प्लेटफार्म दो पर मेन लाइन पर निकली मिली क्लिपें

प्लेटफार्म दो पर मेन लाइन पर निकली मिली क्लिपें

मुजफ्फरनगर। खतौली के उत्कल हादसे को अभी लोग भूले भी नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर रेलवे का एक महत्वपूर्ण विभाग रेल पथ विभाग अपनी कार्यप्रणाली को लेकर एक नये हादसे को न्यौता देते प्रतीत हो रहा है। इस विभाग की लापरवाही खतौली में हादसे के दूसरे दिन भी सामने आयी थी। इस विभाग की एक ओर लापरवाही 23 अगस्त को भी देखने को मिली थी। गली नंबर चौदह के पास मेन लाइन पर हरिद्वार की ओर क्लिपें गायब, हटी या निकली मिली थीं। इसके बाद शु़क्रवार को मुजफ्फरनगर के रेलवे स्टेशन पर मेन लाइन पर भी इसी प्रकार का नजारा सामने आया।
रेलवे में पथ की देखभाल को लेकर एक अलग विभाग को जिम्मेदारी दी गयी है, जिसे रेल पथ निरीक्षक विभाग (पीडब्ल्यूआई) कहा जाता है। इसकी जिम्मेदारी ट्रेैक की देखभाल की होती है। लगता है रेलवे का यह खास विभाग कुभकर्णी नींद सोया हुआ है। यह खतौली के उत्कल एक्सप्रेेस हादसे के बाद शायद किसी बड़े हादसे की प्रतीक्षा कर रहा है। इसी के चलते यह मौत का ट्रैक बिछा रहा है। होना तो यह चाहिए था कि उत्कल हादसे के बाद खतौली सहित आसपास के ट्रैक को चैक किया जाता, लेकिन नहीं किया गया। जिसके चलते हादसे के दूसरे दिन स्थानीय लोगों के द्वारा ट्रैक पर निकली मिली क्लिपों को देखकर हंगामा करते हुए नौचंदी एक्सप्रेस का रूकवा दिया गया था। इस पीडब्ल्यूआई विभाग की जिम्मेदारी सकौती से लेकर टपरी तक की है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली को देखते हुए व अनेक स्थानों पर ट्रैक पर से गायब, निकली व हटी पड़ी क्लिपें इस विभाग की अपने कार्य के प्रति लापरवाही की गवाही दे रही हैं।
पीडब्ल्यूआई का मुख्य कार्यालय मुजफ्रपफरनगर स्टेशन पर है। यह विभाग अपने मुख्यालय के पास ही अपने कार्य को सही प्रकार से अंजाम नहीं दे पाया, तो अन्य स्थान पर क्या करता होगा। शुक्रवार को स्टेशन पर मेन लाइन पर टिकटघर के सामने कुछ लाइन को जकड़े रहने वाली क्लिपें निकली मिलीं। जब इस बारे में स्टेशन अधीक्षक से पूछा गया, तो उनका कहना था इसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं है, यह रेल पथ विभाग का कार्य है। जब इस बारे में इस विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों से जानने चाह गया, तो वह नहीं मिल सके।
गौरतलब है कि 23 अगस्त को रेलवे स्टेशन से मात्रा 500 मीटर की दूरी पर हरिद्वार की ओर गली नंबर 14 के पास कुछ क्लिपें गायब मिली थीं, कुछ हटी हुई थीं तथा कुछ हिली हुई थीं। एक स्थानीय निवासी के द्वारा ट्रैक चैक करने वालों को इसकी सूचना दी गयी थी। जिस समय वह इसे सही कर रहे थे, ठीक उसी समय पर बांद्रा-देहरादून आ गयी थी। इस विभाग के द्वारा यहां पर भी लापरवाही दिखायी गयी, उन्होंने ट्रैन चालक को किसी प्रकार ेका संकेत ध्ीरे से चलने का नहीं किया। यह विभाग ट्रैक चैक न करने को हल्के में ले रहा है। यह लापरवाही किसी दिन एक बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। इस बात को लेकर किसी प्रकार की अतिश्योक्ति नहीं है।

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