स्थायी लोक अदालत में जनता को मिलेगा शीघ्र न्यायः जेके तिवारी

स्थायी लोक अदालत में जनता को मिलेगा शीघ्र न्यायः जेके तिवारी

मुजफ्फरनगर। जिला जज (सेनि) चेयरमैन जेके तिवारी स्थायी लोक अदालत ने अपने पत्र 12 सितम्बर द्वारा अवगत कराया है कि स्थायी लोक अदालत, लोक उपयोगी सेवा के मामलो के शीघ्र निस्तारण के उद्देश्य हेतु विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22बी की उपधारा 1 के अन्तर्गत स्थापित की गयी। उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत का क्षेत्राधिकार एक करोड रूपये तक की समपत्ति के मूल्य के मामलों के निस्तारण तक है। उन्होंने सूचित किया है स्थायी लोक अदालत की प्रक्रिया सुगम एवं सहज है तथा स्थायी लोक अदालत सीपीसी एवं समानता अधिनियम के प्रावधानों से आबद्ध नहीं है, बल्कि स्थायी लोक अदालत की प्रक्रिया नैसर्गिक न्याय, निष्पक्षता व साम्य के सिद्धन्तों पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत का अभिनिर्णय अन्तिम होता है और वह किसी मूलवाद, आवेदन या निष्पादन कार्यवाही में प्रश्नगत नही होता।
चेयरमैन स्थायी लोक अदालत जनपद मुजफ्फरनगर ने अवगत कराया है कि स्थायी लोक अदालत का क्षेत्राधिकार लोक उपयोगी सेवा, वायु, सडक या जलमार्ग द्वारा यात्रियांे या माल के वहन के लिए यातायात सेवा तथा डाक, तार या टेलीफोन सेवा एवं किसी स्थापन द्वारा जनता को विद्युत, प्रकाश या जल का प्रदायः आदि लोक अदालत के क्षेत्राधिकार मंे आते है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक मल वहन या स्वच्छता प्रणाली एवं अस्पताल या औषद्यालय सेवा के अतिरिक्त बीमा सेवा, शैक्षिक या शैक्षणिक संस्थाओं तथा आवास और भू-संपदा सेवा का भी लोक अदालत के क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत आते है। श्री तिवारी ने बताया कि आर्थिक क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत ऐसे विवादग्रस्त सम्पत्ति का मूल्य एक करोड रूपये तक है वे भी स्थायी लोक अदालत की क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत आते है। उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत की प्रक्रिया नैसर्गिक न्याय, वस्तु-निष्ठता, निष्पक्षता, साम्या और न्याय के सिद्धन्तों पर आधारित होते है। उन्होंने बताया कि सीपीसी तथा भा. साक्ष्य अधिनियम की प्रक्रिया से स्थायी लोक अदालत आबद्ध नहीं होता। उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत का अभिनिर्णय अन्तिम होता है और किसी मूलवाद, आवेदन या निष्पादन कार्यवाही में प्रश्नगत नहीं है।

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