फास्ट ट्रेक कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला...पति के घर में ही मिला पत्नी को रहने का हक, गुजारा भत्ता भी मिलेगा

फास्ट ट्रेक कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला...पति के घर में ही मिला पत्नी को रहने का हक, गुजारा भत्ता भी मिलेगा

मुजफ्फरनगर। घरेलू हिंसा के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पीड़ित पत्नी को पति के घर पर रहने का अधिकार देने के साथ ही आरोपी पति को प्रतिमाह 10 हजार रुपये भरण पोषण के लिए देने और मुकदमे का खर्च दिये जाने के आदेश जारी किये हैं। इसके साथ ही पुलिस को पीड़िता की सुरक्षा करने को कहा है। कस्बा बुढ़ाना निवासी नेहा त्यागी की शादी पिछले दिनों गाजियाबाद निवासी अंकित त्यागी के साथ हुई थी। शादी के बाद नेहा ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कोतवाली बुढ़ाना में अपने पति व अन्य ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। इस मामले की सुनवाई जिला मुख्यालय पर पफास्ट ट्रैक कोर्ट में चली। इस मुकदमे में अधिवक्ता विनोद कुमार गुप्ता ने नेहा त्यागी का पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। श्री गुप्ता ने बताया कि न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को गम्भीरता से सुना और उसके उपरांत पीड़िता की शिकायत को सही मानते हुए अपना फैसला सुनाया है। पीड़िता ने अदालत से भरण पोषण, मुकदमा खर्च और पति के साथ ही रहने की व्यवस्था कराने का आग्रह न्यायालय से किया था। अधिवक्ता विनोद गुप्ता ने बताया कि नेहा का पति अंकित गांधीनगर में जीन्स बनाने का कारखाना चलाता है और आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम है। अंकित का डीडी 147 अवन्तिका गाजियाबाद में एक मकान है। इसमें नेहा भी सहभागीदार बनी है। इसी मकान में नेहा ने पति के साथ रहने की व्यवस्था के लिए अदालत से गुहार की थी। नेहा के पक्ष को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने उसके पति अंकित कुमार को आदेश दिये कि वो प्रतिमाह 10 हजार रुपये हर महीने की 10 तारीख तक पीड़िता को अदा करेगा। इसके साथ ही वाद व्यय के रूप में एकमुश्त 20 हजार रुपये भी अंकित द्वारा नेहा को दिये जायेंगे। अदालत ने नेहा की अपील को स्वीकार करते हुए डीडी 147 अवन्तिका गाजियाबाद स्थित मकान में उसके रहने के लिए बैडरूम, रसोई घर व लैट्रीन बाथरूम की व्यवस्था अंकित को करने के लिए कहा है। अदालत ने कविनगर गाजियाबाद थाना प्रभारी को भी आदेश दिये हैं कि वो नेहा को उक्त मकान में सुरक्षित छोड़कर आये। अंकित को आदेशित किया गया है कि वो किसी भी प्रकार से नेहा को मुकदमे की सुनवाई के दौरान दबाव में न लें। अदालत में इस मामले की सुनवाई 25 सितम्बर को नियत की गयी है। अंकित ने अदालत से नेहा को उसके साथ मकान में रहने की इजाजत नहीं देने की गुहार का अलग से किराये का मकान लेकर रहने का प्रस्ताव रखा था, जिसे अदालत से अस्वीकार कर दिया। अब नेहा कानूनी रूप से पुलिस की देखरेख में अंकित के मकान में ही अलग कमरे में रहेगी।

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