एफआईआर हिटलरशाही का प्रतीकः ग्राम प्रधान...अपनी मांगों को लेकर प्रधानों ने दिया कलेक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरना

एफआईआर हिटलरशाही का प्रतीकः ग्राम प्रधान...अपनी मांगों को लेकर प्रधानों ने दिया कलेक्ट्रेट में अनिश्चितकालीन धरना

मुजफ्फरनगर। एक सितंबर को दिये गये धरने के बाद बात नहीं बनने पर ग्राम प्रधानों ने अपनी मांगें मनवाने तक कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ कर दिया। इस बार ग्राम प्रधान आरपार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे है। ओडीएफ करने के मामले में अनियमितता सामने आने पर ग्राम प्रधनों के खिलाफ की जा रही कार्यवाही को लेकर जिले के प्रधानों ने प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। धरने पर ग्राम सचिव व ग्राम विकास अधिकारी भी बैठे।
जिले के प्रधानों ने अखिल भारतीय प्रधान संगठन के आह्नान पर सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर अनिश्चितकालीन आंदोलन प्र्रारंभ कर दिया। सोमवार को अनिश्चितकालीन धरने की अध्यक्षता साल्हाखेडी के प्रधान सुरेंद्र और संचालन दानिश प्रधान पावटी व प्रमोद प्रधान सठेडी ने संयुक्त रूप से किया। धरने के दौरान प्रधानों ने जिला प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कई गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने शौचालय निर्माण के लिए चयनित पात्रा परिवारों में तथाकथित अनियमितता के आरोप में ग्राम पंचायत सोहंजनी जाटान के प्रधान सुनील कुमार और सचिव के खिलापफ एफआईआर दर्ज किये जाने के निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे हिटलरशाही बताया। प्रधानों ने कहा कि ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण में पात्रों के चयन व लाभार्थियों के फार्म भरवाने का कार्य जनपद स्तर से चयनित व प्रशिक्षित सीएलटीएस टीम के द्वारा किया गया है। इसमें प्रधान या सचिव के केवल शपथपत्र भरकर फार्मांे पर हस्ताक्षर करवाये गये हैं। इस कारण अपात्रों के चयन की कोई जिम्मेदारी प्रधान व सचिव की नहीं बनती है। प्रधानों ने उच्चाधिकारियों पर मानसिक शोषण करने का आरोप लगाया।
संगठन ने सोहंजनी जाटान प्रकरण में दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग की। शौचालय निर्माण की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सीएलटीएस को देने पर भी जोर दिया। प्रधानों ने प्रशासन पर आरोप लगाये कि ग्रामों में ठप पड़े विकास कार्यों को शुरू कराने के लिए कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। करीब एक साल से ग्रामों के लिए निर्माण सामग्री के रेट रिवाइज नहीं किये गये हैं। प्रधानों का कहना है कि कुटेशन पर न्यूनतम दर पर लाइटें लगवायी गयी हैं। इसी जांच अनुचित है। प्रधानों के खिलाफ शिकायत पर जांच को गलत बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता से शपथपत्र लेकर जांच हो, यदि झूठी शिकायत मिले, तो कानूनी कार्यवाही की जाये। धरने पर प्रधानों ने पीएम आवास योजना में लाभार्थी के चयन का अधिकार प्रधान या सचिव को देने, राशन कार्डों की पात्राता का चयन शीघ्र कराने, मनरेगा के कार्यों का पैसा खातों में शीघ्र भिजवाने की मांग की। प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष सतेंद्र बालियान बरवाला ने कहा कि यदि उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। धरने पर मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष सतेंद्र बालियान, शौकिंद्र-दूधाहेड़ी, प्रमोद-सठेड़ी, रविकांत-सिकंदरपुर, सतेंद्र-लौहड्डा, दानिश-पावटी, भूपेंद्र आर्य निरमाना, राजपाल सैनी-रामपुर, जाकिर-छपार, फजरू-तुरहेड़ी, देवेंद्र-जागाहेड़ी, सतेंद्र-बरवाला, विजय-आखलौर, विनोद-बामनहेड़ी, मनोज-मुकंदपुर, हाजी महबूब-किथौड़ा, चंद्रवीर राठी-बहेड़ाखुर्द, मुस्तफा-सैदनंगला, देवंेद्र-किनौनी, विनित-काजीखेड़ा, जगपाल गुर्जर बरूकी, सतेंद्र कुमार खांजापुर, नवीन राठी भूराहेडी, नरपत तेजलहेडा, बिल्लू धनसैनी, देवेंद्र किनौनी, धर्मपाल गोयला, बबलू मिंडकली, रवि प्रधान, शहजाद मोरना, विदुर मोहन, सहित सैंकड़ों प्रधान शामिल रहे।

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