फौजी का राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार...जवान नरेन्द्र कुमार को राजनैतिक व गैर राजनैतिक संगठनों ने दी श्रद्धाजलि

भोपा। विकास खण्ड मोरना के ग्राम दरियापुर निवासी सैनिक नरेन्द्र कुमार का बीमारी के चलते निधन हो गया था। गांव में शव आने पर परिवार में कोहराम मच गया। ग्राम दरियापुर नरेन्द्र कुमार अमर रहे के नारों से गूंज उठा। सेना के जवानों ने सलामी देकर सैनिक के शव पर पुष्प चक्र चढाकर श्रद्धासुमन अर्पित किये। राजकीय सम्मान के साथ सैनिक का अन्तिम संस्कार गांव में किया गया। थाना ककरौली के ग्राम दरियापुर गांव में मध्यमवर्गीय किसान हरिसिंह का परिवार रहता है, जो अपनी पुश्तैनी 60 बीघा जमीन में खेतीबाडी कर जीवन यापन कर रहे थे। कुशल व्यवहार के चलते यह परिवार गांव में सभी का चहेता है। तीनों बेटों को पढा लिखा कर आगे बढने की प्रेरणा देकर देश की सेवा करने का जज्बा उनके अन्दर पैदा किया, जिसके चलते बडा बेटा योगेन्द्र और नरेन्द्र आर्मी में भर्ती हो गये और सुरेन्द्र नौकरी न मिलने से पिता के साथ खेती में हाथ बंटाने लगा। हाल में योगेन्द्र जम्मू के बारामुला सैक्टर व नरेन्द्र अखनूर सैक्टर में तैनात थे। सुरेन्द्र ने बताया कि 1 सितम्बर को आर्मी इंजीनियर में तैनात नरेन्द्र को जरूरी कार्य से गोवा भेजा गया। रास्ते में बुखार होने के कारण नरेन्द्र ने गोवा आर्मी यूनिट में रिपोर्ट की। बुखार अधिक होने के कारण उसे अगले दिन यूनिट के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अचानक अधिक बीमार होने पर नेवी के चार्टर प्लेन से उसे मुम्बई लाया गया, जहां पर उसे नेवी के अश्वनी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि स्वाईन फ्लू बुखार अत्याधिक हो गया है, जिसके चलते 14 सितम्बर की रात्रि 10 बजे नरेन्द्र ने अन्तिम सांस ली। गांव में सैनिक की मौत की सूचना मिलने पर पत्नी ममता और बच्चे लवी व नम्रता शव को देखते ही उससे लिपट गये। पिता हरिसिंह ने सैनिक बेटे की मौत पर सैल्यूट कर उसके सिर पर हाथ फेरा, तो दोनों भाईयों सुरेन्द्र व योगेन्द्र ताबूत में रखे भाई के शव को एकटक निहारते हुए रोते रहे। माता बीरमती और दादी मलखानी घर के आंगन से निकलकर गांव की गलियों में विलाप करते हुए लाडले नरेन्द्र को पुकार रही थी, जिनको समझाने के लिए महिलाएं हरसंभव प्रयास कर रही थी, लेकिन वह संभाले नहीं संभल रही थी। घर में जवान बेटे के शव को देखकर परिवार के सदस्यों की रोने चीखने की आवाजों से ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गई। हर कोई परिवार के दुख को बांटने की कोशिश में लगा था। सैनिक की इस मौत को लेकर गांव में चूल्हा नहीं जला। मौत के मौत के सन्नाटे के कारण गलियों में मातम पसरा रहा। मेरठ कैन्ट से शव लेकर आये कैप्टन एसीएच बरूआ, लैटिनेन्ट मुकेश कुमार, नितिन बिराज, ए मलिक, जवान विक्की, अरविन्द, मनोज, शान्तनु यादव, मोहित, रणजीत राणा, अशोेक आदि ने अन्तिम संस्कार के दौरान आर्मी के बिगुल ब्रास बैण्ड बजाकर व शस्त्रों को झुकाकर सलामी दी। वहीं जम्मू से आये आर्मी सिगनल कॉर्पस के सूबेदार राधेश्याम, हवलदार योगेन्द्र, नायक सुनील कुमार, सिग्नलमैन रोहित, हरिओम ने बताया कि नरेन्द्र अपनी ड्यूटी को मुश्तैदी के साथ करता था। व्यवहारकुशल होने के साथ-साथ वह देश कारगिल शहीदों को अपना आइडल मानता था। दोपहर बाद खेत में तैयार की गयी चिता पर बेटे लवी ने पिता को गंगाजल पिलाकर दाग लगाया। इस मौके पर आर्मी के आला अधिकारियों के साथ भाजपा नेता डॉ. वीरपाल निर्वाल, तहसीलदार मनोज कुमार, जिला पंचायत ज्ञानेन्द्र, प्रधान सतेन्द्र आदि ने पुष्प चक्र चढाकर सैल्यूट करते हुए हाथ जोडे। वहीं भाई सुरेन्द्र ने सैनिक नरेन्द्र की चिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर रालोद महिला प्रकोष्ठ की पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी रमा नागर, जिला सहकारी बैंक पूर्व चेयरमैन वंदना वर्मा, पूर्व विधायक मिथलेश पाल, चंदन चौहान, प्रहलाद चेयरमैन, डायरेक्टर अमित, अरूण कुमार, ब्रजपाल, प्रधान बबलू चौधरी, तेजपाल, गुड्डू, विनोद गुर्जर, पंकज महेश्वरी, भीम सिंह, डॉ. दिनेश धीमान, लेखपाल हितकर चौधरी आदि तथा गांव बेहडा सादात, चौरावाला, खरपौड, मीरावाला, मोरना, इलाबाहास, गंगदासपुर, ककरौली, नयागांव, खोकनी, निवादा, कैडी, कासमपुर खोला, मीरापुर, मवाना, रामराज, जानसठ, बरूकी, रसूलपुर, भोपा आदि गांवों से आए हजारों ग्रामीणों ने सैनिक को भावभीनी श्रद्धाजलि अर्पित की।

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