प्रशासन की लापरवाही से जोखिम में हजारों मासूमों की जान...यूपी व सीबीएसई बोर्ड की आंखों में झोंकी जा रही है धूल

प्रशासन की लापरवाही से जोखिम में हजारों मासूमों की जान...यूपी व सीबीएसई बोर्ड की आंखों में झोंकी जा रही है धूल

मुजफ्फरनगर। ग्रेन चेंबर पब्लिक स्कूल जूनियर विंग तथा सीनियर विंग की शिक्षण बिल्डिंग अवैध घोषित कर उसके धवस्तीकरण के आदेश पारित किए हुए सवा साल से भी अधिक का समय बीत गया है, लेकिन तहसील, एमडीए तथा नगरपालिका के अधिकारियों, कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते अब तक बिल्डिंग ध्वस्त करने के आदेश पर कोई अमल नहीं हो पाया है। जिसके कारण हजारों मासूमों की जान जोखिम में बनी हुई है। ग्रेन चेंबर पब्लिक स्कूल जूनियर विंग, सीनियर विंग तथा इंटर कालेज के विरूद्ध स्थानीय लोगों व अभिभावकों के द्वारा मोर्चा खोल दिया गया है। वहीं एमडीए पर पूरे मामले में लीपापोती का भी आरोप लगाया गया है।
सोमवार दोपहर मीडिया सेंटर पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए नवनीत अग्रवाल, विशाल पुंडीर, महेश कुमार शर्मा, रंजन तथा अंकुर गुप्ता ने बताया कि ग्रेन चेंबर पब्लिक स्कूल जूनियर विंग व सीनियर विंग मुजफ्फरनगर के भवन को अवैध करार देते हुए 12 मई 2016 को इन्हें ध्वस्त करने के आदेश पारित किए गए थे, लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। नवनीत अग्रवाल व विशाल पुंडीर को आरटीआई के तहत मिली सूचना में यह जानकारी सामने आई थी कि उक्त दोनों भवनों का कोई नक्शा एमडीए से स्वीकृत नहीं है तथा दोनों ही स्कूलों में एमडीए के अस्तित्व में आने के बाद भारी अवैध निर्माण किया गया है। इस संबंध में 24 अप्रैल 2015 को मुख्यमंत्राी के समक्ष शिकायत की गई थी मय साक्ष्यों के, जिसके बाद एमडीए अधिकारियों द्वारा स्कूल का स्थलीय निरीक्षण किया गया। 3 मई को 2015 को स्कूल को अवैध निर्माण का नोटिस जारी करने का आदेश तत्कालीन एडीएम-प्रशासन द्वारा दिए गए, लेकिन मिलीभगत के चलते अवैध निर्माण का नोटिस सन् 2016 में जारी किया गया। इस मामले में 12 मई 2016 को 15 दिन की समय अवधि निर्धारित करते हुए स्कूल की बिल्डिंग ध्वस्त कराने का आदेश पारित किए गए, लेकिन इस मामले में अब तक सवा साल बीतने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। नवनीत अग्रवाल ने आरोप लगाया कि इस मामले में मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण ने न्यायालय में चल रहे मामले में अपनी ओर से पैरवी बिल्कुल कमजोर दी है तथा अब तक जमीन की अवैधता के बारे में कोई कागजात न्यायालय में पेश नहीं किये हैं। उल्लेखनीय है कि इस स्कूल की एक अवैध बिल्डिंग 28 नवंबर 2014 को रात के समय गिर गई थी, यदि यह हादसा दिन में होता, तो भारी जानमाल की क्षति हो सकती थी। नवनीत अग्रवाल तथा अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि अवैध भवन में कक्षाएं चलने के चलते हजारों बच्चों की जान जोखिम में बनी हुई है, लेकिन प्रशासन इस संबंध में आंख मूंदे हुए है। आरटीआई के जरिए यह भी जानकारी सामने आई है कि स्कूल द्वारा एमडीए के समक्ष यह भी स्वीकार किया गया कि जिन जमीनों पर भवन बनाए गए हैं, उनका भूमि स्वामित्व संबंध्ी कोई कागज स्कूल के पास नहीं है। नवनीत अग्रवाल का कहना था कि स्कूल की ओर से यूपी बोर्ड व सीबीएसई बोर्ड को भी धोखे में रखा गया है और मान्यता ली गयी है।

Share it
Top