मुजफ्फरनगर के खतौली में उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटना का मामला...मानवीय चूक से हुआ हादसा

मुजफ्फरनगर के खतौली में उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटना का मामला...मानवीय चूक से हुआ हादसा

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के खतौली कस्बे के पास पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटना के कारणों में 'काशन बोर्ड' का संज्ञान नहीं लिया जाना एक बड़ी चूक मानी जा रही है। इस दुर्घटना में 23 यात्रियों के मरने की पुष्टि हुई है। हालांकि एक यात्री के मेरठ अस्पताल में आज सुबह मृत्यु की सूचना मिली है। हादसे में 400 यात्री घायल हुए हैं। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) का दावा है कि दुर्घटनास्थल पर रेल पटरी की मरम्मत का काम चल रहा था। मरम्मत के समय रेलगाडिय़ों की रफ्तार उस स्थान पर धीमी हो जाती है, लेकिन कल दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन की रफ्तार 105 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले उसी पटरी से दो रेलगाडिय़ां गुजरी थीं, लेकिन उनकी रफ्तार धीमी थी। इस बाबत अपर पुलिस महानिदेशक बी.के. मौर्य ने कहा कि पटरी की मरम्मत का कार्य चल रहा था। ट्रेन की रफ्तार धीमी होनी चाहिये थी, लेकिन उसकी स्पीड में कोई कमी नहीं थी। उनका कहना था कि मरम्मत कार्य में लगे रेलकर्मी या तो काशन बोर्ड लगाना भूल गये या ड्राइवर बोर्ड को देख नहीं सका। दोनों ही स्थिति भयावह है और परिणाम सबके सामने है। श्री मौर्य ने बताया कि दुर्घटना के सम्बन्ध में मुजफ्फरनगर जीआरपी थाने में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच शुरु कर दी गई है। काशन बोर्ड का संज्ञान नहीं लिया जाना भी जांच के दायरे में है। जांच कर पता लगाया जायेगा कि मरम्मत कर रहे रेलकर्मी काशन बोर्ड लगाना भूल गये थे या चालक ने उसकी अनदेखी की। उन्होंने बताया कि जांच के दायरे में पटरी की स्थिति को भी ध्यान में रखा जायेगा। कई लोगों का कहना है कि पटरी कमजोर थी और उसके फ्रैक्चर होने की वजह से भी यह हादसा हो सकता है। रेल लाइन कस्बे के बीच में होने की वजह से आसपास के घरों और एक स्कूल में दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन के डिब्बे घुस गये थे। गौरतलब है कि गत 11 जून को उसी स्थान पर स्कूल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की सजगता से बडा रेल हादसा टल गया था। कर्मचारी ने रेल पटरियों में फ्रैक्चर देखा और लाल साडी दिखाकर ट्रेन को रुकवा दिया था। घटनास्थल पर कल से यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है। इस बीच मंडलीय रेल प्रबंधक ने बताया कि आज देर रात तक रेल यातायात सामान्य होने की संभावना है। उनका कहना था कि रात आठ बजे तक क्षतिग्रस्त पटरियों को ठीक कर लिया जायेगा, लेकिन देर रात तक ही यातायात सामान्य होने का अनुमान है। दुर्घटना की जांच जीआरपी के साथ ही रेल संरक्षा आयुक्त भी कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने अब तक 2० शवों का पोस्टमार्टम करा दिया है। मृतकों में 13 की पहचान कर ली गयी है। शेष की पहचान करने के प्रयास किये जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतक आश्रितों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद की घोषणा की है, जबकि रेलवे ने मृतकों के परिजनों को साढे तीन-तीन लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उडीसा सरकार ने मृतक आश्रितों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान कल ही कर दिया था। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना और गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा ने मेरठ मेडिकल कालेज जाकर घायलों के हालात जाने। उन्हें ढांढस बंधाया और उनकी चिकित्सा के बारे में जानकारी हासिल की। हादसा इतना भीषण था कि बचाव और राहत कार्य अभी भी जारी है। क्षतिग्रस्त डिब्बों को हटाया जा रहा है। डिब्बों के हटाने के साथ ही पटरियों की मरम्मत का काम किया जा रहा है। दुर्घटना के थोडी देर बाद ही मेरठ और मुजफ्फरनगर से चिकित्सकों का दल मौके पर पहुंच गया था। रिलीफ ट्रेन मौकेे पर पहुंच गयी थी। मेरठ मण्डल के सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों को एलर्ट कर दिया गया था। इस दुर्घटना की वजह से दिल्ली-देहरादून रेलमार्ग बाधित है। रेलगाडिय़ों के मार्ग परिवर्तित कर शामली और मुरादाबाद होकर भेजा जा रहा है। शताब्दी समेत कई गाडिय़ां रद्द की गयीं हैं। दुर्घटना की वजह से खतौली और उसके आसपास के क्षेत्रों में हा-हाकार मच गया था। हादसे में घायल लोगों को सरकारी प्राईवेट अस्पतालों में मुजफ्फरनगर, मेरठ व खतौली में भर्ती कराया गया। रात्रि की वजह से राहत एवं बचाव कार्य में बाधा आ रही थी लेकिन स्थानीय निवासियों और पुलिस की मदद से डिब्बों में फंसे यात्रियों को निकाला जा रहा था। एनडीआरएफ के जवान ताबड़तोड़ मेहनत कर स्थानीय नागरिकों की मदद से डिब्बे में फंसे हताहत लोगों को निकाल रहे थे। एक जवान के अनुसार बीच-बीच में चीख पुकार के साथ बचाओ बचाओ की आवाज भी सुनाई दे रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रशासन के पहुंचने के पहले स्थानीय नागरिकों ने यात्रियों की मदद करनी शुरु कर दी थी। कुछ स्थानीय लोग अपनी निजी गाडिय़ों से घायलों को अस्पताल ले जाते देखे गये। हालांकि, थोड़ी देर बाद कई सरकारी एम्बुलेंस भी पहुंच गयी थी। इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवादी निरोधक दस्ते (एटीएस) को भी जांच में लगाया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार घटना में आतंकियों के हाथ होने की आशंका नहीं है फिर भी एहतियात के तौर पर एटीएस से भी जांच कराने का निर्णय लिया गया है।

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