पालिका को शासन से मिला दो माह का समय....ओडीएफ न कर पाने पर अधिशासी अधिकारी को मिली कडी फटकार

पालिका को शासन से मिला दो माह का समय....ओडीएफ न कर पाने पर अधिशासी अधिकारी को मिली कडी फटकार

मुजफ्फरनगर। शहरी क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) कराने के लिए नगरपालिका की कार्यक्षमता को बेहद निम्न पाया गया है। डेढ़ साल में केवल 212 शौचालय ही निर्मित करा पाने पर पालिका ईओ को शासन की कड़ी नाराजगी का सामना करना पड़ा। अब दो माह में शत प्रतिशत ओडीएफ का प्रमाण पत्र हासिल करना पालिका प्रशासन के लिए चुनौती बना है। अभी 90 प्रतिशत कार्य शेष है। ऐसे में पालिका प्रशासन ने अपना सारा ध्यान ओडीएफ अभियान पर लगा दिया है।
केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्राथमिकता पर रखा गया। इसके लिए नगरीय और ग्रामीण इलाकों में शत प्रतिशत ओडीएफ के लिए समय सीमा निर्धरित कर दी गयी है। शहरी क्षेत्रों में पहले अक्टूबर 2017 तक यह लक्ष्य हासिल करना था, लेकिन शासन ने अब इसे आगे बढ़ा दिया है। नवंबर 2017 तक शहर को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य पालिका को दिया गया है। इसमें 30 नवंबर तक शहर में 3026 शौचालयों का निर्माण कार्य कराया जाना है। जिनमें से अभी तक मात्र 212 शौचालय ही निर्मित हो पाये हैं। ऐसे में करीब 90 प्रतिशत कार्य अभी शेष है।
4 सितंबर को लखनऊ में स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत नगरीय क्षेत्रों में शौचालय निर्माण की समीक्षा के लिए स्थानीय निकाय निदेशक के द्वारा बैठक आयोजित की गयी। इसमें ईओ विकास सैन और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरएस राठी ने भाग लिया। शहर में ओडीएफ कार्य निम्न पाये जाने पर गहरा असंतोष व्यक्त करने के साथ ही ईओ को कड़ी चेतावनी दी गयी। शहर को समयबद्धता में पूर्ण कराने के निर्देश दिये। डा. आरएस राठी ने बताया कि निदेशक के निर्देशों को लेकर पालिका में दो बार बैठक कर पर्यवेक्षकों व कर्मचारियों को अवगत करा दिया गया है। दिन रात इस कार्य को पूरा करना होगा। समय कम होने के कारण भी हमें पूरी मैन पावर के साथ काम करना है। इसके लिए जनता से भी सहयोग की अपेक्षा की गयी है। शहर को ओडीएफ न कर पाने के लिए ईओ विकास सैन को शासन के समक्ष शर्मिन्दा होना पड़ा। सूत्रों के अनुसार बैठक में उनसे निदेशक ने स्पष्टीकरण मांगा और उनके विरुद्ध आरोप पत्र निर्गत करने के लिए कहा। सख्त रवैया देखकर ईओ ने जल्द ही प्रगति आख्या प्रस्तुत करने का वादा कर अपनी जान बचाई। शहर को ओडीएपफ घोषित कराने के लिए पालिका के अफसरों व कर्मचारियों को अभी तक दैनिक रिपोर्ट देनी थी, लेकिन समयबद्धता के चलते शासन के निर्देश पर अब पालिका में कर्मचारियों को प्रति घंटे की प्रगति पर रिपोर्ट देनी होगी।

Share it
Top