बाल-बाल बची उत्कल, शालीमार व बांद्रा एक्सप्रेस...हादसों को जन्म दे रहे रेलवे कर्मचारी, बुधवार को असुरक्षित पटरी से गुजरी ट्रेनें

बाल-बाल बची उत्कल, शालीमार व बांद्रा एक्सप्रेस...हादसों को जन्म दे रहे रेलवे कर्मचारी, बुधवार को असुरक्षित पटरी से गुजरी ट्रेनें

सत्येन्द्र सिंह उज्जवल
मुजफ्फरनगर। खतौली के उत्कल एक्सप्रेस के हादसे हो हुए जुमा-जुमा चार दिन ही हुए हैं, लेकिन इस पश्चिम उत्तर प्रदेश के अत्यंत ही बड़े हादसे से न तो रेलवे के अधिकारियों के द्वारा कोई सबक ही लिया गया प्रतीत होता है न ही उनके अधिनस्थ कर्मचारियों के द्वारा। रेलवे के छोटे अधिकारी व कर्मचारी अपने कार्य में लापरवाही बरतते हुए यात्रियों के लिए मौत का ट्रैक तैयार कर रहे हैं खतौली के उत्कल हादसे जैसा। इसकी बानगी घटना के दूसरे दिन खतौली में ही हादसे के पास ही मुश्किल से सौ मीटर के आसपास पुल के पास देखने को मिली थी, जहां पर पटरी पर से क्लिपें निकली मिली थीं और यात्रियों ने शोर कर नौचंदी को रूकवा कर धीरे-धीरे निकलवाया था। रेलवे के कर्मचारी यात्रियों के लिए एक प्रकार से मौत का ट्रैक तैयार कर रहे हैं। इसका उदाहरण बुधवार को मुजफ्फरनगर के रेलवे स्टेशन से मात्रा लगभग पांच सौ मीटर पर हरिद्वार की ओर देखने को मिला। जहां पर पटरी असुरक्षित पायी गयी। वहां पर आसपास पटरी को जोड़ने अर्थात इधर-उधर न सरकने देने वाली क्लिपें निकली पड़ी थीं, कुछ ढीली थीं तथा कुछ गायब थीं। जो कि एक बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। यहां पर से प्रातः को एक दर्जन के करीब लंबी दूरी की ट्रेनें गुजरीं। जिसमें हरिद्वार-पुरी (उत्कल), शालीमार, जनशताब्दी, बांद्रा-देहरादून मुख्य हैं।
रेलवे विभाग में रेलवे ट्रैक की देखभाल की जिम्मेदारी रेलवे के पथ निरीक्षक विभाग की होती है। इसके लिए बाकायदा क्षेत्र तय किया गया होता है। खतौली में शनिवार हो हुआ उत्कल हादसा भी रेलवे के पथ निरीक्षक विभाग की लापरवाही का ही परिणाम था। इस हादसे में दो दर्जन जिंदगियां इस संसार से अलविदा कह गयीं। साथ ही दोै सौ अधिक घायल हुए। इस घटना से न तो रेलवे के उच्चाधिकारियों ने कोई सबक लिया और न ही उनके अधिनस्थ कर्मचारियों ने। इसका उदाहरण सोमवार को शाम के समय खतौली में उत्कल हादसे से मात्र सौ मीटर की दूसरी पर नौचंदी को स्थानीय लोगों के द्वारा हंगामा करके रोकना था, क्यांेकि वहां पर पटरी पर से क्लिपें हटी हुई मिलीं। जो कि एक बड़े हादसे को जन्म दे सकती थीं। होना तो यह चाहिए था कि उत्कल हादसे के बाद पूरे क्षेत्रा सहित आसपास के ट्रैक को अच्छी प्रकार से चैक किया जाता, लेकिन नहीं किया। यह घटना रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही को ही उजागर करती है। यदि चैक किया गया होता, तो पुल के पास क्लिपें नहीं निकली हुई मिली होतीं।
