बीस साल से मलाई के पद पर काबिज बाबू को हटाया

बीस साल से मलाई के पद पर काबिज बाबू को हटाया

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद मुजफ्फरनगर के अधिशासी अभियंता ने जिलाधिकारी के आदेश के तहत पालिका में तीन साल से एक ही पटल पर जमेे बाबुओं में से तीन का तबादला दूसरे पटल पर कर दिया। इनमें एक बाबू लगभग 20 साल से एक ही मलाईदार पटल पर जमा हुआ था। जो कि अपने स्थानांतरण रूकवाने को लेकर ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। ईओ के द्वारा बाबुओं के फांटे गये पत्तों के चलते अन्य कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
14वें वित्त आयोग से प्राप्त 19 करोड़ रुपये की धनराशि से निर्माण कार्य सम्पादित होने जा रहे हैं। ऐसे में सात बाबुआंे के स्थानांतरण को लेकर भूचाल सा आ गया है। सर्वाधिक विवाद निर्माण और टैक्स विभाग के बाबुओं का पटल बदलने को लेकर हो रहा है। कहने को यह बदलाव शासन की तय तबादला नीति के तहत किया गया है, लेकिन इसी नीति के तहत जद में आ रहे कुछ अन्य बाबुओं को अभयदान दिया जाना ही पालिका में सियासी संग्राम को जन्म दे रहा है। स्थानांतरण किये गये अध्किांश बाबुओं ने अपना पटल नहीं छोड़ा है।
नगरपालिका परिषद में इन दिनों अगस्त क्रांति जैसे हालात नजर आ रहे हैं। पालिका के प्रभावी व ताकतवर समझे जाने वाले कुछ लिपिकों को भी इस तबादले का शिकार बनाया गया है। 19 अगस्त को पालिका में भी कुछ लिपिकों का स्थानांतरण किया गया था। इनमें निर्माण विभाग में कार्यरत संजय कुमार गुप्ता को नगरपालिका कन्या इंटर कालेज, टैक्स विभाग से प्रवीण कुमार को नगर पालिका कन्या इंटर कालेज स्थानांतरित किया गया। इसके अलावा कालेज में कार्यरत सुनील कुमार व मनोज पाल को टाउनहाल में मुख्य कार्यालय से अटैच किया गया। 26 अगस्त को अ.अ. विकास सैन ने तीन बाबुओं के स्थानांतरण किये। जिसमें निर्माण विभाग में ओमवीर सिंह को कर विभाग, निर्माण के ही बाबू बिजेंद्र सिंह को जलकल विभाग में भेजा गया, इसके साथ ही मनोज बालियान को कर विभाग से निर्माण विभाग में भेजा गया। ईओ के इन्हीं आदेशों ने पालिका में नया भूचाल सा ला दिया है। इसके साथ ही एक प्रकार से राजनीति भी प्रारंभ हो गयी है। इसमें निर्माण विभाग जैसे मलाईदार विभाग से जलकल विभाग में भेजे गये बिजेंद्र सिंह अपना स्थानांतरण रूकवाने को ऐड़ी चोटी का जोर लगाते हुए सिफारिश लगवाने को लेकर नेताओं की घर की परिक्रमा कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना था कि इसका मुख्य कारण ठेकेदारों के द्वारा मिलने वाले मोटे कमीशन को बताया गया है। वह इसे अपने हाथ से नहीं जाना देना चाहते हैं। वहीं दूसरी ओर पालिका के अधिशासी अधिकारी विकास सैन अपने आदेशों का पालन कराने को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं।

Share it
Top