पुरकाजी खादर क्षेत्र में हुई बाढ जैसी स्थिति

पुरकाजी खादर क्षेत्र में हुई बाढ जैसी स्थिति

पुरकाजी। पुरकाजी के खादर क्षेत्र में उत्तराखण्ड की शिवालिक पहाड़ियों से आए पानी से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। खादर के दो दर्जन गांव पानी से प्रभावित हो गए। खादर में पानी का बहाव तीनों तक पहाडों पर हुई तेज वर्षा का सीधा असर पुरकाजी के खादर क्षेत्रा में पड़ा। परिणाम यह हुआ कि पानी ग्रामीणोे के घरों के अंदर तक घुस गया और और ग्रामीणों के सामने रोजी रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई। ग्रामीणों ने पानी के भय के कारण अपने घरों की छतों पर बैठकर रात गुजारनी पड़ी। हद तो तब हो गई जब पानी के कारण मकानों ने भी साथ छोड़ दिया ओर एक ग्रामीण के मकान की दीवार पानी के कारण नीचे गिर गई। बेबस ग्रामीणों ने पडौसी की छत पर बैठकर पूरे परिवार के साथ अंधेरे में रात गुजारी। बाढ़ के पानी से शेरपुर खादर, अलमावाला, आलमपुरा, चमरावाला, चानचक, भदौला, भदौली, रामनगर, बढ़ीवाला, भैंसलीवाला समेत दो दर्जन गांव प्रभावित होते है। रात्रि में बाढ का पानी बढ़ता रहा, लेकिन दिन निकलते-निकलते गांव से उतरने लगा था, लेकिन हाईवे ओर तीनों रपटों पर वाहनों की ऐसी स्थिति नहीं बना पाई थी कि वाहन गुजर सके। ग्रामीणों के सामने हाईवे से गुजरने का तरीका टैªक्टर आदि से ही था। प्रशासन द्वारा नाव की व्यवस्था भी नहीं की गई है, लेकिन नाविक भी ग्रामीणों को नदी पार कराने में आना-कानी करते है। ग्रामीण सरदार बलवंत सिंह, प्रिंस त्यागी, चन्द्रबोस, डा. राजेन्द्र सिंह, विक्की, डा. बचन ंिसह ने बताया कि प्रतिवर्ष खादर क्षेत्रा में घुसने से खादर के दो दर्जनो गांव प्रभावित होते है और सैंकड़ों किसानों की हजारों बीघा भूमि जलमग्न हो जाती है, जिससे किसानों को करोड़ो रूपए की हानि होती है और लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा होता है। ग्रामीणों ने बताया कि शेरपुर गांव के अंदर पहले पानी भरता था, लेकिन अब पानी शेरपुर गांव में भी घुस जाता है। खादर में बाढ की समस्या ऐसी पैदा हो गई है, जिसका किसी भी प्रशासन के पास कोई उपाए नहीं है। हालाकि पुरकाजी विधान सभा के भाजपा विधायक प्रमोद उटवाल ने खादर में बांध का प्रस्ताव पास कराया है। आशा है कि बांध का कार्य खादर में शुरू हो जाएगा। खादर में बांध बनने के बार कुछ हद तक बाढ के पानी की समस्या से छुट्टी मिल सकेगी, लेकिन देखना है कि कब तक खादर में बांध बनता और ग्रामीणों की समस्या कब तक हल होती है।
खादर में पानी आ जाने के बाद ग्रामीणों ने अपने सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना शुरू कर दिया है। लोगों के सामने बड़ी समस्या सिर छिपाने की जगह व अपने सामान को सुरक्षित पहंुचाना होती है। लोगों ने मांग रखी कि उत्तराखण्ड़ से जो पानी खादर में छोड़ा जाता है वह एक साथ न छोडा जाए। धीरे-धीरे पानी खादर में आने से बाढ की स्थिति नहीं बन पाएगी और ग्रामीण भी उससे पुख्ता इंतजाम को तैयार रहेंगे।
ग्रामीणों ने माना कि बढीवाला का पुल सोलानी नदी पर स्थित है। पुल के चारों ओर गंदगी व मलबा पफैल गया है, जिससे पानी पुल के अंदर से नहीं निकल पाता है। पानी को जगह नहीं मिलने के बाद पानी दुसरी जगह से रास्ता बनाता है और पानी आसपास के गांवों की ओर भागने लगता है, जिससे बाढ़ की स्थिति बनने लगती है और पानी रपटे से गुजकर अपना दूसरा ठिकाना खोजता है।

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