खतौली का उत्कल एक्सप्रेस जैसा हादसा मुजफ्फरनगर में भी बुधवार को देखने को मिल सकता था। अंतर यह होता कि खतौली में उत्कल गाड़ी संख्या 18477 थी और मुजफ्रपफरनगर में उत्कल गाड़ी संख्या 18478 होती। या इसके साथ ही बांद्रा-देहरादून भी हो सकती थी। बुधवार को प्रातः को सैंकडों जिंदगियों को लेकर लगभग एक दर्जन के करीब गाड़ियां असुरक्षित ट्रैक पर से सरपट गुजरीं। जिसमंे अधिकतर लंबी दूरी की गाड़ियां थीं। खतौली के उत्कल हादसे से खतौली क्षेत्र के अधिकारियों सहित गैंगमैनों ने किसी प्रकार सबक नहीं लिया। इसके साथ ही मुजफ्फरनगर के पथ की देखरेख करने वाले अधिकारियों व गैंगमैनों ने भी किसी प्रकार सबक नहीं लिया। इसकी बानगी उस समय प्रातः साढ़े दस बजे के आसपास देखने को मिली, जब स्टेशन से मात्र मुश्किल से पांच सौ मीटर पर हरिद्वार के ओर गली नंबर चौदह से थोड़ा आगे पटरी पर से पटरी को बांधे रखने वाली क्लिपें कुछ गायब थीं, कुछ निकली पड़ी थीं तथा कुछ हल्की अटकी पड़ी थीं। यहां पर भी उत्कल हादसे के बाद ट्रैक को चार दिन बाद भी चैक नहीं किया गया। जब चैक करने निकले, तो उसमें भी घोर लापरवाही बरती। ट्रैक को चैक करने निकली टीम का नेतृत्व सीनियर सैक्शन रेडिनशिप (यूएसएफडी) किरणपाल कर रहे थे। वहां पर उनकी मशीन खराब हो गयी। उन्हें पता भी नहीं था कि उनके आसपास ऐसा भी है। एक स्थानीय निवासी वहां पर आया और उन्हें देखते हुए क्लिपों के बारे में बताया। जब उन्हें व साथ कार्य रहे कर्मचारियों को निकली, गायब क्लिपों के बारे में पता चला, तो उनमें हड़कंप मच गया। जब तक वह उसे सही कराते सामने से अप बांद्रा-देहरादून ट्रेन आ गयी। यहां पर उक्त कर्मचारियों की लापरवाही एक बार उजागर हुई, उन्होंने ट्रैन चालक को किसी प्रकार का इशारा नहीं किया, ताकि वह ट्रैन को धीरे से निकाल सके।
इससे पहले कई महत्वर्पूण ट्रेनें जिसमें उत्कल डाउन भी शामिल है। इस असुरक्षित ट्रैक से गुजरी थीं। इसके अलावा गुजरने वाली अन्य ट्रेनें गाड़ी संख्या 12904 गोल्डन टैम्पिल एक्सप्रेस, गाड़ी संख्या 14646 शालीमार, गाड़ी संख्या 12056 जनशताब्दी, गाड़ी संख्या 14682 सुपर, गाड़ी संख्या 54474 सहारनपुर-दिल्ली पैसंेजर, गाड़ी संख्या 64558, 64560 व 64562 (सभी पैसंेजर), गाड़ी संख्या 19031 अहमदाबाद-हरिद्वार, गाड़ी संख्या 12017 शताब्दी एक्सप्रेस, गाड़ी संख्या 19019 बांद्रा-देहरादून, गाड़ी संख्या54541, 54539 (दोनों पैसंेजर) शामिल रहीं। बाद में क्लिपों को सही कराया गया। एक व्यक्ति की सूझबूझ ने कई जिंदगियों को संसार से अलविदा होने से बचा लिया।

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