मुजफ्फरनगर: छुटपुट फुहारों ने तोड़ा गर्मी का घमंड

मुजफ्फरनगर: छुटपुट फुहारों ने तोड़ा गर्मी का घमंड

मुजफ्फरनगर। आखिरकार मंगलवार को उपर वाले ने लोगों की सुन ही ली। उसने तेज हवाओं के साथ काले-काले बादलों का समूह भी भेज दिया। लोगों को इस बार भी यही भ्रम था कि आज भी पहले की ही भांति यह काले-काले बदरा धोखा देकर निकल जाएंगे, लेकिन आज यह बदरा धेखेबाज नहीं निकले। यह बरसे वह भी पूरे गरज चमक के साथ शाम के समय। जिसके चलते लोगों को पड़ रही भीषण गर्मी से थोड़ी बहुत निजात मिली। शाम के समय आयी बारिश की फुहारों के बीच युवा भी जमकर भीगे। धीमी रफ्तार से पड़ी बारिश की फुहारों ने मौसम को खुशनुमा बना दिया। हर कोई खुले आसमान के नीचे आ गया था तथा उसके दोनों ही हाथ उफपर को उठे थे। हल्की-हल्की फुहारें ही जारी रहीं, साथ ही आकाशीय गर्जना भी होती रहीं अर्थात गरज चमक के साथ बारिश होती रही। मंगलवार की सुबह भी अन्य सुबहों की ही भांति रही। किसी को भी यह अनुमान नहीं था कि मंगलवार को वह हो जाएगा, जिसकी सभी काफी समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं। वह थी बारिश। पड़ रही गर्मी के चलते तापमान दिन-प्रतिदिन उपर को ही चढ़ता जा रहा था। गर्मी से बचने को लेकर सभी नये-नये तरीके सोचने लगे थे। स्थिति यह हो गयी थी कि दोपहर में कोई विरला ही निकलता था, जिसे काम ही होता था, महिलाओं, बच्चों व बड़ों ने तो एक प्रकार से दोपहर को निकलने से पूरी तरह से किनारा ही कर लिया था। यदि निकलना भी होता था, तो मुंह व सिर पर सूती कपड़ा अवश्य ही होता था। हर कोई पल-पल यह चाह रहा था तथा उपर वाले से हर पल यही दुआ कर रहा था कि बारिश हो जाए। इसके लिए तो कई स्थानों पर हवन-यज्ञ तक किये गये। लोगों की दुआएं मंगलवार की शाम को कबूल हो ही गयीं। धूल भरी आंधी अपने साथ बारिश लिये काले-काले मेघों को भी लेकर आयी। हर कोई यहीं अनुमान लगा रहा था कि यह तेज हवाएं फिर से अपने साथ इन काले-काले बारिश लिए बदरा भी लेकर जाएंगी, लेकिन हुआ इसके बिल्कुल विपरीत। शाम को लगभग पांच बजकर तीस मिनट पर धूल भरी तेज हवाएं प्रारंभ हुई थीं। जिसके प्रारंभ होते ही विद्युत विभाग की ओर से कट कर दिया गया। भले ही धूल भरी हवाएं चल रही थीं, लेकिन इनमें शीतलता थी। जिसके चलते लोग सड़क पर आ गये थे और चल रही शीतल हवा का आनंद ले रहे थे। इसी क्रम के चलते सवा सात बजे आसमान से हल्की-हल्की फुहारे आनी प्रारंभ हो गयीं। बस फिर क्या था बच्चे, युवा वर्ग आदि सभी खुले आसमा के नीचे आ गये और जमकर बारिश का मजा लेने लगे। हालांकि यह बारिश का क्रम लगभग पौन घंटे तक ही जारी रहा। इसके बाद थम गया था। इस पौने घंटे की पड़ी हल्की-हल्की बारिश की फुहारों ने मौसम को एकदम खुशनुमा बना दिया। सभी ने खुले आसमां के नीचे आकर इस खुशनुमा मौसम का जमकर आनंद लिया। हालांकि यह बारिश का क्रम फिर से प्रारंभ हो गया और पूरी रात रह-रह कर चलता रहा। इस बारे में गृहिणी श्रीमती नीरज देवी का कहना था कि चलो देर से ही सही भगवान ने सुन तो ली। थोड़ी देर की ही बारिश ने पड़ रही भीषण गमी का घमंड तो तोड़ ही दिया। इसके चलते मौसम एकदम से परिवर्तित हो गया। जिसका परिणाम है बच्चों सहित युवाओं के द्वारा की जा रही यह मस्ती। वहीं दूसरी ओर नसीरपुर निवासी किसान सतबीर सिंह का कहना था कि यह बारिश खेती के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह उन किसानों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है कि जो पानी की भारी कमी के चलते अपनी आंखों के सामने अपनी फसलों को नष्ट होती देख रहे थे।

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