सीएम की स्थानांतरण नीति की ईओ कर रहे अलग व्याख्या

सीएम की स्थानांतरण नीति की ईओ कर रहे अलग व्याख्या

मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी के आदेश नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर के अधिशासी अधिकारी के लिए कोई मायने नहीं रखते। यह उनकी कार्यप्रणाली से पूरी तरह से स्पष्ट हो रहा है। वह बाबुओं के स्थानांतरण एक साथ न करके किस्तों में कर रहे हैं और जो तर्क दे रहे हैं, वह गले नहीं उतर रहा है। वह स्थानांतरण नीति अर्थात आदेश की अलग ही व्याख्या कर रहे हैं। जिसके चलते उन पर अपने चेहतों को लाभ पहुंचाने तक के आरोप भी लग रहे हैं। हाल ही में उनके द्वारा कुछ बाबुओं के स्थानांतरण किये गये थे, जिसे लेकर भी उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये गये थे। प्रदेश के मुख्यमंत्राी की स्थानांतरण नीति को लेकर जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी के द्वारा जनपद के सभी विभागों के उच्चाधिकारियों को यह आदेश दिया गया था कि उनके अधिनस्थ बाबू जो कि एक ही पटल पर तीन साल से अधिक समय से मठाधीश बने जमे हुए हैं, उनका तत्काल प्र्रभाव से पटल बदली किया जाए। जिसके चलते जिलाधिकारी के आदेश का कई विभागों के द्वारा तुरंत ही पालन किया गया। जिलाधिकारी के द्वारा दिये गये आदेश को लेकर नगर पालिका परिषद के अधिशीसी अधिकारी विकास सैन अलग ही व्याख्या कर रहे हैं। उन्होंने अन्य विभागों की तरह तीन साल से एक ही पटल पर जमे बाबुओं के स्थानांतरण न करके वह किस्तों में कर रहे हैं। उन्होंने शनिवार को तीन बाबुओं के स्थानांतरण किये थे। जिसमें उन पर अपने चेहते बाबुओं को अभयदान देते हुए उन्हें बचाने का आरोप भी लगाया था पालिका के कुछ कर्मचारियों के द्वारा। सूत्रों के अनुसार जिन चेहते बाबुओं को बचाया जा रहा है। उनमें मुख्य विभाग लेखा विभाग शामिल है। इसमें तीन बाबुओं के द्वारा तीन साल से अधिक समय हो गया कार्य करते हुए। उनका पटल न बदला भी सवालों के घेरे में हैं। उनका कहना था कि यहां पर विजय जैन जो कि लेखा लिपिक के पद पर अपनी ज्वाइनिंग के समय से ही हैं। इसके अलावा पिफरोज खां भी ज्वाइन के समय से ही कार्यरत है लगभग 15 साल से अधिक बताया गया है। इसके साथ ही नीरज सिंघल को भी इतना ही समय हो गया है। इसके साथ ही तनवीर आलम जिनके पास कंपनी बाग सहित रिकॉर्ड का चार्ज कई सालों से है। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग में राजेंद्र सिंह, विवेक व मोतीराम शामिल हैं। वह कई सालों से एक ही पटल पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही मैनपाल भी कापफी समय से एक ही पटल पर कार्यरत है। लेखा विभाग के बाबुओं को नहीं बदलने को लेकर ईओ विकास सैन का जो कहना था, वह गले नहीं उतर रहा। वह अलग ही स्थानांतरण नीति की व्याख्या कर रहे है। उनका कहना था कि आवश्यकता पड़ने पर किये जाएंगे। इसमें केवल बीस प्रतिशत के ही स्थानंातरण करने हैं। एक साथ पटल बदलने से व्यवस्था बिगड़ सकती है। लेखा विभाग के बाबुओं को वैसे ही अंगद का पैर बताया जाता रहा है, लेकिन ईओे की कार्यप्रणाली ने उनके पैरों को और मजबूत कर दिया है। सूत्रों की माने, तो लेखा विभाग की त्रिमूर्ति का स्थानांतरण न करने के पीछे की मुख्य वजह पालिका के निर्माण विभाग में भुगतान को तैयार 24 करोड़ रुपये की निर्माण पत्रावलियां हैं। इनमें मिलने वाले कमीशन का हिसाब किताब इनमें से एक विजय जैन रखता है। जिसके हटने से कमीशन का खेल बिगड़ सकता है। यही वजह उनके स्थानांतरण अर्थात पटल न बदलने की मानी जा रही है। बाबुओं के पटल बदलने को लेकर जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश हैं कि हर हाल में तीन साल से एक ही पटल पर कार्यरत बाबुओं के पटल को बदला जाए।
गौरतलब है कि 19 अगस्त को रेल हादसे वाले दिन नगर पालिका में कुछ लिपिकों पर तबादले का बम गिराया गया। इनमें निर्माण विभाग में कार्यरत संजय कुमार गुप्ता को नपा कन्या इंटर कालेज, टैक्स विभाग से प्रवीण कुमार को नपा कन्या इंटर कालेज, सुनील कुमार व मनोज पाल को टाउनहाल में मुख्य कार्यालय से अटैच किया गया था। 26 अगस्त को ईओ ने निर्माण विभाग में ओमवीर सिंह को टैक्स, यहीं से बिजेंद्र सिंह को जलकल भेजा, जबकि मनोज बालियान को टैक्स से निर्माण विभाग में भेेजा था।

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