राकेश शर्मा ने बसपा को किया टाटा...अपना त्यागपत्र पार्टी सुप्रीमो को भेजा

राकेश शर्मा ने बसपा को किया टाटा...अपना त्यागपत्र पार्टी सुप्रीमो को भेजा

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर के बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार किये जाने वाले पूर्व प्रत्याशी राकेश शर्मा ने पार्टी से खुद को अलग करते हुए उसे अलविदा कर दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी की मुखिया मायावती को भेज दिया है। मेरठ में कल (आज) होने वाली पार्टी की मंडलीय समीक्षा मीटिंग व रैली से पूर्व ही उनका त्यागपत्र देना पार्टी के लिए किसी सुनामी से कम नहीं आंका जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सदर सीट से चुनाव लड़कर तीसरे नम्बर पर रहने वाले राकेश शर्मा प्रभारी सदर विधानसभा ने रविवार को अचानक पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को अपना त्यागपत्र भेज दिया। यह त्याग पत्रा ऐसे समय दिया गया है, जबकि कल (आज) पार्टी मुखिया मेरठ में मंडलीय समीक्षा बैठक करने आ रही हैं। इससे पार्टी में हलचल मची हुई है। राकेश शर्मा ने अपने त्यागपत्र में कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी की शर्मनाक पराजय के बाद मुझे विश्वास था कि पार्टी में हार के कारणों की गहन समीक्षा होगी और कार्यप्रणाली में बदलाव लाया जायेगा। हर चुनाव में पार्टी द्वारा सोशल इंजीनियरिंग बदले जाने की वजह से समाज के विभिन्न वर्गों में अविश्वास की भावना बढ़ी है। यही वजह है कि चुनाव में गरीब, स्वर्ण, पिछड़ा तथा अति पिछड़ा वर्ग बसपा से पूरी तरह से छिटक गया है। दलित मतदाताओं के भी एक वर्ग में पार्टी के प्रति मोहभंग की स्थिति है। राकेश शर्मा ने मायावती से कहा कि आपने अल्पसंख्यक समाज को चुनाव मंे भारी संख्या में टिकट तो दिये, पर एक भी ऐसा नेता तैयार नहीं कर पाये, जिसकी अल्पसंख्यकों में पहचान और पकड़ हो। चुनाव परिणाम आने के बाद लखनऊ में हुई कई बैठकों में भाग लिया, आपके विचार सुने, लेकिन यह सब एक पक्षीय था। आपने अपनी निजी धारणा के आधार पर भाषण दिया और आगे का कार्यक्रम तय कर रही हैं। जरूरी तो यह था कि आप कार्यकर्ताओं की सुनती, उनसे सुझाव लेती और उसके बाद संगठन की भावी दिशा तय करतीं, कदाचित आपको लोकतांत्रिक कार्यपद्धति पसंद नहीं है और आप तानाशाही तरीके से पार्टी को निजी कंपनी के रूप में संचालित करने में भरोसा रखती हैं। राकेश शर्मा ने आगे कहा कि ऐसे में मुझे और मुझ जैसे विधानसभा चुनाव लड़ चुके तमाम लोगों को प्रतीत होता है कि पार्टी इतिहास के पन्नों की ओर अग्रसर हो रही है। पार्टी में स्वर्ण, पिछड़े और अल्पसंख्यक दूर हो चुके हैं। आप उन्हें जोड़ने के लिए गंभीर नहीं हैं। अतः पार्टी में बने रहने का कोई औचित्य मेरी समझ से परे है। जिसके चलते वह त्यागपत्र दे रहे हैं।

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