मुजफ्फरनगर: गर्मी ने फिर किया रौद्र रूप अख्तियार

मुजफ्फरनगर: गर्मी ने फिर किया रौद्र रूप अख्तियार

मुजफ्फरनगर। वर्तमान समय में गर्मी अपने चरम पर जारी है। यह धीरे-धीरे अपना और भी रौद्र रूप अख्तियार करती जा रही है। भीषण गर्मी के चलते जहां आमजन प्रभावित हो रहा है, वहीं जानवर आदि भी प्रभावित हो रहे हैं। इस पड़ रही भीषण गर्मी में जहां अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री पहुंच गया है और न्यूनतम तापमान 23.3 तक आ गया है। वर्तमान समय में इसके कम होने के अवसर कम ही नजर आ रहे हैं। इससे आमजन पूरी तरह से त्रस्त नजर आ रहा है। मनुष्य तो क्या पशु-पक्षी आदि भी आग की भांति बरस रही गर्मी से बचाव के तरीके खोज रहे हैं।
इस गर्मी के मौसम में मनुष्य सहित जानवर व पक्षी आदि भी जिस चीज को सबसे अध्कि खोजते हैं, वह है पानी तथा ठंडी छांव। बड़ों की तो बात क्या करें, युवा भी कुछ ही दूरी चलने पर गर्मी को सहन नहीं कर पा रहे हैं। वह भी चार कदम चल कर हांफ जाते हैं। सभी ठंडी छांव की तलाश में रहते हैं। यदि किसी को पास में बह रही नदी, नहर या तालाब आदि मिल जाए, तो क्या बात। इस मौसम में युवा व बच्चे तो जहा भी मौका मिला पानी से अपने को तर करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। कस्बा मंसूरपुर क्षेत्रांतर्गत आने वाले गांव नरा जडौदा निवासी मनोज कुमार का कहना था कि पड़ रही गर्मी से बचाव के लिए जब भी मौका मिलता है दोपहर में वह पास में बह रहे बड़े राजवाहे में खुद को नहीं रोक पाते हैं। इसके बाद वह पास ही स्थित आम के बाग में अपने साथियों सहित आराम करते हैं। उसके बाद खेती आदि का कार्य किया जाता है। ऐसा नहीं है कि वह अकेली ही नहाते हैं, उनके साथ उनके साथी भी राजवाहे में जमकर मस्ती करते हैं। इसके साथ ही बच्चे भी कहां पीछे रहते हैं। उन्हें जब भी सुबह हो या शाम मौका मिलता है, तो वह समरसेविल आदि का प्रयोग करके खुद को पानी से साराबोर कर लेते हैं। एक छोटे से बच्चे युग व आकांक्षा का कहना था कि उन्हें गर्मी के मौसम में इस प्रकार से समरसेविल चलाकर पाईप द्वारा नहाना इस मौसम में बड़ा ही अच्छा लगता है। इससे कुछ समय के लिए तो गर्मी से निजात मिल ही जाती है। वह राजवाहे, नहर या तालाब आदि में तो नहीं नहा सकते हैं। ऐसा नहीं हैं कि बच्चे प्रातः की दिनचर्या में नहीं नहाते हैं, नहाते तो हैं, लेकिन क्या करें पड़ रही इस प्रचंड गर्मी में जितनी बार भी नहाया जाए कम ही है। वहीं दूसरी ओर युवतियां व महिलाओं ने भी गर्मी से बचाव के लिए प्रबंध करने प्रारंभ कर दिये हैं। इस बारे में गृहिणी ज्योति का कहना था कि वह जब भी काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलती हैं, तो चेहरे को सूती कपड़े से कवर करना नहीं भूलती। इसके साथ ही अधिकांश काले चश्मे का भी प्रयोग करती हैं, ताकि आंखों को भी बचाया जा सके। रही बात नहाने आदि की तो वह घर पर ही प्रातः दोपहर व शाम को सोते समय नहाती हैं।

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