगती है, लेकिन यह बात सौ प्रतिशत सही है। जी हां, जिला कारागार में विभिन्न अपराधों में निरूद्ध मुस्लिमों में से 30 के द्वारा नवरात्र के व्रत रखे जा रहे हैं। जिसमें पुरूष व महिलाएं शामिल हैं। इसमें से कुछ तो ऐसे हैं, जो काफी समय से नवरात्र के व्रत रखते हुए आये हैं। भले ही बाहर हिंदू-मुस्लिमों में वर्तमान समय में दिलों में फर्क हो, लेकिन जिला कारागार में स्थिति इसके एकदम विपरीत नजर आती है। यहां पर नवरात्र के व्रत को रख साम्प्रदायिक सौहार्द्र का परिचय देने की बात अपने आप में बड़ी बात है, यह एक स्वागत योग्य कदम माना जाएगा।
नवरात्र के व्रत रखने को लेकर अपनी आस्था को व्यक्त करते हुए शाहिद निवासी जौला, जो कि 12 साल से हत्या के केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, ने बताया कि वह 2004 से नवरात्र के व्रतों को रखता आ रहा है। उसका कहना था व्रतों को रखने से शांति व सकून मिलता है। वहीं दूसरी ओर एक ओर बंदी शादाब अंसारी रोड मोहल्ला हंडिया का कहना था कि वह हत्या के केस में बंदी है। उसने पहली बार नवरात्र के व्रत को रखा है। अपने अन्य साथियों को देखकर व बुरे कार्यों से बचने को लेकर उसने व्रतों को रखा है। नवरात्र के व्रतों को रखने वाले अन्य मुस्लिम युवक हैं जुबैर, इस्लाम, नसीम आदि। मुस्लिम युवकों का कहना था कि जब हिंदू रोजों को रख सकते हैं, तो हम लोग नवरात्र के व्रतों को क्यों नहीं रख सकते हैं। वह किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी अंतर्रात्मा की आवाज पर नवरात्र के व्रतों को रख रहे हैं। व्रतों को रखने से एक प्रकार की आत्मिक शांति व सुख की अनुभूति होती है।
वहीं दूसरी ओर नवरात्र के व्रतों को लेकर जिला कारागार प्रशासन की ओर से भी उचित प्रबंध किये गये हैं। इसमें प्रातः और शाम को व्रत का सामान दिया जाता है। जिसमें प्रत्येक को प्रातः आधा किलो दूध, केला व शाम को दही व आलू दिये जाते हैं। जिला कारागार में प्रातः व शाम को बैरकों में मां दुर्गा की आरती व भजन गाये जाने से वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो चला है, यह आरती व भजन व्रत रखने वालों के द्वारा गाए व बजाए जाते हैं।

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