ग्रहण के कारण बंद रहे मंदिरों के कपाट

ग्रहण के कारण बंद रहे मंदिरों के कपाट

मुजफ्फरनगर। आज रक्षाबंधन का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया गया। रात्रि मंे चंद्रग्रहण होने के कारण नगर के सभी मंदिरों के कपाट दोपहर एक बजे से ही बंद कर दिये गये। जिसके चलते शाम समय मंदिरों में होने वाली आरती का आयोजन नहीं हो सका। ग्रहण के बाद प्रातः पांच बजे नगर के सभी मंदिरों के कपाट पहले ही की भांति खोले जाएंगे और भगवान की आरती की जाएगी। ग्रहण के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए गांधी कालोनी के द्वारकापुरी मोड़ पर स्थित श्री अनंतेश्वर महादेव मंदिर के महात्मा महात्मा सर्वानंदपुरी महाराज ने बताया कि पांचवें सोमवार को रक्षाबंध्न के अवसर पर रात्रि को चंद्रग्रहण होने के चलते आज शाम को सभी मंदिरों के कपाट बंद रहंेगे। जिसके चलते शाम की आरती का आयोजन नहीं हो सकेंगे। जो सावन के अंतिम सोमवार को पंचदीप की आरती होती है। पांचवें सोमवार को ग्रहण होने के चलते चौथे सोमवार को ही पंचदीप की आरती का आयोजन किया गया था। इस मौके पर सभी श्रद्धालुगण घर से थाली में पंच दीपक जलते हुए लेकर मंदिर में आये थे। महात्मा सर्वानंदपुरी महाराज ने आगे बताया कि चंद्रग्रहण होने के चलते दोपहर एक बजे ही भगवान शंकर को आराम कराया गया। उसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिये गये।
पंडित सुनील भारद्वाज 'अंगीरा' ने जानकारी देते हुए बताया कि सूतक लगा होने के कारण सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिये जाते हैं। यह ग्रहण रात्रि दस बजकर 52मिनट व 56 सेकेंड पर प्रारंभ होकर रात्रि 12 बजकर 48 मिनट व नौ सेकेंड पर समाप्त होगा। भारत के अतिरिक्त यह खंडग्रास चंद्रग्रहण दक्षिणी व पूर्वी एशिया के देशों में सम्पूर्ण यूरोप दक्षिणी, आस्ट्रेलिया मंे दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक सात अगस्त को दोपहर एक बजकर 53 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगा। उनका कहना था कि ग्रहण के चलते कपाट बंद होने के बाद किसी प्रकार की आरती व अन्य कार्यों का नहीं किया जाता है। उस समय भगवान आराम कर रहे होते हैं। ग्रहण के उपरांत ही प्रातः को कपाट खुलने के बाद ही सभी शुभ कार्यों का संपादन किया जाता है। यदि इस बीच कोई व्यक्ति कुछ करता है, तो वह मान्य नहीं होता है।

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